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UP: मुरादाबाद मंडल की 7 सीटों पर 3 दशक से नहीं मिली जीत, कैसे परचम लहराएगी BJP?

UP के मुरादाबाद मंडल की सात सीटों पर तीन दशक से बीजेपी जीत नहीं हासिल कर सकी है। उपचुनाव में रामपुर और कुंदरकी में जीत मिलने से बीजेपी में उत्साह बढ़ा है लेकिन सपा के गढ़ में सेंधमारी उसके लिए चुनौती बनी हुई है।

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योगी आदित्यनाथ और नितिन नवीन, Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुरादाबाद मंडल की उन सात सीटों पर खास फोकस बढ़ा दिया है, जहां पार्टी लंबे समय से जीत के लिए संघर्ष कर रही है। मुरादाबाद देहात, अमरोहा, संभल, नगीना, नजीबाबाद, रामपुर और कुंदरकी में समाजवादी पार्टी (सपा) और विपक्षी दलों का प्रभाव बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती रहा है। तीन दशक से इन सीटों पर जीत का खाता नहीं खुलने के बीच पार्टी अब नए सियासी समीकरण, मजबूत संगठन और जिताऊ चेहरों के सहारे यहां परचम लहराने की तैयारी में है।

 

बीजेपी के लिए रामपुर और कुंदरकी के उपचुनाव अहम रहे। रामपुर में आजम खां की विधानसभा सदस्यता जाने के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की। इसके बाद कुंदरकी में भी उपचुनाव के दौरान पार्टी ने लंबे समय से चले आ रहे समीकरण को पलटते हुए जीत हासिल की। इन दोनों परिणामों ने बीजेपी को यह भरोसा दिया कि मुरादाबाद मंडल में विपक्ष के मजबूत माने जाने वाले इलाकों में भी चुनावी समीकरण बदले जा सकते हैं। अब पार्टी की नजर बाकी सीटों पर भी इसी रणनीति को आगे बढ़ाने पर है।

सात सीटें हैं सपा का गढ़

मुरादाबाद देहात, अमरोहा, संभल, नगीना और नजीबाबाद जैसी सीटों पर सपा और उसके सामाजिक समीकरण मजबूत रहे हैं। मुस्लिम मतदाताओं के साथ पिछड़े और अन्य वर्गों के समर्थन ने कई चुनावों में विपक्ष को बढ़त दिलाई है।बीजेपी के सामने चुनौती सिर्फ अपने परंपरागत मतदाताओं को एकजुट रखने की नहीं है। पार्टी को इन सीटों पर विपक्ष के सामाजिक आधार में सेंध लगाने के साथ ऐसे उम्मीदवार उतारने होंगे, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ हो।

 

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जिताऊ चेहरे की तलाश

2027 को लेकर बीजेपी संगठन इन सीटों पर जिताऊ चेहरों की तलाश में जुटा है। पार्टी ऐसे उम्मीदवारों पर दांव लगाने की तैयारी में है, जो जातीय समीकरण के साथ स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव को भी साध सकें।संगठन की कोशिश बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने की है, जहां पिछले चुनावों में बीजेपी को कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था।

 

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में बदले राजनीतिक समीकरण ने बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी की है। सपा ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की है। मुरादाबाद मंडल में भी इसका असर दिखाई दिया।ऐसे में बीजेपी के लिए 2027 में इन सात सीटों पर मुकाबला सिर्फ सपा से नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों से भी होगा। पार्टी को गैर-यादव पिछड़े वर्ग, दलित और अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बनानी होगी।

 

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तीन दशक का सूखा कैसे खत्म होगा?

रामपुर और कुंदरकी में उपचुनाव की जीत ने बीजेपी को रास्ता जरूर दिखाया है लेकिन विधानसभा चुनाव में सातों सीटों पर एक साथ सफलता हासिल करना आसान नहीं होगा। स्थानीय उम्मीदवार, बूथ प्रबंधन, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे चुनाव का रुख तय करेंगे।बीजेपी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन दशक से जिस सियासी जमीन पर कमल नहीं खिल सका, वहां 2027 में पार्टी ऐसा कौन सा नया समीकरण तैयार करेगी, जिससे सपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगाकर जीत का परचम लहराया जा सके।

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