तेलंगाना हाई कोर्ट ने 33 वर्षीय व्यक्ति को अपनी रिट अपील वापस लेने की अनुमति दे दी है। सैयद अली हुसैन रिजवी नाम के इस शख्स को पहले पाकिस्तानी नागरिक घोषित किया जा चुका था। अदालत में सैयद अली हुसैन रिजवी ने अचानक अपना एक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया, जिसके बारे में उसका दावा था कि उसे 2022 में जारी किया गया था।
साथ ही, याचिकाकर्ता के शपथपत्र में यह भी दर्ज था कि उसने कभी भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह की अगुवाई वाली खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जी. एम. मोहिउद्दीन भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि अदालत पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर सकती और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता है।
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कराची से क्या कनेक्शन?
सरकार की ओर से गृह विभाग के अधिवक्ता महेश राजे ने दलील दी कि सैयद अली हुसैन रजवी की मां गोहर फातिमा के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उसका नाम इमरान आबिद उर्फ इमरान हुसैन दर्ज है। उन्होंने बताया कि सैयद अली हुसैन रजवी का जन्म कराची में हुआ था और वह फरवरी 1994 में अपनी मां के साथ भारत आया था।
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पासपोर्ट पर कोर्ट के सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पास पासपोर्ट था तो उसने पुलिस जांच के दौरान क्यों नहीं दिखाया? अदालत ने यह भी कहा कि हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं और अलग नाम से पासपोर्ट पेश किया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है। जब सरकारी वकील ने बताया कि सैयद अली हुसैन रजवी ने 5 जुलाई 2025 को खुद को पाकिस्तानी नागरिक बताते हुए लॉन्ग-टर्म वीजा के लिए आवेदन किया था।
सैयद अली हुसैन रजवी वकील ने दावा किया कि पुलिस के दबाव में यह आवेदन कराया गया है। अदालत ने पूछा कि क्या यह महत्वपूर्ण तथ्य शपथपत्र में दर्ज है। याचिकाकर्ता के वकील ने अपील वापस लेने की अनुमति मांगी है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पासपोर्ट वैध है तो पासपोर्ट अथॉरिटी के सामने पेश कर सकता है।