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कौन हैं मनन कुमार मिश्रा, CJP क्यों दे रही BCI ऑफिस घेरने की धमकी?

मनन कुमार मिश्रा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं। वह भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद भी हैं। अब कॉकरोच जनता पार्टी, उनके इस्तीफे की मांग कर रही है।

Manan Kumar Mishra

BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा। Photo Credit: MananMishra/FB

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा नई मुसीबत में फंस गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के लिए मजबूर कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा मांग रही है। वह 10 साल से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं। उनके एक फैसले ने युवाओं को भड़का दिया है। 

CBI ने NALSAR यूनिवर्सिटी के नए स्नातकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। कैंपस में छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJP) को दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने का विरोध किया था। BCI के फैसले का परिषद के सदस्यों ने ही विरोध करना शुरू किया। 

यह भी पढ़ें: 'शिक्षकों ने भड़काया', CJI का विरोध करने वाले छात्रों पर BCI ने पलटा अपना फैसला

क्या था BCI का आदेश?

13 अगस्त 2026 को BCI ने एक आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों को एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट न दिया जाए। वजह बताई गई कि कुछ छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया था।

BCI के ही सदस्य  विरोध में उतरे

BCI के सदस्य और केरल बार काउंसिल के सदस्य मनोज कुमार ने इस आदेश का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह आदेश पूरी तरह गलत है और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में छात्रों को भी अपनी राय रखने का अधिकार है। सिर्फ राय रखने के कारण पूरे बैच को एनरोलमेंट से रोकना गलत है। उन्होंने चेयरमैन से इस आदेश को तुरंत वापस लेने की अपील की।

 

 

पहले कार्रवाई, अब सफाई दे रहे मनन कुमार मिश्रा

BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा कहा है कि सीनियर एडवोकेट्स, बार के सदस्यों और छात्रों की प्रतिक्रियाओं को देखने के बाद मैंने फैसला किया कि 2026 बैच का किसी भी गड़बड़ी में कोई रोल नहीं था। सारी कार्यवाही बंद कर दी गई है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि अपनी बात सम्मान और संस्था के मर्यादा के साथ रखें।

BCI के विवादित आदेश कौन से थे?

BCI ने दो सर्कुलर जारी किए थे। पहला सर्कुलर पूरे बैच को एनरोलमेंट से रोकने के लिए जारी किया गया था। कुछ घंटों बाद दूसरा सर्कुलर आया जिसमें यह रोक हटा ली गई, लेकिन विरोध अभियान शुरू करने वालों की जांच रिपोर्ट मांगी गई। नालसर के कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय इस जांच की मांग को अपने एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सामने रखेगा। वे देखेंगे कि क्या ऐसी जांच विश्वविद्यालय के नियमों और संविधान के मुताबिक सही है या नहीं।

हंगामे की असली वजह क्या है?

नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 450 से ज्यादा छात्रों ने कुलपति से कहा था कि चीफ जस्टिस सुर्यकांत को मुख्य अतिथि न बनाया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन इस फैसले पर दोबारा विचार करे। CJI सूर्यकांत के ही बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताए जाने को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' अस्तित्व में आई, जिसका दायरा इतना बढ़ा कि करीब एक महीने तक जंतर मंतर पर आंदोलन हुआ और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। अब कॉकरोच मनन कुमार मिश्रा की फिर मुसीबत बढ़ाने के लिए तैयार हैं। CJI सूर्यकांत का विरोध देशभर के विश्वविद्याल छात्र कर रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: वकीलों की 'रीलबाजी' पर BCI को सर्कुलर क्यों लाना पड़ा? इनसाइड स्टोरी

क्या धमकी दे रही है CJP?

कॉकरोच जनता पार्टी ने BCI ऑफिस और चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के घर के बाहर प्रदर्शन की धमकी दी। आलोचकों ने कहा कि मनन कुमार मिश्र बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं और 10 साल से ज्यादा समय से BCI की कमान संभाले हुए हैं।

सौरव दास ने क्या कहा?

