गुटबाजी में फंसी हिमाचल कांग्रेस, क्या राज्यसभा चुनाव में फिर से खेल करेगी BJP?
राज्यसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में फूट खुलकर सामने आ चुकी है। पार्टी में विक्रमादित्य सिंह के बयान पर घमासान मचा हुआ है।

हिमाचल कांग्रेस के नेता, Photo Credit: @SukhuSukhvinder
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के बडे़ नेता अधिकारियों के कामकाज के बहाने अब आपस में एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि कांग्रेस के कई कार्यकर्ता मंत्री विक्रमादित्य के समर्थन में तख्तियां लेकर उनके आवास हॉलीलॉज पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इस दौरान विक्रमादित्य भी उनके साथ नजर आए।
हिमाचल सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बाहरी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि यूपी और बिहार के आईपीएस और आईएएस अधिकारी हिमाचल के हितों से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस बयान पर जब विवाद हुआ तो उन्होंने कहा कि वह टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते लेकिन प्रदेश की जनता के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
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सीएम ने दी नसीहत
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले पर कहा कि सभी अधिकारी बढ़िया काम कर रहे हैं और कोई विवाद नहीं है। हालांकि, बाद में उन्होंने मंत्री विक्रमादित्य को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य को अपने विभाग से मतलब रखना चाहिए और उनका अधिकारियों को लेकर दिया गया बयान गलत है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद दिया है।
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कैबिनेट में विवाद
विक्रमादित्य सिंह के इस बयान के बाद हिमाचल प्रदेश कैबिनेट में फूट एक बार फिर सामने आ चुकी है। कुछ मंत्री विक्रमादित्य के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं तो कुछ उनके समर्थन में उतर आए हैं। मंत्री जगत सिंह नेगी, अनिरुद्ध सिंह, राजेश धर्माणी विक्रमादित्य के खिलाफ बयान दे चुके हैं। वहीं, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर सार्वजनिक रूप से विक्रमादित्य सिंह का समर्थन कर चुके हैं।
हॉलीलॉज पहुंचे समर्थक
एक बयान से शुरू हुआ यह मामला अब शक्ति प्रदर्शन तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता यदुपति ठाकुर के नेतृत्व में सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता विक्रमादित्य के शिमला स्थित आवास हॉलीलॉज पहुंचे। युवाओं ने 'साथ थे, साथ हैं और साथ रहेंगे' जैसे नारे लगाए। इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए कार्यकर्ताओं ने विक्रमादित्य की ताकत दिखाने की कोशिश की।
इस मौके पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उनके लिए राज्य का हित सर्वोच्च है और वह उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सिद्धांतों और सोच के अनुरूप ही काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम और पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है उसे वह पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं। वहीं, उनकी मां और पूर्व पार्टी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपनी बात रखी, सरकार की भी अपनी राय है, इसे बेलजह तूल देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'विक्रमादित्य सिंह एक अनुभवी नेता हैं और उन्हें पता है कि कब और कैसे अपनी बात रखनी है।'
राज्यसभा सीट से पहले घमासान
कांग्रेस पार्टी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में करारी हार का सामना कर चुकी है। पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी बहुमत के बावजूद राज्यसभा चुनाव नहीं जीत पाए थे। कांग्रेस के 40 विधायकों में से 6 विधायकों ने बीजेपी उम्मीदवार हर्ष महाजन को वोट दे दिया था और दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे।
इसके बाद लॉटरी सिस्टम के जरिए हर्ष महाजन को विजेता घोषित किया गया। पार्टी ने 6 विधायकों पर कार्रवाई की और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद उपचुनाव हुए और कांग्रेस पार्टी फिर से 40 विधायकों तक पहुंची। सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहे थे।
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पिछली बार राज्यसभा चुनाव से पहले भी मंत्री विक्रमादित्य सिंह नाराज थे। उस समय उन्होंने 6 बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे उनके पिता वीरभद्र सिंह की प्रतिमा नहीं लगाने को नाराजगी का कारण बताया था। उस घटनाक्रम में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया था। हालांकि, बाद में सुखविंदर सिंह सुक्खू और आलाकमान ने मामले को शांत करवाया था।
क्या बीजेपी करेगी खेल?
अब राज्यसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही एक बार फिर कांग्रेस गुटों में बंटी नजर आ रही है। मौजूदा समय में कांग्रेस के पास 40 और बीजेपी के पास 28 विधायक हैं। कांग्रेस आसानी से विधानसभा सीट जीत सकती है क्योंकि संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस पार्टी की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है लेकिन गुटबाजी से परेशान है।
बीजेपी कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा उठाने की तैयारी में है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि जिस तरह से मंत्री लड़ रहे हैं, वह बड़ा होने का इशारा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का कुनबा कभी भी इस तरह नहीं बिखरा, जैसा अभी लग रहा है।
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का 6 साल का कार्यकाल 10 अप्रैल को पूरा हो रहा है। यानी अप्रैल से पहले ही राज्यसभा चुनाव हो सकते हैं। कांग्रेस के लिए आसान मानी जा रही सीट भी एक बार फिर मुश्किलों में फंस सकती है। बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस-2' एक बार फिर चर्चा में है।
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