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सुभाष चंद्रा के खिलाफ मुकेश अंबानी ने रचा षड्यंत्र? Zee के मालिक के गंभीर आरोप

सुभाष चंद्रा ने खुद मीडिया के सामने आकर अंबानी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि मुकेश अंबानी ने सामने से ने आकर उनके ग्रुप ने आरोपों का खंडन किया है।

Subhash chandra

Zee के मालिक सुभाष चंद्रा।

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देश के दो बड़े उद्योगपति आपस में आरोप लगाकर भिड़ गए हैं। ये उद्योगपति एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और रिलायंस ग्रुप के मालिक मुकेश अंबानी हैं। चंद्रा ने खुद मीडिया के सामने आकर अंबानी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि मुकेश अंबानी ने सामने से ने आकर उनके ग्रुप ने आरोपों का खंडन किया है। दअसल, सुभाष चंद्रा ने शुक्रवार को मीडिया प्लेटफॉर्म्स के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जिसका रिलायंस ने बयान जारी करके गलत बताया।

 

सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया है कि रिलायंस से जुड़ी मीडिया कंपनियां उनके खिलाफ गलत आरोप लगाते हुए फेक खबरें प्लांट कर रही हैं। चंद्रा के आरोपों का जवाब देते हुए रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा कि वह आरोपों से निराश है। उनके मीडिया बिजनेस का इस्तेमाल किसी पर हमला करने के लिए नहीं हुआ और न आगे होगा। वह सुभाष चंद्रा का सम्मान करते हैं।

 

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मुकेश अंबानी के पास गए थे चंद्रा

 

सुभाष चंद्रा ने कहा है कि जब उनकी समस्या शुरू हुई तो वह जनवरी 2019 में मुकेश अंबानी के पास गए थे, जिस दिन वह मुकेश अंबानी से मिलकर वापस आए तो उनके आदमियों ने मिलकर 'Zee' का शेयर तोड़ा था। मगर उनको पकड़ नहीं सकते क्योंकि उनकी हजारों बेनामी कंपनियां हैं, जिनसे शेयर बाजार प्रभावित किया जाता है। 

 

 

 

 

अंबानी पर चंद्रा के गंभीर आरोप

 

चंद्रा ने इसके आगे कहा, 'सालभर बाद मैं मुकेश अंबानी के पास गया और उनसे कहा कि Zee खरीद लो... क्योंकि मुझे बेचकर कर्जा चुकाना है। उन्होंने हितैशी बनकर कहा कि आप क्यों इतना ब्याज समेत बैंकों का पैसा चुका रहे हैं? कोई नहीं चुकाता। इसके बाद मैं वापस घर आ गया। मगर इसके तुछ समय बाद उन्होंने गलत तरीके से Zee को हथियाने की कोशिश की।' 

 

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विवाद की वजह क्या है?

 

NCLT ने सुभाष चंद्रा के दिवालिया मामले में एक सेटलमेंट को मंजूरी दी है। इसके तहत 22,006 करोड़ रुपये के कुल दावों के बदले चंद्रा को अपनी निजी संपत्ति से सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देने होंगे। इतनी बड़ी रकम के बदले सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये मिलने की वजह से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि बैंकों को 99.97% का नुकसान झेलना पड़ रहा है।


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