कांग्रेस ने ओडिशा के तीन विधायकों को पार्टी से निकाल दिया है। ये विधायक हैं, साना खेमुंडी के रमेश जेना, बाराबती कटक की सोफिया फिरदौस और मोहाना के दशरथ गमांगो।
पार्टी ने कहा कि इन विधायकों ने पार्टी के व्हिप (आदेश) की अवहेलना की और राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के समर्थित उम्मीदवार को वोट दिया। ओडिशा कांग्रेस के आधिकारिक X हैंडल (@INCOdisha) ने लिखा, 'जो कांग्रेस को धोखा देते हैं, वे देश को धोखा देते हैं।'
यह भी पढ़ें: नीतीश की जीत के अगले दिन केसी त्यागी का JDU से इस्तीफा, खत में बयां हुआ दर्द
क्रॉस-वोटिंग का आरोप
सोमवार को 10 राज्यों में राज्यसभा के चुनाव हुए। ओडिशा में 4 सीटों के लिए वोटिंग हुई। बीजेपी ने दो उम्मीदवार उतारे थे, मनमोहन समल और सुजीत कुमार। दोनों जीत गए। बीजेडी का उम्मीदवार डॉ. संतृप्त मिश्रा भी जीते।
चौथी सीट पर बीजेपी के समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार दिलीप रे ने जीत हासिल की। उनके खिलाफ बीजेडी और कांग्रेस के समर्थित उम्मीदवार दत्तेश्वर सामने थे। लेकिन कुछ विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग (पार्टी से अलग वोट) की, जिससे दिलीप रे जीत गए।
बीजेपी सत्ता में
ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं जिसमें बीजेपी के पास 79 विधायक हैं और उसे 3 निर्दलीयों का समर्थन भी है, यानी सरकार के पास कुल कुल 82 विधायक हैं। बीजेडी के 50 (2 निलंबित, प्रभावी 48), कांग्रेस के 14 और सीपीआई(एम) का 1 विधायक है।
कांग्रेस के राज्य प्रमुख भक्त चरण दास ने पहले ही कहा था कि इन तीन विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया है। पार्टी ने अब इन्हें निकाल दिया है।
कौन हैं सोफिया
सोफिया फिरदौस ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक हैं। उनका जन्म 23 अगस्त 1991 को हुआ। उनके पिता मोहम्मद मोकिम पहले इसी सीट से विधायक थे लेकिन कानूनी मामलों के कारण 2024 में चुनाव नहीं लड़ सके।
सोफिया ने कटक के सेंट जोसेफ गर्ल्स हाई स्कूल और रेवेंसाव जूनियर कॉलेज से पढ़ाई की। फिर कीट, भुवनेश्वर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया और 2022 में आईआईएम बैंगलोर से एग्जीक्यूटिव मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया।
वह पहले बिजनेसवुमन थीं और मेट्रो ग्रुप में डायरेक्टर के तौर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स संभालती थीं। वे शेख मेराजुल हक से शादीशुदा हैं। 2024 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के पूर्ण चंद्र महापात्र को 8,001 वोटों से हराया। उनकी संपत्ति चुनाव हलफनामे में 5.24 करोड़ रुपये बताई गई है।
यह भी पढ़ें: करो या मरो की जंग में जीते हुड्डा, राज्यसभा के बाद अब हरियाणा में होंगे उपचुनाव?
सोफिया ने पहले ही पार्टी से असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने बीजेडी उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला बिना विधायकों से पूछे लिया। उनका मानना है कि बीजेडी अक्सर बीजेपी का 'बी-टीम' की तरह काम करती है।