संजय सिंह, पटना। नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरे फुल फॉर्म में हैं। लगातार कार्यक्रमों और निर्माण स्थल पर जाकर उन्होंने विरोधियों के इस आरोप पर विराम लगा दिया कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं। विरोधी मकर संक्रांति के बाद उन्हें घेरने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच मुख्यमंत्री ने 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा की घोषणा कर दी है। उनकी इस घोषणा से विरोधियों का प्लान धरा का धरा रह गया। यह उनकी 16वीं यात्रा होगी।
बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव 40 दिनों की यात्रा के बाद पटना लौट आए हैं। वह फिलहाल तीन समस्याओं से जूझ रहे हैं। कोर्ट के आदेश ने लालू परिवार के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। उधर पारिवारिक कलह भी अब खुलकर सामने आ चुकी है। पार्टी के भीतर भी सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। पटना लौटने के बाद तेजस्वी ने सिर्फ मीडिया कर्मियों से बात की और अपने आवास पर चले गए। उनके इस कदम पर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
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विरोधियों को दिया झटका
पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी के इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। तिवारी ने कहा कि तेजस्वी में राजनीतिक समझ का आभाव है। लंबे समय के बाद बाहर से लौटने पर उन्हें पार्टी कार्यालय जाना चाहिए और नेता व कार्यकर्ता से फीडबैक लेना चाहिए। वह नेता और कार्यकर्ता से कटते जा रहे हैं। इसका सीधा लाभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिल रहा है। समय समय पर RJD में टूट की चर्चा भी होती रहती है। तेजस्वी यादव राजनीतिक रूप से कुछ कर पाते इसके पहले मुख्यमंत्री ने जनता के साथ सीधा संवाद करने का मन बना लिया है।
प्रशांत किशोर के गतिविधियों पर नजर
जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर भी चुनाव हारने के बाद चुप्पी साध रखे थे। मकर संक्रांति के बाद जन सुराज भी अपनी राजनीति गतिविधियां शुरू करेगी। जन सुराज का मुख्य चुनावी मुद्दा भ्रष्टाचार, रोजगार, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य था। सरकार इन सभी मुद्दों पर पहले से ही सजग हो गई है। सरकार गठन के बाद लगभग 20 अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते जेल भेजे गए। उद्योग मंत्री ने उद्योग लगाने के लिए कई घोषणाएं की। पलायन रोकने के लिए आवश्यक नीतियां बनाई जा रही है। हर प्रखंड में एक बेहतर विद्यालय खोलने की भी बात कही जा रही है। यह सब इस कारण किया जा रहा है कि प्रशांत किशोर को सरकार की आलोचना करने का मौका नही मिले।
कब से शुरू हुई यात्रा ?
राजनीति के माहिर खिलाड़ी नीतीश कुमार ने 2005 से यात्रा शुरू की थी। सबसे शुरू में उन्होंने प्रगति यात्रा की शुरुआत की थी। 2009 में विकास यात्रा निकाली। इस तरह की यात्रा से लोगों से सीधा संवाद करने का मौका मिलता है। जमीनी हकीकत की जानकारी भी मिलती है। इन्होंने प्रवास यात्रा, विकास यात्रा, सेवा यात्रा, अधिकार यात्रा, संकल्प यात्रा, संपर्क यात्रा, निश्चय यात्रा, विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा, जल जीवन हरियाली यात्रा, समाज सुधार अभियान, समाधान यात्रा, प्रगति यात्रा के कार्यों को बेहतर तरीके से पूरा किया।
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यात्रा से क्या होता है लाभ?
मुख्यमंत्री इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि इस तरह की यात्रा से राजनीतिक लाभ के साथ साथ सामाजिक लाभ भी मिलता है। लोग अपनी बातों को उन तक पहुंचा पाते हैं। धरातल पर जाकर योजनाओं को देखने का भी मौका मिलता है। इससे अधिकारी भी पूरी तरह सजग रहते हैं। लंबित कार्यों या योजनाओं को तेजी से पूरा किया जाता है। सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इस यात्रा से लापरवाह अधिकारियों की पहचान हो जाती है।
मुख्यमंत्री के चुनावी राजनीति का मुख्य आधार आधी आबादी है। इस आधी आबादी में जीविका दीदियां भी आती है। जीविका दीदियों को उनपर और दीदियों को मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच संवाद का इससे बेहतर अवसर नही होता है। मिले फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री समय समय पर इस तरह की यात्रा करते रहते हैं।