कॉकरोच जनता पार्टी
(CJP) के फाउंडर
अभिजीत दीपके
को एक तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से जुड़ने का न्योता मिला है। NDA गठबंधन के मंत्री रामदास अठावले ने यह न्योता दिया है। इसको लेकर अभी तक अभिजीत ने कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले अभिजीत दीपके ने बताया था कि वह न कभी राजनीतिक दल से जुड़ना चाहते हैं और न ही कभी राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते हैं। अभिजीत ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि लोगों का राजनीति पर भरोसा नहीं है, इस वजह से वह राजनीति से जुड़ना नहीं चाहते हैं।
NDA के रामदास अठावले ने सोमवार यानी 17 अगस्त को अभिजीत दीपके को पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था। जानकारी के लिए बता दैं, रामदास रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सदस्य है इसी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया। इस न्योते के बारे में अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों ने भी कोई जवाब नहीं दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि अभिजीत दीपके पहले सोशल मीडिया के जरिए देश की समस्याओं पर सवाल उठाते थे। उसके बाद जून-जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया था।
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रामदास आठवले ने दिया न्योता
17 अगस्त को रामदास अठावले ने कुछ पत्रकारों से बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह अभिजीत बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को मानते हैं, तो उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होना चाहिए। इसी सिलसिले में रामदास अठावले ने कहा, 'मुझे लगता है कि अभिजीत दीपके आंबेडकरवादी हैं। वह एक जागरूक युवा हैं तो उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने के बारे में विचार करना चाहिए।'
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क्या हैं अभिजीत दीपके के विचार?
अभिजीत दीपके ने कहा, 'अभी हमारा राजनीति में शामिल होने का कोई इंटेंशन नहीं है क्योंकि इस देश में पॉलिटिक्स का जो हाल हो गया है, वह आप देख ही रहे हैं। पार्टियां तोड़ी जा रही हैं, ED और
CBI
भेजकर, इलेक्शन हो रहे हैं तो इलेक्शन में वोट डिलीट किए जा रहे हैं। एक तरीके से लोगों का पॉलिटिक्स से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है, लोग कहते हैं कि हम सुबह किसी और को वोट देते हैं, शाम को सरकार किसी और की बन जाती है।'
इसके बाद अभिजीत ने कहा, 'हम MP और MLA किसी और पार्टी का चुनते हैं, शाम को वह MP किसी और पार्टी में चला जाता है तो जब पूरे देश में यह माहौल है, जहां पर लोगों का पॉलिटिक्स से भरोसा उठ चुका है, वहां हम पॉलिटिकल पार्टी बनाकर क्या करेंगे। मुझे लगता है कि सारी संस्थाओं से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है, चाहे वह न्याय व्यवस्था हो, चाहे वह चुनाव आयोग हो और चाहे वह मीडिया क्यों न हो। अब इस देश को जन आंदोलन की जरूरत है।'