संजय सिंह, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव को अभी कुछ ही समय हुआ है लेकिन कांग्रेस विधायकों के बीच उथल पुथल जारी है। विधायकों के नाराजगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे पार्टी के अध्यक्ष और बिहार प्रभारी की ओर से बुलाई गई बैठक में भी भाग लेना मुनासिब नहीं समझते हैं। बिहार में कांग्रेस की करारी हार के बाद से विपक्षी खेमे में उथल-पुथल मची हुई है। कांग्रेस पार्टी के विधायकों का मीटिंग में ना आना अब सुर्खियों में बना हुआ है।
बिहार में विरोधी लगातार दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस के कुछ विधायक सत्ता पक्ष में आने को आतुर हैं। कांग्रेस पार्टी भी अब अपने विधायकों को बचाने में जुट गई है। अब ऐसे विधायकों को पार्टी में रखने और उनकी नारजगी को दूर करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात करवाई जाएगी। पार्टी की कोशिश है कि किसी तरह डैमेज कंट्रोल किया जाय और बिहार में कांग्रेस को शून्य होने से बचाया जाए।
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23 को दिल्ली में मीटिंग
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 19 विधायक चुने गए थे। इस बार के चुनाव में मात्र 6 विधायक ही चुनकर आए। विधायकों की संख्या ऐसे ही बहुत कम हो गई। उस पर भी जो विधायक चुने गए हैं, वे दूसरे दलों की ओर ताक-झांक कर रहे हैं। सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री लगातार दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस विधायक पाला बदलने को तैयार हैं।
सत्ता पक्ष के इस दावे के बाद कांग्रेस के भीतर घबराहट बढ़ गई है। चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने नाराज विधायकों को मनाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन नाराज विधायकों ने दोनो की बातों को अनसुना कर दिया। अब अंतिम प्रयास दिल्ली दरबार में होगा। इस संबंध में 23 तारीख को दिल्ली में मीटिंग होगी और मीटिंग में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे नाराज विधायकों से बातचीत करेंगे।
राहुल और खड़गे के सामने होगी पेशी
बिहार के नाराज सांसदों और विधायकों को 23 जनवरी को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने पेश होना है। चुनाव के दो महीने बीतने के वावजूद पार्टी के भीतर आपसी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ लोग पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को पसंद नही करते हैं। दोनों पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इनके रहते पार्टी और संगठन मजबूत नहीं हो सकता है।
विधानसभा का पहला सत्र बीत गया लेकिन कांग्रेस अबतक विधायक दल के नेता का चयन नहीं कर पाई। फरवरी में विधानसभा का बजट सत्र शुरू होना है। इसके वावजूद पार्टी के नेता हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं। यही कारण है कि पार्टी के कुछ विधायकों ने प्रदेश नेतृत्व से दूरी बना रखी है।
मीटिंग में नहीं पहुंचे विधायक
प्रदेश अध्यक्ष ने मनरेगा आंदोलन को लेकर बैठक बुलाई थी। बैठक में चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन और वाल्मिकीनगर के विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा मौजूद नहीं रहे। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की बैठक में तो अभिषेक रंजन और मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह भी अलग रहे। हालांकि, पार्टी के लोगों का कहना है कि इन दोनो विधायकों ने बैठक में नही आने की सूचना पहले ही दे दी थी।
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दिल्ली में हो सकती है विधायक दल के नेता की घोषणा
प्रदेश नेतृत्व की कोशिश है कि नाराज विधायकों की वन टू वन बातचीत राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से करवाई जाय। इस विधायकों को यह भी समझाने का प्रयास किया जाएगा कि दूसरे दल में जाने से उन्हें क्या नुकसान हो सकता है। कांग्रेस के साथ रहने में क्या फायदा है।
विधायकों की आपसी सहमति के आधार पर वहां विधायक दल के नेता की भी घोषणा हो सकती है। कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि उनके दल का कोई भी विधायक बहकावे में आकर दूसरे दल में ना जाए। कांग्रेस की स्थिति बिहार में पहले से ही कमजोर है। यदि विधायक पाला बदलकर दूसरे दल में जाएंगे तो पार्टी की स्थिति और कमजोर होगी। अब कांग्रेस बिहार में किस दिशा में जाएगी इसका फैसला 23 जनवरी को दिल्ली में होगा।