logo

मूड

ट्रेंडिंग:

BNSS 163 के तहत आपके खिलाफ केस हो गया तो क्या हो सकता है?

दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शन में पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने BNSS की धारा 163 का उल्लंघन किया है। क्या सजा हो सकती है, आइए जानते हैं।

Delhi Police PTI

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन। Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर सोमवार को प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने सार्वजनिक आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि संसद की ओर मार्च निकाल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारी अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक थे। 

पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देशों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मना किया और लागू निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन किया। उन्होंने पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुओं से हमला किया, बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस ने बताया कि इस हिंसा में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। 

यह भी पढ़ें: 'तुम्हारे कपड़े फाड़कर नंगा भगाएंगे', CJP प्रदर्शनकारियों की आपबीती क्या है?

पुलिस के क्या आरोप हैं?

पुलिस ने कहा है कि हिंसक भीड़ ने 15 से 20 सरकारी वाहनों को क्षति पहुंचाई। इस मामले में 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसे आरोपों में BNSS की धाराओं के तहत FIR दर्ज की जा रही है। अब ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि धारा 163 तोड़ने की अधिकतम क्या सजा हो सकती है?

धारा 163 क्या है, क्यों पुलिस ने दिल्ली में लागू किया?

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विशाल अरुण मिश्रा ने बताया, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 निषेधाज्ञा से संबंधित है। यह धारा मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को आपातकालीन स्थिति में निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार देती है। अगर कोई व्यक्ति, जगह या इलाका ऐसा काम कर रहा है जिससे लोगों को परेशानी हो, किसी की जान-माल को खतरा हो, दंगा-फसाद की आशंका हो या सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना हो, तो मजिस्ट्रेट लिखित आदेश जारी कर सकता है।'

यह भी पढ़ें: पुलिस की लाठियां, बारिश, अनशन..., CJP प्रदर्शन नहीं खत्म होगा, सरकार मानेगी बात?



एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'इस आदेश में व्यक्ति को कोई काम न करने या अपनी संपत्ति के संबंध में कोई खास व्यवस्था करने का निर्देश दिया जा सकता है। यह आदेश किसी खास व्यक्ति, किसी इलाके के निवासियों या पूरे इलाके के लोगों पर लागू हो सकता है। सामान्य स्थिति में यह आदेश दो महीने तक ही लागू रहता है, लेकिन अगर राज्य सरकार जरूरी समझे तो इसे और छह महीने तक बढ़ा सकती है।'

अगर प्रदर्शनकारियों पर उल्लंघन का आरोप लगे तो क्या होगा?

एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 खुद में किसी सजा का प्रावधान नहीं करती है। 'पब्लिक ऑर्डर' के उल्लंघन पर लगने वाली धारा 223 है। यह धारा कहती है क अगर कोई शख्स, किसी सक्षम सरकारी अधिकारी की ओर से जारी आदेश का उल्लंघन करता है तो उसे सजा हो सकती है।'

यह भी पढ़ें: दुलारा, दर्द पूछा और उठाई आवाज, CJP के आंदोलन में कैसे छा गईं डिंपल यादव?

कितना सजा मिल सकती है?

धारा 223 के मुताबिक अगर सरकारी सक्षम अधिकारी की अवज्ञा से लोगों को परेशानी, नुकसान या बाधा पहुंचती है तो छह महीने तक की कैद, 2,500 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर इससे किसी की जान-माल को खतरा हो, दंगा-फसाद की आशंका बढ़े या सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो तो सजा बढ़कर एक साल तक की कैद, 5,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकती है।  


और पढ़ें