दिल्ली की सत्ता से बाहर हो चुकी आम आदमी पार्टी (AAP) के पास अभी दिल्ली में अगला चुनाव लड़ने में 4 साल का समय है। ऐसे में फिलहाल उसका सबसे ज्यादा ध्यान पंजाब पर है, जहां उसे अपनी सरकार बचानी है। दिल्ली और पंजाब के अलावा AAP गुजरात में भी जमकर पसीना बहा रही है। 2022 के चुनाव में सबको चौंकाते हुए 5 विधानसभा सीटें जीतने वाली AAP को गुजरात के पंचायत चुनाव में भी कामयाबी मिली है। यह कामयाबी इतनी बड़ी है कि एक जिले में AAP ने जिला पंचायत अध्यक्ष का भी चुनाव जीत लिया है जबकि पूरे राज्य में कांग्रेस भी एक भी जिले में अपना अध्यक्ष नहीं बना पाई।
आदिवासी बहुल जिले नर्मदा में AAP की जीत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह वही जिला है जहां AAP ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को टेंशन में डाल दिया है। AAP के नेता चैतर वसावा इसी जिले से आते हैं। वह लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके है और बीजेपी के सामने कांग्रेस के समर्थन से उन्हें अच्छे वोट भी मिले थे। अब AAP की पूरी कोशिश है कि वह नर्मदा समेत उन जिलों में खुद को मजबूत कर सके जहां आदिवासियों का प्रभाव है या वे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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इस बार गुजरात के 34 में से 33 जिलों में BJP ने जीत हासिल की है लेकिन एक जिले यानी नर्मदा में AAP को जीत मिली है। 2021 में इस जिले की 22 में से 19 पर बीजेपी तो 2 पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इस बार AAP ने 15 सीटें जीतकर बाजी पलट दी और अध्यक्ष पद पर भी कब्जा जमा लिया। अब AAP ने अंजना वसावा को जिला पंचायत अध्यक्ष और संगीता तलवी को उपाध्यक्ष बनाकर महिलाओं को भी साधने की कोशिश की है।
क्या बोले केजरीवाल?
इस मौके पर AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'बीजेपी और कांग्रेस मिलकर गुजरात को लूट रहे हैं। केवल आम आदमी पार्टी आपके लिए लड़ रही है। बीजेपी सरकार कांग्रेस के नेताओं को जेल में नहीं डालती, चैतर वसावा को जनता की आवाज़ उठाने के लिए जेल में डालती है। नर्मदा ज़िले में AAP की सरकार बनाकर आदिवासी समाज ने बीजेपी के मुंह पर करारा तमाचा मारा है।' उन्होंने आरोप लगाए कि पंचायत चुनाव में जहां कांग्रेस के पास उम्मीदवार नहीं थे, वहां बीजेपी ने उनको उम्मीदवार दे दिए।
क्या है जोश की वजह?
अगर 2021 से 2026 के पंचायत चुनावों की तुलना करें तो AAP के समर्थक उम्मीदवारों की संख्या में लगभग 10 गुना का इजाफा हुआ है। एक जिला पंचायत और 12 तालुका पंचायतों में भी AAP को जीत मिली है। सूरत में उसे निराशा मिला है क्योंकि पिछली बार सूरत नगर निगम में उसके ज्यादातर उम्मीदवार हार गए। इसके बावजूद वह उत्साहित है क्योंकि कई ऐसे इलाकों में उसकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है जहां विधानसभा चुनाव में अभी तक वह जीत नहीं पाई है।
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AAP ने जिन 12 तालुका में जीत हासिल की है उसमें से नर्मदा के 3, छोटा उदयपुर के 2, जूनागढ़ के 2 और आनंद, भरूच, देवभूमि द्वारका, अमरेली और अरावली जिलों की एक-एक सीटें शामिल हैं। नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा सीट से चैतर वसावा विधायक हैं और दूसरी विधानसभा सीट नांदोड़ में भी 2022 में उसे अच्छे वोट मिली थे।
इसी तरह छोटा उदयपुर जिले की छोटा उदयपुर सीट पर साल 2021 में AAP के उम्मीदवार को 43 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और वह दूसरे नंबर पर थे। जेतपुर सीट पर AAP दूसरे नंबर पर थी और सनखेड़ा में वह 18 हजार से ज्यादा वोटर पाकर तीसरे नंबर पर थी।
अमरेली से भी आई गुड न्यूज
AAP ने नर्मदा जिले के अलावा अमरेली जिले में भी अच्छी जीत हासिल की है। यहां की बगसाड़ा तालुका में AAP ने 16 में से 10 सीटें जीती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में अमरेली जिले की पांच में से एक सीट सीट पर AAP दूसरे नंबर पर थी और दो सीटों पर उसे अच्छे वोट मिले थे। ऐसे में इस बार की जीत दिखा रही है कि कुछ इलाकों में अभी भी उसकी पकड़ बनी हुई है।
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यही आंकड़े बता रहे हैं कि सूरत को छोड़कर AAP ने 2021 में जीती हुई जगहों पर खुद को मजबूत ही किया है। 2021 में कई सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही थी और उन सीटों के लिए AAP जमकर पसीना बहा रही है। खुद अरविंद केजरीवाल लगातार गुजरात के दौरे पर जा रहे हैं और अलग-अलग वर्गों के नेताओं से मिलकर उन्हें अपने साथ जोड़ने में लगे हुए हैं। अगर वह अपने इस अभियान में थोड़े और सफल होते हैं और पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो विपक्षी कांग्रेस के साथ-साथ सत्ताधारी बीजेपी के लिए भी AAP बड़ी चुनौती बन सकती है।