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करो या मरो की जंग में जीते हुड्डा, राज्यसभा के बाद अब हरियाणा में होंगे उपचुनाव?

हरियाणा में दो सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी को एक-एक सीट पर जीत मिली। कांग्रेस के पांच विधायकों ने निर्दलीय उम्मीदवार को वोट किया, जिससे पार्टी नाराज है।

Congress Leaders After winning

जीत के बाद कांग्रेस नेता, Photo Credit: PTI

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ओडिशा, बिहार और हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के अपनों ने ही कांग्रेस पार्टी को धोखा दे दिया। ओडिशा और हरियाणा में नतीजा रहा कि पार्टी जरूरी संख्याबल के बाद भी राज्यसभा चुनाव हार गए। हरियाणा में पार्टी राज्यसभा चुनाव जीतने में कामयाब तो रही लेकिन पार्टी के पांच विधायकों ने पार्टी को धोखा दे दिया। हरियाणा में दो सीटों पर हुए चुनाव में एक सीट पर कांग्रेस के कर्मवीर बोद्ध और दूसरी सीट पर बीजेपी के संजय भाटिया की जीत हुई। वहीं, बीजेपी समर्थित उम्मीदवार सतीश नांदल की हार हो गई। 

 

इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती थी। पार्टी आलाकमान ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इस जीत के लिए रणनीति बनाने के लिए आगे किया। पार्टी ने किसी भी गुट के नेता को टिकट ना देकर इशारा कर दिया था कि गुटबाजी नहीं चलेगी। हुड्डा बाप-बेटे के सामने इस बार लगातार तीसरी बार गच्चा खाने से बचने की चुनौती थी। इससे पहले 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस क्रॉस वोटिंग के चलते हार गई थी। 

 

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हुड्डा के लिए करो या मरो की स्थिति

इस राज्यसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सासंद बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा एक्टिव नजर आए। पार्टी के विधायकों के साथ बैठक करनी हो, विधायकों को हिमाचल लेकर जाना हो या फिर पोलिंग एजेंट बनना हो, हुड्डा हर जगह दिखाई दिए। विधायकों को टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने तमाम कोशिशें की और उसका नतीजा यह रहा कि बीजेपी की रणनीति फेल हुई और कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। 

हुड्डा के लिए यह चुनाव करो और मरो की स्थिति इसलिए भी थी क्योंकि उन्हें चुनौती उनके गढ़ कहे जाने वाले रोहतक से मिल रही थी। सतीश नांदल दो बार भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं और उन्हें हुड्डा का कट्टर विरोधी माना जाता है। ऐसे में बीजेपी ने उन्हें निर्दलीय मैदान में उतारकर कांग्रेस और हुड्डा परिवार की परेशानी बढ़ा दी। हालांकि, हुड्डा ने इस रणनीति को फेल तो कर दिया लेकिन उनके 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी है। 

किन विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग?

कांग्रेस को झटका उस समय लगा जब पता चला कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी है। वहीं, पार्टी के चार वोट रद्द हो गए। अगर बीजेपी का एक वोट रद्द ना होता तो कांग्रेस यह चुनाव भी हार जाती। अब हर किसी के मन में सवाल है कि किन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। सोशल मीडिया पर और मीडिया में कुछ नामों की चर्चा है लेकिन पार्टी ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी का नाम सामने नहीं रखा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इतना जरूर कहा है कि उन्हें नाम पता हैं और उन्होंने आलाकमान को नाम दे दिए हैं। हालांकि, उन्होंने नाम बताने से मना कर दिया और कहा की हर कोई जानता है नाम। 

 

क्या पार्टी से बाहर होंगे धोखेबाज विधायक?

कांग्रेस पार्टी को हरियाणा, बिहार और ओडिशा में अपने ही विधायकों ने धोखा दे दिया है। ओडिशा में तो कांग्रेस पार्टी ने कार्रवाई करते हुए अपने तीन विधायकों को पार्टी से निष्काषित कर दिया है। हालांकि, अभी तक हरियाणा में क्रॉस वोट करने वाले विधायकों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान हरियाणा में भी ओडिशा की तर्ज पर कार्रवाई कर सकती है। 

 

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हुड्डा के सामने होगी चुनौती?

कांग्रेस भले ही राज्यसभा चुनाव जीत गई हो लेकिन पार्टी को अपने ही विधायकों ने धोखा दे दिया है। अभी पार्टी इन विधायकों पर कार्रवाई कर सकती है और कुछ विधायकों की गतिविधियों के कारण सोशल मीडिया पर उन्हें ही गद्दार बताया जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी है। उनकी पत्नी शैली चौधरी नारायणगढ़ से विधायक हैं।

 

इसी नारायणगढ़ सीट से सीएम नायब सिंह सैनी चुनाव जीतते थे और शैली चौधरी के पति चुनाव में हारे थे। रामकिशन गुर्जर और उनकी पत्नी को कुमारी शैलजा का करीबी माना जाता है। दैनिक भास्कर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब शैली चौधरी भी इस्तीफा दे सकती हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश में उपचुनाव हो सकते हैं और बताया जा रहा है कि इसका पूरा प्लान तैयार कर लिया गया है। 


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