कांग्रेस ने
नरेंद्र मोदी
सरकार पर आरोप लगाया है कि मनरेगा को खत्म करके नई योजना 'VB-G RAM G' लाना ग्रामीण गरीबों के सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा हमला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में दावा किया था कि इस नई व्यवस्था के जरिए ग्रामीण मजदूरों के हक और मजदूरी की व्यवस्थित चोरी की जा रही है। उन्होंने सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के बीड जिले का हवाला देते हुए कहा कि वहां कागजों पर तो हजारों मजदूर काम करते दिख रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कार्यस्थलों पर कोई मजदूर मौजूद नहीं है और फर्जीवाड़े के जरिए स्थानीय नेताओं द्वारा उनकी मजदूरी हड़पी जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि यह समस्या केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से फर्जी हाजिरी और क्लोन ऐप जैसे घोटालों की खबरें आ रही हैं। कांग्रेस का तर्क है कि 1 जुलाई से लागू हुआ यह नया कानून तकनीक के नाम पर जरूरतमंदों को काम से बाहर करने, पंचायतों के अधिकार छीनने और सारी शक्तियां केंद्र में समेटने का जरिया बन गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि करीब दो दशक पुरानी मनरेगा योजना को बंद करके सरकार ने संकट के समय ग्रामीणों का सबसे बड़ा सहारा छीन लिया है। सरकार के आंकड़े, कांग्रेस के आरोपों से ठीक उलट हैं।
क्या कह रहे हैं आंकड़े?
ग्रामीण रोजगार की नई योजना, विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के तहत 24 सितंबर 2026 तक देशभर में 97.17 लाख काम चल रहे थे। करीब 2.31 लाख ग्राम पंचायतें इस समय काम करवा रही हैं। योजना 1 जुलाई 2026 से लागू है।
VB-G RAM G अधिनियम, 2025 हर ग्रामीण परिवार को हर वित्त वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देता है। यह उन परिवारों के लिए है, जिनके वयस्क सदस्य बिना हुनर वाला शारीरिक काम करने के लिए आते हैं। सरकार के मुताबिक महात्मा गांधी नरेगा से नए ढांचे में बदलाव बिना रुकावट हुआ है।
कितने मजदूरों को मिल रहा है काम?
ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि साल 2026-27 में अब तक 10.88 करोड़ सक्रिय मजदूर दर्ज हुए हैं। 31.69 करोड़ से ज्यादा कार्यदिवस बने हैं। मांग पर काम पाने वाले मजदूर 2.81 करोड़ से ज्यादा हैं जो करीब 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों से आते हैं। कुल 15.17 करोड़ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी हुए हैं। महिलाओं की भागीदारी 61.65 फीसदी है। मजदूरी की दर 300 रुपये से 450 रुपये प्रतिदिन के बीच है।
कामों की स्थिति भी बताई गई है। 97.17 लाख काम चल रहे हैं और करीब 20.16 लाख कार्यस्थल सक्रिय हैं। अब तक 2.83 लाख संपत्तियां बनी हैं। आगे की रोजगार मांग के लिए 73.24 लाख मंजूर काम तैयार हैं। मजदूरों को भुगतान के लिए 3.76 करोड़ डीबीटी लेनदेन हुए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 93,841 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया गया है। इसमें से पहली किस्त के तौर पर 25,880 करोड़ रुपये का मदर सैंक्शन जारी हुआ है।
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कैसे बनती है गांव की योजना?
कानून के तहत हर ग्राम पंचायत को विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) बनानी है। यह योजना ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की भागीदारी से तैयार होती है। ग्राम सभा इसकी सिफारिश करती है और इसे मंजूरी देती है। पहले गांव की मौजूदा संपत्तियों और कमियों की सूची बनती है। जरूरत के हिसाब से काम तय किए जाते हैं।
योजना बनाने में GIS, युक्तधारा और पीएम गति शक्ति जैसे डिजिटल टूल इस्तेमाल होते हैं। ये योजनाएं ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ी जाती हैं। VGPP ढांचे में 318 तरह के काम मंजूर हैं। ये काम जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से जुड़े ढांचे और मौसम की चरम घटनाओं से बचाव के चार विषयों में आते हैं।
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निगरानी और भुगतान कैसे हो रहा है?
सरकार के मुताबिक ई-केवाईसी और हाजिरी चेहरे और बायोमेट्रिक पहचान से दर्ज होती है। कामों की जियो-टैगिंग होती है और ई-मेजरमेंट बुक का इस्तेमाल होता है। भुगतान डीबीटी से किया जाता है। निगरानी के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड और AI आधारित विश्लेषण भी इस्तेमाल हो रहे हैं।