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'42 सीट पर पहुंचाया', JDU में आरसीपी सिंह की वापसी पर ललन सिंह की दो टूक

बिहार की राजनीति में इन दिनों आरसीपी सिंह चर्चा में बने हुए हैं। उनकी JDU में वापसी की कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने उनकी वापसी पर एतराज जताया है।

RCP  Singh

आरसीपी सिंह, Photo Credit: RCP Singh

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संजय सिंह, पटना। एक जमाने में नीतीश कुमार के सबसे विश्वास पात्र रहे आरसीपी सिंह को फिर से जनता दल यूनाइटेड (JDU) में वापसी की अटकलें लग रही हैं। JDU में उनकी वापस को लेकर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विरोध को लेकर फिलहाल उनकी वापसी की समय सीमा बढ़ सकती है। इस राजनीतिक घटना क्रम को लेकर पार्टी के भीतर खेमेबाजी बढ़ गई है। पार्टी के कई नेता उनके समर्थन में तो कई विरोध में है। पार्टी के सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री ने उनकी वापसी को मुश्किल कर दिया है। 

 

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने आरसीपी सिंह की वापसी पर कड़ा एतराज जताया है। वहीं, आरसीपी के समर्थकों का कहना है कि पावर वायलेंस के लिए आरसीपी की वापसी जरुरी है। कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थ के चलते मुख्यमंत्री को घेरकर रखा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विरोध या समर्थन से कोई भी बात बनने और बिगड़ने वाली नही है। इसपर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री ही लेंगे।

 

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क्यों नाराज हैं ललन सिंह?

ललन सिंह और आरसीपी के बीच राजनीतिक रिश्ता पहले से ही खराब रहा है। दोनो एक दूसरे के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। दोनो के बीच पावर की लड़ाई है। लखीसराय में जब पत्रकारों ने आरसीपी के पार्टी के वापसी के संबंध में ललन सिंह से सवाल पूछा तो उनका जवाब था कि आरसीपी ने पार्टी में रहते हुए पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।

 

ललन सिंह ने आरसीपी सिंह पर पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा,  'पार्टी से बाहर निकलने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी भी की। पार्टी को रसातल में पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही है। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए पार्टी में विधायकों की संख्या 42 हो गई थी। वे जिस दल की राजनीति कर रहे हैं, वहीं बेहतर तरीके से काम करें। इधर-उधर ताक-झांक करने से कोई लाभ मिलनेवाला नहीं है।'

क्यों कुछ नेता चाहते हैं वापसी?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीब चार ही नेता हैं। उनमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और विजय चौधरी और राज्यसभा सदस्य संजय झा शामिल हैं। आरसीपी के समर्थक नेताओं का कहना है कि इन चारों के रहते दूसरे लोगों को अपनी बातें रखने का मौका नहीं मिलता। अधिकारियों पर भी इन लोगों की मजबूत पकड़ है। दूसरे नेताओं की बात अधिकारी सुनते ही नहीं हैं। यही कारण है कि पार्टी के भीतर लोगों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव पार्टी और संगठन पर पड़ रहा है। 

 

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निशांत और आरसीपी का पोस्टर?

कुछ दिनों पहले एक पोस्टर जारी किया गया था। उस पोस्टर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बेटे निशांत और आरसीपी की तस्वीर लगी थी। मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को लगातार राजनीति में लाने का मांग भी की जा रही है। 

 

निशांत के समर्थकों का कहना है कि जब वह राजनीति में आयेंगे, तो उन्हें गाइड करने के लिए एक सीनियर लीडर की आवश्यकता होगी। आरसीपी प्रशासनिक पदाधिकारी भी रहे हैं। उन्हें राजनीति का भी बेहतर अनुभव है। ऐसी स्थिति में अगर निशांत राजनीति में आयेंगे तब उन्हें आरसीपी बेहतर तरीके से गाइड कर पाएंगे। पूरे प्रकरण को लेकर पार्टी के भीतर अंतर्कलह तेज हो गया है।

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