पद्म पुरस्कार से राज्यों को साधने की कोशिश, BJP का निशाना कहां है?
केंद्र की मोदी सरकार ने इस बार पद्म पुरस्कारों में दक्षिण भारतीयों राज्यों और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर जमकर ध्यान दिया है। खास बात यह है कि इन राज्यों में इस साल चुनाव होने हैं।

पद्म पुरस्कार 2026, Photo Credit (@PadmaAwards)
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या के मौके पर केंद्र सरकार ने पद्म सम्मान के नामों की घोषणा की। सरकार ने जैसे ही इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा की पूरे देश की निगाहें उन नामों को खोजने लगीं, जिन्हें यह पद्म सम्मान दिए गए। अब जब पद्म पुरस्कार के नामों की घोषणा हो चुकी है, तो इसमें कई ऐसे नाम हैं, जो चौंकाते हैं। इस बार 'पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री' पुरस्कार कुल 131 विशिष्ट लोगों को दिए गए। मोदी सरकार ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी वैचारिक तौर पर अपने विरोधियों को भी सम्मान देने से पीछे नहीं हटती।
भारत सरकार अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाले नागरिकों को सम्मान देती है। इस साल 131 पद्म अवार्ड में से 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं। भारतीय राजनीति के लिहाज से भी इस बार का नागरिक सम्मान पुरस्कार अहम है। इस साल देश के 5 राज्यों (केरल, असम, पश्चिम बंगाल, पुदुचेरी और तमिलनाडु) में चुनाव होना है। इन राज्यों के कई लोगों को पुरस्कार से नवाजा गया है।
बीजेपी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने इस बार क्षेत्रियता का खास ख्याल रखा है। सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्यों ने सामूहिक रूप से 40 लोगों को पुरस्कार दिए हैं। इसके अलावा सरकार ने पश्चिम बंगाल के विशिष्ट लोगों को भी पुरस्कार के लिए चुना है। ऐसे में इन पद्म पुरस्कारों को मोदी सरकार द्वारा क्षेत्रीय अस्मिता को साधने के एक बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा इसकी भी है कि बीजेपी सरकार इन पुरस्कारों से चुनावी राज्यों को साधने की कोशिश की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बीजेपी का निशाना कहां है...
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पुरस्कारों का समीकरण
दिए गए पुरस्कारों में खास बात यह है कि केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए केरल, तमिलनाडु और बंगाल में इन पुरस्कारों के गहरे राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, 131 पद्म पुरस्कारों में महाराष्ट्र में सर्वाधिक 15 लोगों को पदक दिए गए हैं। तमिलनाडु 13 पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
केरल के खाते में 5 में से 3 पद्म विभूषण आए जिनमें केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज वामपंथी नेता वी.एस. अच्युतानंदन शामिल हैं। इसके अलावा इनमें पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस और मरणोपरांत सम्मानित कम्युनिस्ट नेता पी. नारायणन शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को भी पद्म भूषण दिया गया है। पश्चिम बंगाल को 11 पुरस्कार मिले हैं, यह सभी पुरस्कार ‘पद्म श्री’ श्रेणी के हैं।
केरल में सियासी समीकरण
इसमें खास बात यह है कि अच्युतानंदन जीवनभर बीजेपी-संघ के कट्टर आलोचक रहे। वे इन संगठनों को सांप्रदायिक कहते थे और बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते थे। अच्युतानंदन हमेशा सेक्युलर ताकतों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते थे। ऐसे में अच्युतानंदन को देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण देने का फैसला राजनीतिक नजरिए से केरल विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, केरल में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में लगी बीजेपी को उम्मीद है कि लेफ्ट समर्थकों के बीच यह कदम सकारात्मक संकेत दे सकता है। बीजेपी को लगता है कि इस कदम से केरल के वामपंथी वोटरों का झुकाव बीजेपी की तरफ होगा और उसे चुनाव में फायदा मिलेगा।
झारखंड में समीकरण साधने की कोशिश?
