मान-मनौव्वल के बावजूद कांग्रेस छोड़ चुके भूपेन कुमार बोरा का अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाना तय है। सोमवार और मंगलवार तक किसी नेता का नाम लेकर आरोप लगाने से बच रहे भूपेन कुमार बोरा अब खुलकर आरोप लगा रहे हैं। पूर्व में असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे भूपेन कुमार बोरा ने कहा है कि गठबंधन की बातचीत को लेकर गौरव गोगोई ने उन्हें जलील किया था। भूपेन का कहना है कि इसको लेकर उन्हो गौरव गोगोई से सवाल भी किए थे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया है कि यह बात राहुल गांधी के सामने भी रखी लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। उनके आरोपों पर गौरव गोगोई का कहना है कि जो बीजेपी ज्वाइन करता है, उसे एक स्क्रिप्ट दी जाती है और वह उसे पढ़नी होती है।
सोमवार को अचानक कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले भूपेन कुमार बोरा दो बार के विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं। उन्हीं को हटाकर गौरव गोगोई को असम की कमान दी गई थी। सोमवार को अपने इस्तीफे में भूपेन कुमार बोरा ने किसी का नाम नहीं लिया था। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर राज्य नेतृत्व तक ने भूपेन के घर जाकर उन्हें मनाने की कोशिश की थी। मंगलवार को भूपेन बोरा ने कहा था कि उनके कुछ सवाल हैं, अगर उनके जवाब दिए जाएंगे और वह संतुष्ट हो जाएंगे तभी अपना इस्तीफा वापस लेंगे।
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हालांकि, रात में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा उनसे मिलने पहुंचे और एलान कर दिया कि भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। अब भूपेन बोरा ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि अभी वह हिमंत के घर जाएंगे और इसके बारे में और बातचीत भी करेंगे। इसी दौरान उन्होंने गौरव गोगोई खो जमकर घेरा और कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।
क्या-क्या बोले भूपेन कुमार बोरा?
अब भूपेन बोरा ने साल 2021 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा है, 'मैंने कांग्रेस को 32 साल दिए। कांग्रेस ने मुझे विधायक से लेकर AICC सेक्रेटरी और APCC अध्यक्ष तक बनाया। मैंने कांग्रेस इसलिए ज्वाइन की थी क्योंकि 1926 के AICC सेशन में मेरे ग्रांड फादर ने पंडाल का सामियाना बनाने के लिए हजारों गमछे दिए थे। पार्टी के साथ हमारा वह रिश्ता है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'जब साल 2021 में मैं APCC का अध्यक्ष बना तो कांग्रेस का गठबंधन AIUDF से था। वह गठबंधन मैंने तोड़ा और असम में 16 पार्टियों को एकजुट करके गठबंधन बनाया। जब 5 विधानसभा सीट के उपचुनाव आए तो एक सीट सीपीआई (ML) को देने का फैसला हुआ। मैं भी इस पर राजी हुआ। मैंने सबकी राय से यह फैसला लिया लेकिन रात को अचानक एलान हो गया और एक ऐसे आदमी को कांग्रेस का टिकट दे दिया गया जो कभी कांग्रेस का सदस्य ही नहीं था। गठबंधन सहयोगियों ने सवाल उठाए कि आप 5 में से एक सीट हमें नहीं दे सकते? इस पर मैं फेल हुआ और मैंने इस्तीफा दे दिया लेकिन क्या गौरव गोगोई वह सीट जिता पाए?'
गौरव गोगोई vs भूपेन कुमार बोरा
गौरव गोगोई को आड़े हाथ लेते हुए भूपेन बोरा कहते हैं, 'फिर भी मैं चुप रहा क्योंकि पार्टी को नुकसान हो सकता था। इस महीने की 9 फरवरी को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई कि एक बार फिर से गठबंधन बनाना है। उसमें जितेंद्र सिंह समेत तमाम नेता थे। यह तय हुआ कि यह काम भूपेन बोरा ही गठबंधन बनाएंगे। मैंने मना किया लेकिन मुझे जबरदस्ती कहा गया कि आपको यह करना ही है। मैंने 10 फरवरी को बातचीत शुरू की और 11 फरवरी को रात को गौरव गोगोई का फोन मुझे आया। उन्होंने मुझे कहा कि दादा आप अकेले नहीं, रकीबुल हसन को भी साथ ले लीजिए। मैंने कहा कि यह तो मीटिंग का फैसला नहीं है। 2 मिनट के बाद प्रद्युत बोरदोलोई का फोन आया कि अगर आप ऐसा करेंगे तो मैं इसकी अनुमति नहीं दूंगा। देबब्रत साइकिया ने कहा कि आपको मीटिंग में तय हुई चीजों के हिसाब से काम करना चाहिए। तो मैं क्या करूं? कहां जाऊं?'
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उन्होंने आगे कहा, 'फिर भी मैं काम करता रहा। बातचीत करता रहा। टाइम फिक्स किया। मीटिंग की जगह फिक्स की। अखिल गोगोई और लुरिन गोगोई को एक जगह पर बुलाया लेकिन गौरव गोगोई ने अनाउंस कर दिया कि भूपेन बोरा ने गलतफहमी पैदा की है और वह अकेले नहीं हैं, रकीबुल हसन भी साथ हैं। मैंने पूछा कि आपने पब्लिक में ऐसा क्यों बोला? मुझे पब्लिकली जलील क्यों किया? पहले भी मैंने गौरव गोगोई को एक चिट्ठी लिखी थी कि आप मुझे मजबूर मत करिए कि मैं आपके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करिए। मैंने हाई कमान को भी ये बातें बताईं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।'
BJP ज्वाइन करने के बारे में उनका कहना है कि उनकी सीएम हिमंत से बात हुई कि वह ऐसे ही बीजेपी में रह सकते हैं कि नहीं। भूपेन बोरा ने कहा है कि हिमंत ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह ऐसे ही रह सकते हैं लेकिन उन्हें कुछ बात ड्राइंग रूम में करनी होगी, कुछ बरामदे में और कुछ बातें बालकनी में करनी होगी।