नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रसुवा इलाके में बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से कैलाश की यात्रा पर गए कई भारतीय तीर्थयात्री और पर्यटक लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। रसुवागढ़ी के पास ल्हेंडे खोला और भोटेकोशी नदी के इलाके में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इसी रास्ते से कैलाश और मानसरोवर जाने वाले कई भारतीय यात्री प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश यात्रा से लौट रहा ईशा फाउंडेशन का 80 लोगों का दल भी शामिल है, जिसके 77 सदस्य संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इसके अलावा कोलकाता के 32 यात्रियों के लापता होने की खबर है। वहीं विदेश मंत्रालय के ऑफिशियल स्पोक्सपर्सन ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में बचा लिया गया है।
यह भी पढ़ें: नेपाल: मौत के बाद भी नहीं छोड़ा, लाश के कान से निकाल लीं सोने की बालियां
नेपाल के रास्ते कैलाश तक कैसे पहुंचते हैं यात्री?
निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले कई भारतीय नेपाल का रास्ता चुनते हैं। यह यात्रा आमतौर पर काठमांडू से शुरू होती है और त्रिशूली, धुंचे, स्याब्रुबेसी और रसुवा होते हुए रसुवागढ़ी तक पहुंचती है। यहां से यात्री चीन के तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। इसके बाद ग्यिरोंग से होते हुए मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत तक पहुंचते हैं। इस बार बाढ़ ने इसी कॉरिडोर को प्रभावित किया है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के साथ कई इलाकों में संचार व्यवस्था भी बाधित हुई है। इससे यात्रियों से संपर्क करना मुश्किल हो गया।
सरकारी रूट के बजाय नेपाल क्यों पसंद?
भारत सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो आधिकारिक रास्ते इस्तेमाल करती है, जिसमें उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा और सिक्किम का नाथू ला रूट शामिल है। इस यात्रा पर जाने के लिए यात्रियों का चयन एक तय प्रक्रिया के तहत होता है। सीटें सीमित होती हैं और यात्रियों को लंबी चयन और लॉटरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
दूसरी ओर, निजी टूर ऑपरेटर नेपाल के रास्ते कैलाश यात्रा कराते हैं। इस रूट में काठमांडू से सड़क के जरिए सीमा तक पहुंचने की सुविधा होती है और आगे वाहन, पैदल यात्रा या हेलीकॉप्टर जैसी व्यवस्थाएं ऑपरेटर के अनुसार मिल सकती हैं। खास बात यह है कि यात्रियों को सरकारी यात्रा दल में चयन का इंतजार नहीं करना पड़ता।
यह भी पढ़ें: तिब्बत में फिर टूटा बांध, नेपाल में 'तबाही' का अलर्ट जारी
हालांकि, यह रास्ता जोखिम से खाली नहीं है। कैलाश क्षेत्र का बड़ा हिस्सा 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर है, जबकि डोल्मा ला दर्रा 5,600 मीटर से ज्यादा ऊंचा है। कम ऑक्सीजन, ठंड, कठिन रास्ते और अचानक बदलता मौसम यात्रियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और परिजनों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (+977 985 131 6807 और +977 970 910 7500) जारी किए हैं। दूतावास के अधिकारी लापता लोगों की लोकेशन ट्रेस करने और फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर 24 घंटे ग्राउंड को-ऑर्डिनेशन कर रहे हैं।