दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों की समन्वय समितियों ने मंगलवार को हड़ताल का एलान किया है। शाहदरा बार एसोसिएशन के वकील प्रिंस गौरव ने कहा है शाहदरा थाने में तैनात ACP मनस्वी वशिष्ठ ने वकीलो को धमकाया है, अभद्रता की है और डरा रहीं हैं। समिति ने 26 अक्टूबर को जारी सर्कुलर में ACP और संबंधित SHO को तुरंत निलंबित करने की मांग की है।
समिति ने यह फैसला 26 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई इमरजेंसी बैठक में लिया। बैठक वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज होने के हालात पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी। सर्कुलर पर समिति के चेयरमैन अधिवक्ता नीरज के हस्ताक्षर भी हैं। एडवोकेट प्रिंस गौरव ने बताया है कि वकीलों के साथ पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की है, उनकी बर्खास्तगी के बिना किसी भी समझौते पर वकील विचार नहीं करेंगे।
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वकीलों और पुलिस में ठनी क्यों है?
बार एसोसिएशन की समन्वय समिति का कहना है कि वकीलों के खिलाफ ही 4 FIR पुलिस ने दर्ज की है, जबकि दोषी पुलिस अधिकारी है। एडवोकेट ललित बंसल के सिर में मारपीट के दौरान गंभीर चोट आई थी। इस मामले में अधिवक्ता अमूल्य रतन शिकायतकर्ता हैं। समिति का कहना है कि चोट गंभीर थी, इसलिए पुलिस को कानून के मुताबिक तुरंत, प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए थी। पुलिस ने अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन नहीं किया है।
समन्वय समिति के सर्कुलर में कहा गया है कि 23 अक्टूबर की शाम कई वकील कार्रवाई की मांग को लेकर शाहदरा थाने पहुंचे। आरोप है कि ACP और SHO ने भरोसा दिया कि मामले में नामजद लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। समिति को बताया गया कि उस समय आरोपी थाने में मौजूद थे। वकीलों को 24 अक्टूबर को पता चला कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्हें छोड़ दिया गया।
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'रिवॉल्वर दिख रहे ACP मनस्वी वशिष्ठ'
सर्कुलर के मुताबिक जब वकील इस मामले पर चिंता जताने और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर दोबारा थाने गए, तब ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर उन्हें धमकाया और डराया। समिति के सामने रखे गए ब्योरे में आरोप है कि ACP ने अपनी रिवॉल्वर दिखाई।
समिति ने कहा है कि कानूनी तरीके से न्याय की मांग करने वाले वकीलों को डराया नहीं जाना चाहिए। वकीलों का कहना है कि पुलिसकर्मी अब वकीलों के प्रति कथित अड़ियल रवैया अपनाते हैं, बदतमीजी करते हैं। समिति ने कहा कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ACP और संबंधित SHO को निलंबित किया जाए।
वकीलों को धोखा दे रही है दिल्ली पुलिस?
राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव, विजय बिश्नोई ने कहा, 'हमें पता चला कि कल शाहदरा पुलिस स्टेशन में हमारे कुछ सदस्यों (वकीलों) के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिसके बाद हमने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। जब हमने मामले की जांच की, तो हम यह जानना चाहते थे कि असल में हुआ क्या था। हमें पता चला कि 23 अक्टूबर को कुछ वकीलों के बीच झगड़ा हुआ था, जिसमें एक वकील का सिर फूट गया था। हमने इस घटना की एक तस्वीर और कल का प्रस्ताव (सर्कुलर) भी जारी किया है।'
विजय बिश्नोई, राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन:-
वकीलों ने FIR दर्ज कराई थी और उस मामले के आरोपी उस समय पुलिस स्टेशन में ही मौजूद थे। ACP और संबंधित SHO, दोनों ने भरोसा दिलाया था कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जब वकील 24 अक्टूबर को FIR की कॉपी लेने गए, तो उन्हें पता चला कि सभी आरोपियों को छोड़ दिया गया है। जब वे अपनी शिकायत लेकर शाम को SHO और ACP से मिलने गए तो ACP की हिम्मत तो देखिए, वह अपनी रिवॉल्वर लोड कर रहे थे, उसे दिखा रहे थे और वकीलों को धमका रहे थे। वह अपने इस बर्ताव को सही ठहरा रहे थे और लोगों को उकसा रहे थे। मैं दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अमित शाह जी से यही अपील करूंगा कि ऐसे अधिकारी को उनके पूरे करियर में कभी भी कोई संवेदनशील पोस्टिंग न दी जाए।
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क्या चाहते हैं दिल्ली के वकील?
दिल्ली के शाहदरा कोर्ट से लेकर राउज एवेन्यू कोर्ट के वकीलों तक की मांग है कि पुलिस कानून के दायरे में काम करे, पुलिसकर्मियों की संवैधानिक सीमाएं है, उससे बाहर निकलकर वकीलों का ही दमन न करने लगें। समिति ने इस फैसले को सामूहिक संस्थागत प्रतिक्रिया बताया है। बार एसोसिएशन की मांग है वकील एकजुट रहें। समिति के मुताबिक वकीलों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मुद्दों पर संबंधित संस्थागत अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव विजय बिश्नोई ने कहा कि FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने पर आपात बैठक बुलाई गई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि ऐसे अधिकारी को आगे कोई संवेदनशील पोस्टिंग न दी जाए। राउज एवेन्यू कोर्ट में वकीलों ने इसी मामले को लेकर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने भी कहा है कि पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।