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'पुलिस अपराधी बने, वही कलियुग,' अखिलेश यादव के इस बयान का मतलब क्या?

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करके योगी सरकार को घेरा है। क्या है विवाद, आइए जानते हैं।

Akhilesh Yadav Samajwadi Party Facebook

अखिलेश यादव, राष्ट्रीयअध्यक्ष, समाजवादी पार्टी। P

उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस के रवैये पर अधिकारियों को जमकर फटकारा है।  हाई कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस सरकारों के प्रति ज्यादा वफादार है, न कि संविधान के प्रति। अखिलेश यादव ने हाई कोर्ट की इस मौखिक टिप्पणी को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला है। अखिलेश यादव ने कहा है कि जिस युग में, पुलिस अपराधी हो जाए, वही कलियुग होता है। 

हाई कोर्ट ने एक फैसले पर कुछ मौखिक टिप्प्णी की, जिसके बाद से ही यूपी पुलिस, विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आ गई है। कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। हाई कोर्ट का कहना है कि यूपी पुलिस के अधिकारी, सरकार को खुश करना चाहते हैं, ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए वे सरकार की खुशामद करते हैं। अखिलेश यादव ने इसे लेकर सरकार को घेरा है।

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क्या कह रहे हैं अखिलेश यादव?

अखिलेश यादव ने लिखा, 'जिस युग में पुलिस ही अपराधी बन जाए वही कलियुग है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीजेपी सरकार के समय में हो रही पुलिसिया ज्यादतियों को देखकर, बीजेपी की पुलिस व्यवस्था पर जो सख्त टिप्पणी की है उसे सुनकर तो नैतिक रूप से बीजेपी सरकार को शासन करने का कोई अधिकार नहीं बचता है परंतु नैतिकता, निष्पक्षता, सत्यनिष्ठता, ईमानदारी व इंसाफ जैसे शब्द बीजेपी के शब्दकोश में हैं ही नहीं।'

अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
'बीजेपी राज में पुलिस बीजेपी के भ्रष्टाचार की 'भ्रष्टपुतली' बनकर, संविधान के स्थान पर अवैधानिक-आपराधिक तरीके अपनाकर सत्ता के सियासी फायदे के लिए कानून अपने हाथ में ले रही है।'

अखिलेश यादव ने कहा,  'भ्रष्ट पुलिसवाले दो बातें याद रखें, बीजेपी किसी की सगी नहीं है। ⁠संविधान सदैव रहेगा, ये भाजपाई तो अंतिम दौर में हैं। भाजपाई निश्चित रूप से जा रहे हैं और फिर कभी लौटकर आएंगे भी नहीं। न्याय कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।'

Akhilesh Yadav Statement on UP Police

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हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस पर कहा क्या है? 

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस सरकारों के प्रति ज्यादा वफादार है, न कि संविधान के प्रति। जस्टिस विनोद दिवाकर ने राज्य में राजनेताओं और नौकरशाहों की जमींदारी सोच पर भी तीखा हमला बोला। कोर्ट ने कहा कि यूपी में पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक मशीनरी में गहरी राजनीतिक घुसपैठ हो गई है। ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन अब मेरिट पर नहीं, बल्कि राजनीतिक वफादारी पर निर्भर करते हैं। 


'अधिकारियों के प्रति वफादार' 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, 'जो अधिकारी सत्ताधारियों के प्रति वफादार होते हैं, उन्हें अच्छी पोस्टिंग जैसे शहरों के कमिश्नरेट या मुनाफे वाले जिले मिल जाते हैं। जबकि जो स्वतंत्र तरीके से काम करते हैं, उन्हें सजा के तौर पर खराब जगहों पर भेज दिया जाता है।'

'संविधान नहीं, सत्ताधारी सरकार को खुश करती है पुलिस'

जस्टिस दिवाकर ने कहा, 'पुलिस अधिकारी संविधान की जगह सत्ताधारी सरकार को खुश करने में ज्यादा लगे रहते हैं। फील्ड अधिकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग के डर से अपने आचरण को राजनीतिक मालिकों के हिसाब से ढाल लेते हैं।'

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एनकाउंटर पर भी पड़ी फटकार 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एनकाउंटर किलिंग, चुनिंदा कार्रवाई और गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग की ओर भी इशारा किया। कोर्ट ने आगे कहा कि कई अधिकारी कानून का राज को संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि काम में बाधा मानते हैं। बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तारियां की जाती हैं, FIR मनमाने ढंग से दर्ज या दबाई जाती हैं और प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल अपनी मर्जी से किया जाता है।

जस्टिस दिवाकर ने ऐसा क्यों कहा है?

जस्टिस दिवाकर गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने गृह सचिव की भूमिका की भी आलोचना की और कहा कि कुछ गृह सचिव व्यक्तिगत और बाहरी हितों के लिए काम करते रहे हैं। कोर्ट ने विकास दुबे एनकाउंटर से जुड़े बिकरू गांव के मामले का भी जिक्र किया। उस ऑपरेशन में 8 पुलिसकर्मी मारे गए थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी को सिर्फ औपचारिक चेतावनी दी गई।

 

कोर्ट ने इसे बिना सजा की संस्कृति का उदाहरण बताया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक शासन किसी व्यक्ति या सत्ता के निजी फायदे का गुलाम नहीं हो सकता। राज्य की व्यवस्था को कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, किसी सत्ताधारी दल के प्रति नहीं।

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