logo

मूड

ट्रेंडिंग:

PM मोदी का ड्रग फ्री कैंपेन, किन राज्यों में अटकेगा? आंकड़ों से समझिए

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने रविवार से नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की है। यह योजना कहां फंस सकती है, आइए समझते हैं।

Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में नशे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा ड्रग तस्करी और सेवन के मामले इन्हीं राज्यों से आ रहे हैं। बढ़ते नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने ड्रग के खिलाफ नई पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत की है। 

नशा मुक्त अभियान अगले आने वाले 100 रविवारों तक चलेगा। केंद्र सरकार नशा के से होने वाले नुकसानों को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिससे लोग इससे दूर हो सकें। सरकार की योजना है कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। सरकार नशे से लोगों को बाहर लाने के लिए पुनर्वास केंद्र भी बना रही है।

यह भी पढ़ें: 'शोएब अख्तर, मोहम्मद आसिफ ड्रग्स लेकर आते थे', MHA के पूर्व अफसर का बड़ा खुलासा

ड्रग हाई तो करता है लेकिन परिवार को लो कर देता है

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
ड्रग कुछ समय के लिए आपको हाई देता है लेकिन आपके करियर और परिवारिक जीवन को लो कर देता है। हमें नशे को स्वीकार्यता नहीं देता है। नशा मुक्त रखकर अपनी क्षमताओं की रक्षा करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और नशे पर सख्ती से कार्रवाई हो रही है, पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं, हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई हैं। ये दिखाता है कि ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है।'

किन राज्यों में अटक सकती है ये योजना?

पुलिस और कानून-व्यवस्था भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची का विषय है। ड्रग तस्करी और नशीले पदार्थों पर जमीनी कार्रवाई, राज्य सरकारें ज्यादा मजबूती से कर सकती हैं। गिरफ्तारी, थाना-स्तर पर जांच और अभियोजन के आधार भी राज्य की पुलिस के पास हैं। 

केंद्र सरकार के पास नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) सिर्फ बड़े और अंतर्राज्य या अंतरराष्ट्रीय मामलों तक सीमित हैं।

केंद्रीय और राज्य के बीच टकराव की खबरें नई नहीं हैं। योजना स्तर पर भी एक जैसे फैसले नहीं हो पाते हैं। राज्य पुलिस बल पर केंद्र का सीधा प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। केंद्रीय एजेंसियां आरोप लगाती हैं कि उन्हें राज्यों की ओर से सहयोग नहीं मिलता। स्थानीय रेड की इजाजत, डेटा शेयरिंग और संयुक्त अभियानों में असहयोग के भी आरोप लगते रहे हैं। इन राज्यों में नए सिरे से ड्रग के खिलाफ अभियान चलाना, बीजेपी के लिए चुनौती है। 

यह भी पढ़ें: जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी ड्रग केस में कैसे फंस गए? पूरी कहानी समझिए



नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 तक, सबसे ज्यादा ड्रग के मामले केरल में हैं। कुल मामलों का लगभग 25 फीसदी केस सिर्फ केरल से है। यह राज्य, गैर बीजेपी शासित राज्यों में भी नंबर 1 पर है। गैर-बीजेपी शासित राज्यों केरल, तमिलनाडु, पंजाब में करीब 47,000 मामले सामने आए हैं। बीजेपी शासित राज्यों में महाराष्ट्र से 15,641 और उत्तर प्रदेश से 5,941 ड्रग केस सामने आए हैं। 

  •  केरल: 27,149 केस
  • तमिलनाडु: 11,037 केस
  • पंजाब: 8,973 केस
  • कर्नाटक: 4,165 केस
  • तेलंगाना: 2,183 केस
  • हिमाचल प्रदेश: 1,715 केस
  • जम्मू-कश्मीर: 1,550 केस
  • झारखंड: 806 केस

ड्रग से सबसे ज्यादा जूझ रहे राज्य कौन से हैं?

  • केरल: 27,149 केस
  • महाराष्ट्र: 15,641
  • तमिलनाडु: 11,037
  • पंजाब: 8,973
  • उत्तर प्रदेश: 5,941
  • राजस्थान: 5,246
  • मध्य प्रदेश: 4,460
  • कर्नाटक: 4,165
  • असम: 3,335
  • हरियाणा: 3,325

देश में लंबित मामलों का हाल क्या है?

देशभर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज (NDPS) एक्ट के तहत करीब 3.96 लाख मामले अदालतों में लंबित पड़े हैं। इस भारी बोझ को कम करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष NDPS अदालतें बनाने का निर्देश दिया है।

ड्रग कंट्रोल की अदालती चुनौतियां क्या हैं?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है पिछले 6 महीनों में गृह मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और गृह सचिवों के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों में पता चला कि 22 राज्य अभी तक विशेष NDPS अदालतें नहीं बना पाए हैं। गृह मंत्रालय ने इन राज्यों पर जोर दिया कि जल्दी से जल्दी अलग-अलग अदालतें बनाई जाएं ताकि नशीले पदार्थों से जुड़े केस तेजी से निपटाए जा सकें।

पंजाब में 60,000 NDPS मामले लंबित हैं, लेकिन वहां एक भी विशेष अदालत नहीं है। गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, तरन तारन और संगरूर में पांच विशेष अदालतें बनाई जाएं। केरल में 50,000 मामले लंबित हैं और सिर्फ दो विशेष अदालतें हैं। वहां नौ अदालतें बनाने का सुझाव दिया गया है।ओडिशा में 17,000 मामले लंबित हैं। 

राज्य सरकार ने कहा कि इस साल आठ और अगले साल सात विशेष अदालतें बनाई जाएंगी। तमिलनाडु में 15,000 मामले और सिर्फ पांच अदालतें हैं। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति खराब है। इन राज्यों को भी विशेष अदालतें बनाने के लिए कहा गया है।

यह भी पढ़ें: कौन हैं हरप्रीत तलवार जिसे मुंद्रा ड्रग केस में ED ने गिरफ्तार किया?

सिर्फ 65 अदालतें, कैसे समय पर आएगा फैसला?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अनुसार, पूरे देश में फिलहाल सिर्फ 65 विशेष NDPS अदालतें काम कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इन मामलों में देरी पर चिंता जता चुका है। ऐसे केसों में कई आरोपी, गवाह और वकील होते हैं, जिससे सुनवाई लंबी खिंच जाती है। इसलिए सामान्य अदालतों पर बोझ कम करने के लिए अलग अदालतों की जरूरत है।

देश में ड्रग मामलों का हाल क्या है?

साल 2004 से 2014 तक 1.73 लाख ड्रग केस दर्ज हुए थे। 2014 से 2026 तक यह संख्या बढ़कर 8.75 लाख हो गई है। गिरफ्तारियों की संख्या भी बहुत बढ़ी है। सरकार अब तीन साल के अंदर ड्रग तस्करी और नशे की समस्या से लड़ने के लिए विशेष अदालतों को मजबूत करना चाहती है।

 

Related Topic:#Narendra Modi

और पढ़ें