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पैसे ही नहीं, आपकी तस्वीरें तक दांव पर, कैसे ठगी का खेल, खेल रहे साइबर ठग?

बढ़ते डिजिटल दौर में साइबर क्राइम की नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट भारत के असल मामलों के जरिए ठगी के तरीकों, उनसे जुड़ी कानूनी राहत और सुरक्षा के उपायों को आसान तरीके से समझाती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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आजकल हम अपनी छोटी से छोटी जरूरत के लिए मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर हैं लेकिन जैसे-जैसे हम डिजिटल हो रहे हैं, साइबर ठग भी हमें लूटने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। हाल के दिनों में भारत में साइबर क्राइम के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई सिर्फ एक छोटी सी गलती की वजह से गंवा दी। ये ठग डराकर, लालच देकर या फिर आपकी भावनाओं से खेलकर आपके बैंक खाते को निशाना बनाते हैं।

 

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब ठग केवल OTP मांगने तक सीमित नहीं हैं। वे फर्जी पुलिसवाले बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' कर रहे हैं, तो कभी निवेश के नाम पर करोड़ों की चपत लगा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पढ़े-लिखे लोग भी इनके झांसे में आ रहे हैं। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि ये अपराधी काम कैसे करते हैं और अगर आपके साथ कोई हादसा हो जाए, तो कानून आपकी मदद कैसे कर सकता है।

 

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ठगी के कुछ असली तरीके

भारत में साइबर क्राइम करने वाले मुख्य रूप से तीन-चार तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फर्जी इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग जिसमें आपको व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर किसी ग्रुप में जोड़ा जाता है। दावा किया जाता है कि स्टॉक मार्केट में पैसा लगाकर आप रातों-रात अमीर बन जाएंगे। शुरू में आपको थोड़ा मुनाफा दिखाया जाता है ताकि आप ज्यादा पैसा लगाएं और फिर अचानक वह ऐप या वेबसाइट बंद हो जाती है।

 

इसी में दूसरा फेमस तरीका है डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर जिसमें अपराधी खुद को सीबीआई या पुलिस का अधिकारी बताते हैं। वे आपको डराते हैं कि आपके नाम से कोई ड्रग्स का पार्सल पकड़ा गया है। आपको घंटों वीडियो कॉल पर रखा जाता है और जेल जाने से बचने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

 

इम सब में सबसे आसान और फेमस जिसे आइडेंटिटी थेफ्ट कहा जाता है। इसे आम भाषा में पहचान की चोरी कहा जाता है। सोशल मीडिया से आपकी फोटो और जानकारी चुराकर आपके नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाई जाती है और आपके दोस्तों या रिश्तेदारों से इमरजेंसी बताकर पैसे मांगे जाते हैं।

ठगी हो जाए, तो क्या है रास्ता?

अगर आपके साथ कोई साइबर फ्रॉड हो जाता है, तो घबराने के बजाय आपको तुरंत कछ बेहतर कदम उठाने चाहिए। ठगी के पहले 1-2 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जिसे गोल्डन ऑवर कहा जाता है। अगर आप तुरंत 1930 पर कॉल करते हैं या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करते हैं, तो पुलिस आपके पैसे को ठग के खाते में ही फ्रीज करवा सकती है।

 

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अपने बैंक को तुरंत अपने साथ हुए ठगी के बारे में बताएं ताकि वे आपका डेबिट/क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कर सकें। अपराधी के साथ हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी और फोन नंबर को डिलीट न करें। यह आपके लिए सबूत का काम करता है जो  आगे की कानूनी कार्रवाई में बहुत काम आता है।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

साइबर सुरक्षा कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करके आप सुरक्षित रह सकते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी निजी जानकारी किसी अजनबी से शेयर न करें और हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करें। याद रखें, कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर आपसे पैसे की मांग नहीं करती और न ही आपको वीडियो कॉल पर 'अरेस्ट' करती है।


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