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'कांग्रेस और गांधी परिवार में एंटी-इनकंबेंसी', राहुल गांधी के बयान पर बोली BJP

बीजेपी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी क्यों नहीं होती? राहुल गांधी के इसी बयान पर सियासी हंगामा मच गया। बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तुरंत पलटवार किया।

Rahul Gandhi vs Sudhanshu Trivedi

राहुल गांधी और सुधांशु त्रिवेदी। AI Edit। Photo Credit: BJP/Congress

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर धांधली का आरोप लगाया। उनका दावा है कि आमतौर पर सरकारों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी होती है। लेकिन कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के साथ ऐसा हुआ, लेकिन नरेंद्र मोदी , अमित शाह और बीजेपी के साथ ऐसा क्यों नहीं होता?

 

बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार में एंटी-इनकंबेंसी है। जब से पारदर्शी चुनाव और स्वतंत्र मीडिया हो गया है तब से कांग्रेस को सत्ता में आने में लाले पड़ रहे हैं। बीजेपी ने बांग्लादेश घुसपैठियों का जिक्र किया। यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेशी मतदाताओं के सहारे सत्ता में आना चाहती है।

 

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बंगाल से बिहार तक की दिलाई याद

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को ज्ञान और विवेक शून्य बताया। राहुल गांधी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा कि एंटी-इनकंबेंसी इस देश का सत्य है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'तमिलनाडु में कांग्रेस 1967 के बाद कभी नहीं लौटी। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी का नाम नहीं था। बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं आई। 2011 तक 34 साल कम्युनिस्टों की सरकार रही। राहुल गांधी को यह समझ में नही आता और दिखाई नहीं पड़ता है।'

 

सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा, 'बिहार में 1990 के बाद कभी कांग्रेस नहीं रही। तीन बार लगातार लालू यादव की सरकार रही। राहुल गांधी को इसका ज्ञान ही नहीं। 1989 के बाद उत्तर प्रदेश यानी गांधी परिवार के गृह राज्य में सरकार नहीं रही। 1999 के बाद ओडिशा में सरकार नहीं बनी। ममता बनर्जी की तीन बार सरकार बनी। त्रिपुरा में लगातार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार रही है।'

बूथ कैप्चरिंग, बैलेट और वोटर आईडी का जिक्र

बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जिस जमाने में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही। जिस जमान में वोटर आईडी कार्ड नहीं थे। जिस जमान में बूथ कैप्चरिंग होती थी। जिस जमाने में बैलेट बॉक्स लूटे जाते थे। जिस जमाने में गोलियां चलती थी। तब तक एंटी-इनकंबेंसी कांग्रेस के लिए भी काम नहीं करती थी। 

'सत्ता में आने के लाले पड़े'

उन्होंने कहा कि जब से पारदर्शी चुनाव व्यवस्था हो गई। स्थानीय पुलिस के अलावा केंद्रीय बल आ गए। जब से सीसीटीवी की लाइव फुटेज आती है। जब से स्वतंत्र मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका हो गई है तब से उनको सत्ता में आने के लिए लाले पड़ गए हैं।

सोनिया और राहुल गांधी ने सबसे ज्यादा एंटी-इनकंबेंसी झेला

त्रिवेदी ने तंज भरे लहजे में कहा कि यह सच है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के आने के बाद कांग्रेस को एंटी-इनकंबेंसी का ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि सोनिया गांधी 1997 में सक्रिय राजनीति में आईं। उसके बाद 1998 में कांग्रेस मध्य प्रदेश में रिपीट हुई। इसके बाद किसी राज्य में रिपीट नहीं हुई। उन्होंने आगे कहा केरल में कांग्रेस रिपीट होती थी, लेकिन राहुल गांधी के चरण वहां पड़ने से पिछली बार कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं आई। एंटी-इनकंबेंसी कांग्रेस और गांधी परिवार के अंदर है।

 

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बीजेपी का कहना है कि गांधी परिवार 100 साल से कांग्रेस की सत्ता में है। आज एंटी-इनकंबेंसी इतनी मजबूत हो गई है कि अपनी सीट बगैर अपने सहयोगी दल की बैसाखी से नहीं जीत सकते। पिछले 25 साल से रायबरेली और अमेठी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के समर्थन से जीतती रही है। त्रिवेदी ने दावा किया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी बिना सपा के  समर्थन के अपने दम पर अपनी ही खानदानी सीट नहीं निकाल सकते हैं। आगे कहा कि राहुल और प्रियंका गांधी ने वायनाड सीट भी मुस्लिम लीग के समर्थन से जीती।

मीडिया रिपोर्ट पर बीजेपी ने उठाए सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव आयोग से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया था। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, 'राहुल गांधी ने जिस मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया, उसमें एक भी चुनाव आयुक्त का वर्जन नहीं है। सर्वसम्मति से जुड़े नियम से जुड़ी कोई रिपोर्ट नहीं है। कोई भी ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस नही हैं, जिसमें तीनों चुनाव आयुक्त न हो।'

 

उन्होंने कांग्रेस से सवाल पूछा कि इस बात का आधार क्या है? आगे कहा कि अगर काल्पनिक बातें ही करें तो उसी अखबार ने अप्रैल 2012 में अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि कांग्रेस की सरकार इतना डर गई थी कि उसे लगने लगा था कि सेना कैप्चर कर लेगी।  

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