अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर विपक्ष समेत किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि इसमें कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर नहीं रखा गया है। हालांकि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा की है।
दावा है कि कई अनाज और सब्जियों को बाहर रखा गया है, लेकिन सरकार अभी तक यह नहीं पता रही कि उसने किन-किन कृषि उत्पादों को हरी झंडी दी है। जो जानकारी केंद्र सरकार से मिलने चाहिए थी, वह डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस से मिल रही है। इससे न केवल विपक्ष बल्कि किसानों की चिंता बढ़नी लाजिमी है।
सरकार से अलग व्हाइट हाउस का दावा
सरकार का दावा है कि डेयरी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण दिया गया है, जबकि व्हाइट हाउस अलग ही बात कह रहा है। अपनी फैक्टशीट में व्हाइट हाउस ने बताया कि भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और सूखे अनाज, लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पादों समेत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा।
भारत सरकार बातें छिपा रही: किसान संघ
किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि अभी भारत सरकार छिपाकर रख रही है। सभी बातें बता नहीं रही है। आप 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं। आपने जो भी समझौता किया है, उसे देश के समक्ष सारी बात रखनी चाहिए। कृषि क्षेत्र पर कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा। उधर, ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. विजू कृष्णन का कहना है कि भारतीय किसान भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी किसानों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
यह भी पढ़ें: बिहार-महाराष्ट्र के बाद यूपी में कमाल दिखा पाएंगे औवैसी? क्या कहते हैं आंकड़े
देश को गुमराह किया जा रहा: अकाली दल
अकाली दल की सांसद हरसिमरत ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील पर देश को गुमराह किया जा रहा है। जानवरों के चारे और सेब-संतरे जैसे ताजे फलों के नाम पर अमेरिकी मक्का, सोयाबीन और ज्वार जैसे भारी सब्सिडी वाले खेती के सामान को देश में लाने से हमारे किसानों की हालत खराब होगी। विदेशी सेब के आने से हमारे किसानों का क्या होगा? उन्होंने कहा कि देश के किसानों को बर्बाद करके देश आबाद नहीं कर सकते हैं। हरसिमरत ने पूछा कि घुटने टेकने की जरूरत क्या थी? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
वाणिज्य विभाग ने एक बयान में कहा, 'इंडिया-यूएस ट्रेड डील के तहत भारतीय किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं। सब्जियों की एंट्री की इजाजत नहीं है। फ्रोजन सब्ज़ियां, कुछ समय के लिए सुरक्षित सब्ज़ियां और अलग-अलग तरह की डिब्बाबंद सब्ज़ियां अभी भी बाहर हैं। इससे सेंसिटिव खेती के सेक्टर में कोई छूट नहीं मिलेगी।' हालांकि विभाग यह नहीं बताता है कि किन-किन कृषि उत्पादों को छूट दी गई है।
अखिलेश और राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर देश के किसानों की मेहनत और खून पसीने को बेचने का आरोप लगाया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्रेड डील पर आपत्ति जताई। लोकसभा में उन्होंने कहा, 'इस डील के बाद हमारे किसानों का हाल क्या होगा? जब सब कुछ विदेश से ही आएगा तो हमारा किसान भारत में क्या उगाएगा। अभी तक किसानों को एमएसपी की गारंटी ये सरकार नहीं दे पाई।'
अखिलेश यादव का कहना है कि अमेरिका से डील नहीं ढील हुई है। बजट पर सबसे पहला सवाल यही है कि डील पहले बनी या बजट। 500 बिलियन डॉलर का व्यापार एकतरफा? हमारी आत्मनिर्भरता, स्वदेशी नारा कहां जाएगा? जनता भाजपा से जानना चाहती है कि 0 बड़ा या 18।
सरकार ने किया किसान हितैषी होने का दावा
कर्नाटक बीजेपी ने अपने एक्स पोस्ट पर लिखा, 'किसान पहले, देश सबसे ऊपर। मोदी सरकार की साफ पॉलिसी- किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं। भारत-यूएस ट्रेड एग्रीमेंट में साफ तौर पर कहा गया है कि रागी, गेहूं, चावल, ज्वार, साजा, मक्का वगैरह समेत कई भारतीय अनाज इम्पोर्ट नहीं किए जा सकते। आत्मनिर्भर खेती, देसी खाना और अन्नदाताओं का सम्मान- यही न्यू इंडिया की असली पहचान है।'
यह भी पढ़ें: फाइलेरिया भारत में कितनी बड़ी समस्या, भारत सरकार ने चलाया अभियान
हाल यह है कि कर्मचारियों से जुड़ा विभाग कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) ने भी सोशल मीडिया पर सफाई देने में जुटा है। अपने पोस्ट में विभाग ने लिखा, 'इंडिया-US ट्रेड डील: किसान पूरी तरह सुरक्षित, सूखी सब्जियां, बीन्स और दालें और कंद-मूल समेत सब्जियों की एंट्री नहीं। भारत के खेती के हितों की सुरक्षा के लिए कोई छूट नहीं दी गई।'
प्रेस सूचना ब्यूरो ने अपनी एक पोस्ट में बताया कि 1.36 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय कृषि निर्यात को अमेरिका में शून्य अतिरिक्त शुल्क पर पहुंच प्राप्त होगी। मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे ओट प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे प्रमुख उत्पादों को 'शून्य-शुल्क' का लाभ मिलेगा। डेयटी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण बरकरार रखा गया है।