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'बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं', सुप्रीम कोर्ट के 'गाली कांड' पर CJI सूर्यकांत

देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के एक कार्यक्रम में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान जरूरी है।

Suryakant in Constitution club of India

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत। Photo Credit: Khabargaon

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देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम में हुए एक शख्स की ओर से गालीगलौज करने की घटना पर पहली बार बयान दिया है। सोमवार को उन्होंने कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान हर किसी को बनाए रखना चाहिए। 

ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट एसोसिएशन का यह कार्यक्रम आदिश अग्रवाल की ओर से आयोजित कराया गया था। वह इस संस्था के जनरल सिक्रेटरी हैं। इस समारोह में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज पंकज मित्तल और नए नियुक्त जजों का स्वागत किया गया।

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CJI ने सुप्रीम कोर्ट में हुए गालीकांड पर क्या कहा?

सूर्यकांत, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया:-
छोड़िए। बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं। 

जब उनसे सवाल किया गया कि सुप्रीम कोर्ट में हुई इस घटना पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, उन्होंने कहा, 'छोड़िए। बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि हमें संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। यह हम सबकी जिम्मेदारी है और हर किसी को इसे पूरा करना चाहिए।'

जब ठहाके से गूंज उठा ऑडिटोरियम 

एडवोकेट आदिश अग्रवाल कार्यक्रम को मॉडरेट कर रहे थे। जजों ने अपना भाषण खत्म किया तो बात डिनर की आई। उन्होंने कहा कि अब इसके बाद जिसको खाना है, वह खा सकता है लेकिन जज बहुत व्यस्त होते हैं, उनके पास समय नहीं होता है। यह कहते ही CJI सूर्यकांत भी हंस पड़े।  

 

 



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कार्यक्रम में किसने क्या कहा?

ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पी विल्सन ने कहा, 'जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की जरूरत है। मैं संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आऊंगा, जिसमें उनकी उम्र 65 साल से 70 तक करने का प्रावधान होगा।'

रिटायर जस्टिस पंकज मित्तल ने राम चरित मानस की एक चौपाई पढ़ी, जिस पर ऑडिटोरियम गूंज उठा। उन्होंने कहा, 'जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई।' उन्होंने मौजूदा जजों से देशहित में काम करने की अपील की।

 

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क्या था मामला, जिस पर CJI ने यह बात कही?

10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में प्रबल प्रताप नाम के एक याचिकाकर्ता ने केस की सुनवाई के दौरान फाइलें फाड़कर फेंक दी थी और CJI को अपशब्द कहे थे। प्रबल प्रताप, कोर्ट में अपनी दलीलें खुद रख रहा था। वह अचानक भड़क गए और CJI के खिलाफ ही बोलने लगे। उन्होंने जजों को पब्लिक सर्वेंट भी बताया।

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने प्रबल प्रताप ने शुरुआत से ही आपत्तिजनक अंदाज में बाते कहीं थीं। उन्होंने जजों को 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट' कहकर संबोधित किया और कहा कि 'मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ ACP के खिलाफ FIR दर्ज कराएं।'

जस्टिस विश्वनाथन ने असहजता जताई तो याचिकाकर्ता ने कहा, 'मेरी तरफ से बस इतना ही। सब रिकॉर्ड पर है।' अचानक इस बयान के बाद फाइलें फेंकी और गालियां दीं। सुरक्षा कर्मचारियों ने जैसे-तैसे उन्हें काबू में किया। याचिकाकर्ता को कोर्टरूम से बाहर निकाला। बेंच ने प्रबल प्रताप के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। 

 

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