केरल के बाद झारखंड में भी पद्म सम्मान दिए जाने का सियासी मतलब निकाला जा रहा है। देश के आदिवासी राजनीति के सबसे बड़े और प्रभावशाली चेहरों में शामिल शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब राज्य में बीजेपी और जेएमएम के बीच संभावित नजदीकियों की चर्चाएं हो रही हैं। बिहार चुनाव में महागठबंधन में सम्मान नहीं दिए जाने के बाद जेएमएम और एनडीए एक दूसरे के करीब आते हुए दिखाई दिए हैं। ऐसे में हेमंत सोरेन की जेएमएम कांग्रेस से दूरी बनाकर बीजेपी के साथ आ सकती है।
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माना जा रहा है कि बीजेपी आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए शिबू सोरेन के प्रभाव का फायदा लेना चाहती है, क्योंकि तमाम कोशिशों के बावजूद यह वोट बैंक वह अपने पक्ष में मजबूती से नहीं जोड़ पाई है।
केरल के बाद तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम में कुछ महीनों के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में बीजेपी की उपस्थिती बस असम में ही मजबूत है, जबकि अन्य तीनों राज्यों में पार्टी दशकों से संघर्ष करती रही है।
बंगाली को 11 पद्म पुरस्कार
पश्चिम बंगाल पूरे देश में कला और संस्कृति के लिए जाना जाता है। राज्य में कला और संस्कृति का प्रभाव राजनीति पर भी रहा है। राज्य के सामाजिक समीकरण को देखते हुए मोदी सरकार ने इस बार पश्चिम बंगाल से आने वाले 11 नागरिकों को पद्म अवार्ड से सम्मानित किया है। इसमें बंगाली एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी शामिल हैं। प्रोसेनजीत को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए सरकार ने पद्म श्री दिया है।
प्रोसेनजीत के अलावा अशोक कुमार हलधर, गंभीर सिंह योनजोंन, हरि माधव मुखोपाध्याय, ज्योतिष देवनाथ, कुमार बोस, महेंद्र नाथ रॉय, रबीलाल टुडु, सरोज मंजल, तरुण भट्टाचार्या, और कला में तृप्ति मुखर्जी को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। इनमें से ज्यादातर नाम कला क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। माना जाता है कि यह सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में लोगों के बीच एक अलग पैठ रखते हैं। वहीं, पढ़ा-लिखा तबका होने कारण उनका कला-संस्कृति की तरफ रूझान भी अधिक है। ऐसे में मोदी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि बीजेपी पढ़े-लिखे लोगों को मान-सम्मान दे रही है।
तमिलनाडु के इन 13 लोगों को पद्म पुरस्कार
तमिलनाडु में जिन 13 लोगों को पद्म अवॉर्ड से नवाजा गया है। उनमें मेडिसिन के क्षेत्र से कल्लीपट्टी रामास्वामी पलनीस्वामी। समाजिक क्षेत्र में एस के एम मैइलानंदन, गायत्री बालासुब्रमण्यम और रजनी बालासुब्रमण्यम को कला के क्षेत्र में संयुक्त अवॉर्ड दिया गया है। एचवी हंडे को मेडिसिन, के रामा स्वामी को विज्ञान, के विजय कुमार को सिविल सर्विस, ओथुवार थिरुथानी स्वामीनांथन को कला, पुनियामूर्थि नटेसन मेडिसिन, आर कृष्णनन कला, राजस्थापति कलियप्पा गौंडर कला, शिव शंकरी शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में, कला के क्षेत्र में तिरुवारूर बक्थावत्सलम को पद्म अवॉर्ड से नवाजा गया है।
तमिलनाडु में भी जो पद्म पुरस्कार दिए गए हैं, वह भी पश्चिम बंगाल की ही तरह समाज में राय बनाने वाले पढ़े लिखे वर्ग को दिया गया है।
असम के किन लोगों को मिला पुरस्कार
असम के जिन लोगों को यह अवॉर्ड दिया गया है, उनमें कला क्षेत्र में हरिचरण साइकिया, सार्वजनिक क्षेत्र में कबिंद्र पुरकायस्थ, कला के लिए नुरुद्दीन अहमद, कला क्षेत्र में पोखिला लेकथेपी शामिल हैं।
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