logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बसपा के वोटबैंक पर चंद्रशेखर की निगाह, चुनाव से पहले उठाया बड़ा कदम

चार जून से निकलेगी सत्ता परिवर्तन यात्रा, दलितों, पिछड़ों और युवाओं को जोड़कर यूपी में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश

Nagina MP Chandrashekhar Azad

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद। ( Photo Credit: Social Media )

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में जुटी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) अब बड़े स्तर पर जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी चार जून से पूरे प्रदेश में "सत्ता परिवर्तन यात्रा" निकालने जा रही है। यात्रा का शुभारंभ बिजनौर से होगा और इसका नेतृत्व पार्टी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद करेंगे।

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के दलित, पिछड़े, आदिवासी, किसान, महिला और युवा मतदाताओं को एक मंच पर लाना है। खास बात यह है कि चंद्रशेखर की नजर बहुजन समाज पार्टी के पारंपरिक कैडर वोट बैंक पर भी है।

 

यह भी पढ़ें: समय से पहले यूपी में विधानसभा चुनाव? समाजवादी पार्टी की तैयारियां पूरी

वंचित राजनीति में बढ़त बनाने की कोशिश

 

नगीना से सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर आजाद का राजनीतिक कद बढ़ा है। लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद वह प्रदेशभर में अपनी पार्टी का संगठन मजबूत करने में जुटे हैं। चंद्रशेखर कई बार सार्वजनिक मंचों से दलित उत्पीड़न, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। पार्टी का दावा है कि वह बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा के कमजोर होते जनाधार और दलित वोटों के बिखराव के बीच आजाद समाज पार्टी अपने लिए नई राजनीतिक जमीन तलाश रही है। सत्ता परिवर्तन यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा है।

 

यह भी पढ़ें: पंजाब में जीत से उत्साहित आप, यूपी में 50 लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य

आरक्षण, शिक्षा और शराबबंदी होंगे प्रमुख मुद्दे

पार्टी इस यात्रा के दौरान कई जनसरोकार के मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी। इनमें पेपर लीक को जघन्य अपराध घोषित करने, कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा देने, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने तथा प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

 

इसके अलावा पार्टी भाजपा सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कार्यकर्ताओं को गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर जनता से संवाद करने की जिम्मेदारी दी गई है।

 

यह भी पढ़ें: यूपी में सपा ने बनाया लोकसभा से भी तगड़ा फॉर्मूला, क्या काम आएगी यह रणनीति?

22 प्रतिशत दलित वोट बैंक पर विशेष नजर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 22 प्रतिशत है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं।


वर्ष 2012 के बाद से बहुजन समाज पार्टी का जनाधार लगातार घटता दिखाई दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में आजाद समाज पार्टी बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रही है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को लगभग 0.5 प्रतिशत वोट ही मिले थे, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व नए उत्साह के साथ मैदान में है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा प्रभाव

चंद्रशेखर का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माना जाता है। नगीना और बिजनौर क्षेत्र से ही मायावती ने भी अपने राजनीतिक सफर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। अब नगीना से सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर इसी क्षेत्र को अपनी राजनीतिक ताकत का केंद्र बना रहे हैं। पार्टी का संगठन बिजनौर, नगीना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है। 

विधानसभा चुनाव पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आजाद समाज पार्टी सत्ता परिवर्तन यात्रा के जरिए प्रदेश के विभिन्न वर्गों को जोड़ने में सफल रहती है तो वह आगामी विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर प्रभावी भूमिका निभा सकती है। हालांकि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जनाधार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बाहर प्रदेशव्यापी स्वरूप देना और बसपा के पारंपरिक वोटरों का विश्वास जीतना होगा। 


और पढ़ें