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77वां गणतंत्र दिवस क्यों जरूरी? वंदे मारतम से समझाएगी सरकार

भारत सरकार गणतंत्र दिवस के दिन परेड में देश की रक्षा क्षमताओं को पूरी दुनिया को दिखाएगी। इस दिन 30 झाकियां भी दिखेंगी।

Vande Mataram

77वां गणतंत्र दिवस। Photo Credit- PTI

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भारत इस बार अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस बड़े मौके पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 2026 का रिपब्लिक डे परेड होने वाली है। इस परेड में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाया जाएगा। साथ ही परेड में भारत की मिलिट्री ताकत और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत दिखाई जाएगी। इसमें सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की 30 झांकियां शामिल होंगी। 

 

गणतंत्र दिवस के दिन ही परेड में भारत की रक्षा क्षमताओं को दिखाया जाएगा और बहादुरी के कामों के लिए बच्चों समेत नागरिकों को सम्मानित भी किया जाएगा।

गणतंत्र दिवस की थीम क्या है?

इस गणतंत्र दिवस की थीम 'स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम' है। इस थीम पर परेड में खास झांकियां और एमएम कीरवानी का बनाया और श्रेया घोषाल का गाया एक नया गाना और 'समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत' भारत की खुशहाली और आत्मनिर्भरता की यात्रा को दिखाया जाएगा। 

 

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आत्मनिर्भर भारत के साथ वंदे मातरम

दरअसल, केंद्र सरकार 150 साल पुराने वंदे मातरम गीत को आत्मनिर्भर भारत के साथ जोड़ रही है, क्योंकि साल 1905 में, वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन का एंथम था। वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में संस्कृत बंगाली में लिखा था। यह पहली बार उनके 1882 के उपन्यास आनंदमठ में छपा। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार इंडियन नेशनल कांग्रेस के 1896 के अधिवेशन में गाया था।

 

वंदे मातरम ब्रिटिश राज के खिलाफ एक नारा बन गया, खासकर 1905 के बंगाल के बंटवारे के खिलाफ आंदोलन के दौरान। साथ ही वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन का राष्ट्रगान था। इस बार संस्कृति मंत्रालय की झांकी में मूल पांडुलिपि और 1875 से इसकी यात्रा दिखाई जाएगी। सरकार वंदे मातरम के जरिए वर्तमान समय में लोगों को स्वदेशी का पाठ पढ़ाएगी।

 

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मुख्य अतिथि कौन हैं?

बता दें कि इस बार के गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हो रही हैं। इन दोनों मेहमानों का परेड में शामिल होना ग्लोबल साउथ और पश्चिमी देशों के बीच एक पुल के तौर पर भारत की भूमिका का संकेत है। जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के ऊपर टैरिफ थोपना शुरू किया है, ऐसे समय में यूरोपियन यूनियन के करीब जाना भारत का कुटनीतिक कदम है।


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