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने BCI के आदेश को गलत, चिंताजनक और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ असहमति जताने के लिए सामूहिक सजा नहीं दी जा सकती। अगर मनन कुमार मिश्रा आदेश वापस नहीं लेते तो लॉ स्टूडेंट्स, वकील और CJP समर्थक BCI ऑफिस और मनन कुमार मिश्रा के घर का घेराव करेंगे। 

प्रशांत भूषण:-
10 साल से अवैध रूप से चेयरमैन बने मनन कुमार मिश्रा की समझ खत्म हो गई है।

कांग्रेस नेता अजय माकन ने लिखा कि बीजेपी सांसद की अगुवाई वाली संस्था ने सिर्फ असहमति जताने पर पूरे बैच को वकील बनने से रोक दिया। यह गलत, मनमाना और लोकतंत्र के खिलाफ है। BCI को तुरंत आदेश वापस लेना चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने भी मनन मिश्रा को घेरा 

तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि भारत में आधी आबादी महिलाओं की है, फिर भी बार काउंसिल में चुनाव नहीं हुए। इसके बॉस ने अब 2026 के नालसर ग्रेजुएट्स को धमकाया है। 

महुआ मोइत्रा, सांसद, TMC:-
BCI के बिना चुनाव के खुद बने प्रेसिडेंट, BJP के राज्यसभा सदस्य हैं। अब एहसान चुकाने के लिए अपने बॉस की चापलूसी कर रहे हैं।

एनसीपी प्रवक्ता अनीश गवांडे ने कहा, 'करीब 70 छात्रों ने सीजेआई को अतिथि न बनाने का पत्र लिखा था। इसके लिए पूरे बैच को रोका जा रहा है और तीन दिन में नाम मांगे जा रहे हैं। यह आदेश बीजेपी सांसद मिश्रा ने ही दिया है।'

 

 

कौन हैं मनन कुमार मिश्रा?

मनन कुमार मिश्रा देश के चर्चित वकीलों में से एक हैं। वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 10 साल से चेयरमैन हैं। यह देश में विधिक पेशे और कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था है। वह बिहार से राज्यसभा सांसद हैं। अगस्त 2024 में मीसा भारती के लोकसभा के लिए निर्वाचित होने से खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर उन्हें निर्विरोध निर्वाचित किया गया था। मनन कुमार मिश्रा का जन्म बिहार के गोपालगंज में हुआ था। 

मनन कुमार मिश्रा की शुरुआती पढ़ाई गोपालगंज में हुई थी। 1980 में पटना लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री ली, अपने बैच में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। शुरुआत गोपालगंज सिविल कोर्ट से की और एक साल बाद, 1982 में पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 

यह भी पढ़ें: महुआ मोइत्रा केस: सुप्रीम कोर्ट ने 'अंडे' पर क्या कहा कि CJP भड़की?

कैसे BCI के चेयरमैन बने?

1989 में मनन कुमार मिश्रा बिहार स्टेट बार काउंसिल के सदस्य बने। यहीं से उनकी बार राजनीति शुरू हुई। उन्होंने बिहार बार काउंसिल का चुनाव लगातार सात बार जीता। 2010 में पहली बार BCI में बिहार के प्रतिनिधि चुने गए। सुप्रीम कोर्ट में वकालत के बाद 9 नवंबर 2014 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बने। तब से लगातार इस पद पर हैं। 

राज्यसभा सांसद कैसे बने?

मार्च 2025 में सातवीं बार निर्विरोध चुने गए। राजनीति की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की, बाद में BJP से जुड़े। सितंबर 2024 में बीजेपी ने बिहार से राज्यसभा उपचुनाव के लिए उन्हें उम्मीदवार बनाया। अमित शाह की बैठक में फैसला हुआ। वह अभी BCI अध्यक्ष हैं और बीजेपी से राज्यसभा सांसद भी हैं।

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