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UP राज्यसभा चुनाव: जातीय समीकरण साधने के लिए किन चेहरों को उतारेगी बीजेपी?

UP चुनाव से पहले बीजेपी राज्यसभा में जातीय समीकरण को साधते हुए प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। प्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, अर्चना मिश्रा, स्मृति ईरानी व मनोज सिन्हा के नाम की चर्चा चल रही है।

sanjeev balyan smriti irani and manoj sinha

संजीव बाल्यान, स्मृति ईरानी और मनोज सिन्हा, Photo Credit: Social Media

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) में राष्ट्रीय और प्रदेश टीमों में बदलाव के बाद माना जा रहा है कि पार्टी राज्यसभा चुनाव में भी चौंकाने वाले कुछ चेहरों पर दांव लगा सकती है। इस चुनाव में राज्यसभा की 10 सीटों में से बीजेपी-एनडीए सात सीटों पर जीत दर्ज करने में सक्षम है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की प्रभावी संख्या को देखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान का नाम चर्चा में है। उन्हें राज्यसभा भेजकर बीजेपी जाट वोटों को लेकर आरएलडी पर अपनी निर्भरता कम कर सकती है।

 

जौनपुर की सीमा द्विवेदी की जगह ब्राह्मण महिला चेहरे के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा अहम दावेदार हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान में राष्ट्रीय महामंत्री बनीं स्मृति ईरानी का उच्च सदन जाना तय माना जा रहा है। पूर्व मंत्री हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह का नाम भी चर्चा में है।

 

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अर्चना मिश्रा की दावेदारी मजबूत

राज्यसभा चुनाव में अर्चना मिश्रा के नाम की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले दिनों उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हो चुकी है। राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी की भी प्रबल दावेदारी मानी जा रही है। राज्यसभा सदस्य रहीं गीता शाक्य को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। ऐसे में उनकी जगह पार्टी किसी नए ओबीसी महिला चेहरे को राज्यसभा का टिकट दे सकती है। हालांकि, विधानसभा चुनाव लड़ने की स्थिति में गीता शाक्य के नाम पर भी अलग तरह से फैसला हो सकता है।बृजलाल का कार्यकाल पूरा हो रहा है, ऐसे में उनकी जगह दलित चेहरे के तौर पर युगल किशोर का नाम भी चर्चा में है। उनके पुत्र के विधायक होने की वजह से पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत जैसे अन्य विकल्पों पर भी अमल किया जा सकता है।

बीएल वर्मा और हरदीप पुरी पर स्थिति साफ नहीं

केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और हरदीप पुरी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अगर दोनों को मंत्रिमंडल विस्तार से बाहर रखा जाता है तो उनकी जगह दूसरे कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा जा सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को बीजेपी ने 2020 में राज्यसभा भेजा था। चर्चा है कि उनकी दावेदारी पर फैसला गृह मंत्री और प्रधानमंत्री लेंगे।

 

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दिनेश शर्मा के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर नजर

उप राज्यपाल बनने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। उनकी जगह अब नए चेहरे को मौका मिलने की संभावना है। अरुण सिंह को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला तो पूर्व मंत्री सुरेश राणा के लिए भी अच्छे दिन आ सकते हैं।राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के संभावित चेहरों में जाट, ब्राह्मण, महिला, ओबीसी और दलित समीकरण को ध्यान में रखे जाने की चर्चा है। पार्टी की ओर से प्रत्याशियों के नाम तय होने के बाद तस्वीर और साफ होगी।


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