उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्व मंत्री और बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों ने पूर्वांचल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। गोरखपुर एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं के स्वागत से लेकर महराजगंज में कांग्रेस की बैठक में उनकी मौजूदगी के बाद अमरमणि त्रिपाठी के करीब 30 साल बाद अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी कांग्रेस में उनकी औपचारिक ज्वाइनिंग की घोषणा नहीं हुई है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्वांचल प्रभारी अभिषेक दत्त और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत 9 सितंबर को पूर्वांचल के संगठनात्मक दौरे पर पहुंचे थे। गोरखपुर एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं के स्वागत के लिए अमरमणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे। इसके बाद वह महराजगंज में आयोजित कांग्रेस की बैठक में भी शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात और पार्टी की बैठक में उनकी मौजूदगी को उनकी कांग्रेस में संभावित वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमरमणि के बेटे और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी पहले ही मार्च 2024 में कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में पिता की कांग्रेस में वापसी की चर्चा ने पूर्वांचल के सियासी समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज कर दी हैं।
अमरमणि का राजनीतिक सफर
अमरमणि त्रिपाठी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी। 1989 में वह कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे। हालांकि 1991 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अलग-अलग दलों से चुनावी मैदान में उतरना जारी रखा। 1996 में बहुजन समाज पार्टी, 2002 और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की। बाद में उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखा। महराजगंज का नौतनवा और आसपास का इलाका लंबे समय तक त्रिपाठी परिवार का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है।
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फरेंदा से खुद, नौतनवा से बेटे को उतारने का ऐलान
अमरमणि त्रिपाठी ने हाल ही में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने महराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने और नौतनवा सीट से अपने बेटे अमनमणि त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारने की बात कही थी। जनसंवाद कार्यक्रम में अमरमणि ने अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने की बात कही थी। उनके बेटे अमनमणि भी पिता के समर्थन में मैदान में उतरने की अपील कर चुके हैं। हालांकि उस समय दोनों ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
फरेंदा सीट पर कांग्रेस के सामने भी बड़ी चुनौती
अमरमणि की कांग्रेस में वापसी होती है तो पार्टी के सामने टिकट को लेकर बड़ा सियासी सवाल खड़ा हो सकता है। फरेंदा विधानसभा सीट पर फिलहाल कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी विधायक हैं। गोरखपुर-बस्ती मंडल में कांग्रेस के मौजूदा विधायकों में वीरेंद्र चौधरी प्रमुख चेहरा हैं। ऐसे में मौजूदा विधायक की जगह अमरमणि त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारना कांग्रेस के लिए आसान फैसला नहीं होगा। दूसरी ओर नौतनवा सीट पर भी समाजवादी पार्टी का मजबूत जनाधार माना जाता है। अगर 2027 में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस का गठबंधन कायम रहता है तो अमनमणि को नौतनवा से कांग्रेस के टिकट के लिए गठबंधन के सीट बंटवारे का इंतजार करना पड़ सकता है।
अमरमणि के चुनाव लड़ने पर कानूनी पेंच
अमरमणि त्रिपाठी के खुद चुनाव लड़ने को लेकर कानूनी सवाल भी अहम है। वह कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराए जा चुके हैं और उम्रकैद की सजा काट चुके हैं। उन्हें 2023 में अच्छे आचरण के आधार पर समय से पहले जेल से रिहाई मिली थी, लेकिन उनकी सजा माफ नहीं हुई है। इसी वजह से कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक उनके चुनाव लड़ने की पात्रता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि फरेंदा से उनकी चुनावी दावेदारी के साथ-साथ यह भी चर्चा है कि अंतिम रूप से कांग्रेस किस चेहरे को मैदान में उतारती है।
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कांग्रेस में वापसी हुई तो बदलेंगे पूर्वांचल के समीकरण?
अब करीब तीन दशक बाद अमरमणि का नाम कांग्रेस से फिर जुड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी मौजूदगी, महराजगंज की बैठक में शामिल होना और 2027 में फरेंदा से चुनाव लड़ने की घोषणाइन तीनों घटनाओं ने उनकी संभावित राजनीतिक वापसी की चर्चाओं को हवा दे दी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस वास्तव में अमरमणि त्रिपाठी को अपने पाले में शामिल करेगी और यदि ऐसा होता है तो फरेंदा से टिकट का फैसला कैसे होगा। वहीं अमनमणि पहले से कांग्रेस में हैं। ऐसे में यदि पिता-पुत्र दोनों कांग्रेस के साथ चुनावी मैदान में उतरते हैं तो महराजगंज, नौतनवा और आसपास की सीटों पर 2027 का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।