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तय मानक से भी नीचे गिरा शिक्षा पर खर्च, सिर्फ 51% बच्चे ही कर पाते हैं 12वीं पास

यूनेस्को की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च तय मानक से नीचे गिर गया है। वहीं सिर्फ 51% बच्चे ही 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर पाते हैं।

India Education Spending

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit - Chat GPT

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भारत में शिक्षा पर खर्च को लेकर हाल ही में यूनेस्को की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दिए गए आंकड़ों के मुताबिक एक तरफ देश अपनी जीडीपी (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) का 4.1% हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रहा है। यह खर्च यूनेस्को के तय न्यूनतम मानक से थोड़ा ऊपर है। दूसरी ओर सरकार जो कुल पैसा खर्च करती है, उसमें शिक्षा को मिलने वाला हिस्सा लगातार घटता जा रहा है।

 

सरकार अपने कुल सरकारी खर्च का 14.2% प्रतिशत ही शिक्षा पर खर्च कर रही है। साल 2015 में यह आंकड़ा 15.7% था, जो अब गिरकर अब सिर्फ 14.2% रह गया है। करीब 10 साल में इसमें 1.5 प्रतिशत की कमी आई है।
 
यह खर्च तय मानक 15% से भी नीचे है। यूनेस्को की 2026 SDG-4 स्कोरकार्ड रिपोर्ट में सामने आया यह आंकड़ा सिर्फ बजट की बहस नहीं, बल्कि करोड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यूनेस्को की रिपोर्ट बताती है कि जिस रफ्तार से पैसा घट रहा है, उससे बच्चों और उनके पढ़ाई के बीच की खाई और चौड़ी हो सकती है।   

 

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स्कूली पढ़ाई पूरी कराने में भी पीछे

भारत के लिए सिर्फ शिक्षा पर खर्च ही चिंता की बात नहीं है, बल्कि स्कूलों में बच्चों के पढ़ाई पूरी करने की दर भी लक्ष्य से काफी पीछे है। आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई पूरी करने वाले बच्चों की दर 86% है। 2025 के लिए इसका लक्ष्य 99% था। UNESCO ने 2025 के लिए 90% के इस स्तर को हासिल करना संभव माना था। फिलहाल भारत इस आंकड़े से भी 4 प्रतिशत अंक पीछे है। इसके अलावा कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई पूरी करने की दर सिर्फ 51% है, इसका लक्ष्य 84% था। UNESCO ने दोनों स्तरों पर भारत की प्रगति को धीमा माना है। 

दूसरे देशों की क्या है स्थिति? 

चीन की बात करें तो वह भी सिर्फ एक मानक पूरा करता है, यानी GDP का 4% (सरकारी खर्च का 11.9%)। वहीं ब्राजील GDP का 5.6%, सरकारी खर्च का 12.9%, साउथ अफ्रीका दोनों मानक पूरे करता है, इसमें GDP का 6%, सरकारी खर्च का 19.1%। इसके अलावा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान कोई भी मानक पूरा नहीं करते हैं।

 

अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे अमीर देश भी GDP वाला मानक तो पूरा करते हैं, पर सरकारी खर्च वाला नहीं। वहीं स्वीडन और स्विट्जरलैंड दोनों मानक पूरे करते हैं। यूनेस्को के मुताबिक अमीर देश अक्सर GDP मानक पूरा कर लेते हैं क्योंकि वे ज्यादा रेवेन्यू जुटाते हैं, जबकि गरीब देशों में शिक्षा का बजट में हिस्सा अक्सर बड़ा होता है।

 

205 देशों में से सिर्फ 39 देश (19%) दोनों मानक पूरे करते हैं, जबकि 72 देश (35%) कोई भी मानक पूरा नहीं करते। भारत सहित 64 और देश ऐसे हैं जो GDP का 4% से ज्यादा खर्च तो करते हैं, लेकिन सरकारी खर्च का 15% से कम। ज्यादा आय वाले देशों में 11% दोनों मानक पूरे करते हैं, जबकि 50% भारत जैसे ही पैटर्न में हैं।  

 

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भारत के लिए चुनौती 

इसके अलावा भारत में लोअर सेकेंडरी पूरी करने की दर 2015 के 81% से बढ़कर अब 86% हो गई है। यह अभी भी 99% के लक्ष्य से 13 प्रतिशत अंक पीछे है। यहां तक कि यूनेस्को के मुमकिन 2025 लक्ष्य 90% से भी यह आंकड़ा 4 अंक कम है। हालांकि, सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं भी चला रही है। UNESCO के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना करीब 15.6 करोड़ बच्चों तक पहुंच रही है। वहीं पीएम पोषण योजना करीब 11.8 करोड़ बच्चों को 11.2 लाख सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कवर करती है।


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