CJP के बुलावे पर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं पर दर्ज FIR ने नई बहस छेड़ दी है। प्रदर्शन के बाद कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है जिनका पहली बार पुलिस से सामना हुआ। हालांकि बाद में कई राज्यों ने छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने का फैसला भी किया। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या एक FIR किसी छात्र के करियर, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट या विदेश में पढ़ाई के सपने पर असर डाल सकती है?
FIR दर्ज होना और किसी अपराध में दोषी साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। FIR केवल किसी घटना की जांच शुरू करने का आधार होती है। जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराती तब तक उसे कानून की नजर में अपराधी नहीं माना जाता। ऐसे में केवल FIR के आधार पर यह मान लेना कि किसी छात्र का भविष्य खत्म हो गया है, सही नहीं होगा।
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FIR के बाद क्या होता है और कब पड़ता है असर?
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच शुरू करती है। जरूरत पड़ने पर आरोपियों से पूछताछ की जाती है। जांच पूरी होने पर यदि पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो पुलिस चार्जशीट दाखिल करती है, जबकि सबूत नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट पेश की जा सकती है। यदि अदालत चार्जशीट पर संज्ञान ले लेती है तो आरोपी को नियमित रूप से अदालत में पेश होना पड़ सकता है। वहीं, अगर आरोप बेबुनियाद हों, तो हाई कोर्ट में FIR रद्द कराने की भी कानूनी व्यवस्था है।
सिर्फ FIR दर्ज होने से पासपोर्ट रद्द नहीं होता और न ही नया पासपोर्ट मिलने पर अपने-आप रोक लगती है। हालांकि, यदि मामला अदालत तक पहुंच चुका हो और चार्जशीट पर संज्ञान लिया जा चुका हो, तो विदेश यात्रा के लिए अदालत की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान लंबित मामलों के कारण पासपोर्ट बनने में देरी भी हो सकती है।
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सरकारी नौकरी और विदेश में पढ़ाई पर क्या कहता है कानून?
सरकारी नौकरी में चरित्र और बैकग्राउंड की जांच के दौरान अगर आपके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित है, तो उसकी जानकारी सामने आ सकती है। लेकिन सिर्फ FIR दर्ज होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अवतार सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में साफ कहा है कि नियुक्ति करने वाली संस्था को आरोपों की गंभीरता, मामले की परिस्थितियां और उसका अंतिम नतीजा देखकर फैसला लेना चाहिए।
हालांकि, अगर भर्ती फॉर्म में लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी मांगी गई है तो उसे छिपाना भारी पड़ सकता है। ऐसी जानकारी छिपाने पर नौकरी मिलने के बाद भी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। विदेश में पढ़ाई या नौकरी के मामले में भी अलग-अलग देशों के नियम अलग हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के वीजा आवेदन में आपराधिक मामलों की जानकारी देनी पड़ती है। यदि मामला लंबित हो तो अतिरिक्त जांच या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
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FIR दर्ज होने पर पुलिस वेरिफिकेशन कैसे कराएं
अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज है तो पासपोर्ट बनवाते समय पुलिस वेरिफिकेशन में इसकी जानकारी सामने आ सकती है। बता दें कि सिर्फ FIR दर्ज होना पासपोर्ट रोकने की वजह नहीं बनता। असली बात यह होती है कि क्या कोर्ट ने उस मामले का संज्ञान लिया है या नहीं।
कई हाई कोर्ट भी साफ कह चुके हैं कि सिर्फ लंबित FIR के आधार पर पासपोर्ट का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता। अगर पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान कोई दिक्कत आती है तो आवेदक संबंधित अदालत से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेकर पासपोर्ट ऑफिस में जमा कर सकता है। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है। कुछ मामलों में पासपोर्ट ऑफिस कम अवधि (शॉर्ट वैलिडिटी) वाला पासपोर्ट भी जारी कर सकता है।