उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी नई टीम बना डाली है। अब चर्चा है कि केंद्र की सरकार में भी कई फेरबदल हो सकते हैं। इस बदलाव से पहले एक रोचक घटना हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मौजूदा राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम रहे दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किया है। इससे पहले साल 2017 से ही एडमिरल डी के जोशी यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले चर्चा थी कि केंद्र सरकार में दिनेश शर्मा को कोई अहम भूमिका मिल सकती है। अब इस नियुक्ति से स्पष्ट हो गया है कि कम से कम वह तो मंत्री बनने की रेस में नहीं हैं।
सितंबर 2023 में राज्यसभा के सदस्य नियुक्त हुए दिनेश शर्मा इससे दिल्ली उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य थे। वह
योगी आदित्यनाथ
की सरकार में 2017 से 2022 तक उपमुख्यमंत्री भी थे। 2022 के चुनाव के बाद उनकी जगह पर ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बना दिया गया। राज्यसभा में वह उपराष्ट्रपति की ओर से तय पैनल के भी सदस्य रहे। इसके अलावा, वह फाइनेंस कमेटी, आधिकारिक भाषा कमेटी और कई अन्य समितियों के सदस्य भी रहे।
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क्या बोले दिनेश शर्मा?
अपनी इस नियुक्ति पर दिनेश शर्मा ने लिखा है, 'महामहिम राष्ट्रपति जी, माननीय प्रधानमंत्री जी, माननीय गृहमंत्री जी एवं पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का आभार। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए मैं सभी सम्मानित वरिष्ठजनों, शुभचिंतकों, मित्रों एवं देशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपनी शुभकामनाओं और आशीर्वाद से मुझे निरंतर प्रेरित किया। यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि संविधान, राष्ट्र और जनसेवा के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ इस दायित्व का निर्वहन करने का संकल्प लेता हूं। आप सभी का स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद सदैव इसी प्रकार बना रहे।'
सक्रिय राजनीति में रहने वाले दिनेश शर्मा लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और फिरल लखनऊ के मेयर भी रहे हैं। साल 2014 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया था। वह जिस सीट से राज्यसभा के सांसद हैं, उसका कार्यकाल नवंबर 2026 तक है लेकिन अब उन्हें इस्तीफा देना होगा।
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माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति ब्राह्मण समाज की बढ़ती नाराजगी देखकर भी की गई है। सौम्य छवि और शांत चरित्र के नेताओं में गिने जाने वाले दिनेश शर्मा विवादों से दूर रहे हैं और बीजेपी के लिए लंबे समय तक काम करते आए हैं। यूपी के चुनाव से पहले उन्हें बड़ा पद देकर ब्राह्णणों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी बीजेपी ने कोशिश की है।