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'कुत्ते काटें या न काटें हादसे की वजह बन रहे हैं..' SC ने कुत्तों पर क्या कहा?

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की वजह से न सिर्फ लोगों के साथ घटनाएं हो रही हैं बल्कि सड़क दुर्घटना भी बढ़ गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताई है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि आवारा कुत्तों की वजह से न सिर्फ लोगों को काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, बल्कि सड़क हादसों में भी लोगों की जान जा रही है। अदालत ने कहा कि सड़कों को आवारा कुत्तों से मुक्त करना अब जरूरी हो गया है।

 

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए कहा कि बच्चे और बुजुर्ग लगातार कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि पिछले 20 दिनों में दो सड़क हादसे खुद जजों के साथ हुए हैं, जिनमें एक जज को रीढ़ की गंभीर चोट आई है।

 

कोर्ट ने कहा कि किसी को नहीं पता होता कि सुबह सड़क पर कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा। नगर निगम और स्थानीय निकाय अब तक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को ठीक से लागू नहीं कर पाए हैं, जबकि इन्हें सख्ती से लागू करना जरूरी है।

 

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कई राज्यों ने अब तक हलफनामा नहीं दिया

कोर्ट को एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि अब तक केवल 10 राज्यों ने ही यह जानकारी दी है कि वे आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने अब तक कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया है। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

 

गौरतलब है कि 22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को ABC नियम लागू करने और कुत्तों की संख्या, नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर की जानकारी देने का आदेश दिया था। इसके बाद नवंबर 2025 में कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकारों को हाईवे से आवारा जानवर हटाने के निर्देश भी दिए थे। साथ ही स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को आठ हफ्ते में फेंसिंग करने को कहा गया था।

 

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कोर्ट रूम की अहम बातें

सुनवाई के दौरान पशु अधिकारों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, के.के. वेणुगोपाल और कॉलिन गोंजाल्वेस ने अपनी दलीलें रखीं।

 

कपिल सिब्बल ने कहा कि वे कुत्तों से प्रेम करने वाले लोगों की ओर से पेश हो रहे हैं। उन्होंने नसबंदी और टीकाकरण को जरूरी बताया और कहा कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखने से बीमारियां फैल सकती हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों और बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम है और रोकथाम इलाज से बेहतर है।

 

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि चाहे कुत्ते काटें या न काटें, सड़कों पर दौड़ते जानवर हादसों की वजह बन रहे हैं, इसलिए सड़कों को कुत्तों से मुक्त करना ही होगा।

देश में 1 करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते

नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) की ओर से बताया गया कि देश में कुल 5.25 करोड़ कुत्ते हैं, जिनमें 1 करोड़ से ज्यादा आवारा हैं। इनके लिए करीब 77 हजार शेल्टर की जरूरत होगी। एक कुत्ते पर रोजाना करीब 40 रुपये का खर्च आता है, यानी कुल खर्च 61 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

पहले भी बदला जा चुका है आदेश

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ पशु अधिकार समूहों ने विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने आदेश बदलते हुए कहा था कि कुत्तों को स्थायी शेल्टर में रखने की बजाय नसबंदी और टीकाकरण कर वापस छोड़ा जाए।

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