आगमी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी करो या मरो की स्थित में काम करने से पीछे नहीं हट रही है। पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव दावा कर रहे है कि प्रदेश की सभी सीटों पर संगठन में बूथ से लेकर सेक्टर तक पदाधिकारी तैनात हैं। पिछला विधानसभा चुनाव सपा ने राष्टीय लोकदल (RLD) के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन कुछ समय बाद भी RLD प्रमुख जयंत चैधरी ने अखिलेश से दोस्ती तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से दोस्ती कर ली थी।
ऐसे में पश्चिम उत्तर प्रदेश में RLD के जाट वोटरों का किला कैसे भेदा जाए, इसकी तैयारी में सपा काफी समय से लगी हुई है। अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दो दिन पहले जाट वोटरों को साधने के लिए बागपत और शामली जिलों में जाट बिरादरी के दो बड़े नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाकर RLD को चुनौती दी है।
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मनोज और सुरेंद्र सिंह को बनाया जिलाध्यक्ष
अखिलेश यादव ने बागपत जिले में पार्टी का जिलाध्यक्ष मनोज चैधरी को बनाया है। मनोज की जाट बेल्ट में अच्छी पकड़ है और वह जमीनी नेता होने के साथ संगठन में सक्रिय रह चुके हैं। जिला शामिली में अखिलेश ने चौधरी सुरेंद्र सिंह ताना को जिलाध्यक्ष बनाया है। सुरेंद्र सिंह ताना पार्टी में संगठन के पदों पर काबिज रह चुके है। उनकी भी क्षेत्र के वोटरों में पकड़ है। सपा जाट वोटरों को संदेश देने का प्रयास कर रही है कि RLD ही नहीं सपा भी जाटों की हितैषी है।
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव का मानना है कि पश्चिम यूपी में जाट, मुस्लिम और गुर्जर समीकरण से पार्टी की स्थित मजबुत हो जाएगी। मुस्लिमों का झुकाव पहले से ही सपा की ओर है। ऐसे में जयंत को पटकनी देने के लिए उनके सजातीय लोगों को संगठन में पद देकर वोटरों को अपने पाले में करने का प्रयास किया जा रहा है।
सपा के गठबंधन से RLD ने जीती थीं 8 सीटें
वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ RLD प्रमुख ने गठबंघन में 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी ने पश्चिम यूपी में बुढ़ाना, पुकराजी, मीरापुर, थाना भवन, शामिली, सिवाल खास, छपरौली, सादाबाद विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। लोक सभा 2024 के चुनाव से पहले RLD ने भाजपा का दामन थाम लिया है। RLD 2027 में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी में है। सपा, बीजेपी और RLD के गठबंधन को भेदकर सीटें जीतने की फिराक में जातीय समीकरण की गोटी फिट करने में लगी है।