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पुराने अध्यक्षों की विदाई, नए पर रार, पद बांटकर UP से पंजाब तक फंसी कांग्रेस?

पंजाब कांग्रेस कलह से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश में गठबंधन खटाई में पड़ रही है। अब कैसे, समझिए।

Imran Masood vs Pargat Singh ChatGPT

इमरान मसूद और परगट सिंह। AI इमेज। Photo Credit: PTI

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कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक पुराने प्रदेश अध्यक्षों की छुट्टी कर दी है। यूपी कांग्रेस चीफ के पद से अजय राय की विदाई हुई तो पंजाब के अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की छुट्टी हो गई। पंजाब में कांग्रेस कई खेमे में बंटी है, उत्तर प्रदेश में यह स्थिति नहीं है तो अलग ही पेच फंसा रहता है। दोनों राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। नई नियुक्तियों करके खुद कांग्रेस फंसती नजर आ रही है।

कांग्रेस ने चुनाव वाले दो राज्यों उत्तर प्रदेश और पंजाब में अपने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिए हैं। उत्तर प्रदेश में अजय राय की जगह आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। पंजाब में पूर्व मंत्री परगट सिंह को 2 अक्टूबर 2026 को राजा वड़िंग की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं।

आराधना मिश्रा राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से विधायक हैं और विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता रही हैं। परगट सिंह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं और जालंधर कैंट सीट से तीन बार के विधायक हैं।

पंजाब में क्यों फंस सकती है कांग्रेस?

पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पद से हटने के बाद खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें हटाने का फैसला प्रदेश प्रभारी महासचिव सचिन पायलट के संगठनात्मक फीडबैक के बाद हुआ। उन्होंने कहा भी कि सचिन पायलट ने सोचा होगा कि राजा को उतार देना चाहिए। सचिन पायलट को 5 सितंबर को भूपेश बघेल की जगह प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने प्रदेश के नेताओं से कई दौर की बैठकें कीं थीं। सचिन पायलट को भी पंजाब कांग्रेस की कलह का अंदाजा है। 

वैसे यह बात सच है कि परगट सिंह की साफ और विवादों से दूर रहने वाली छवि रही है। वह किसी खेमे का हिस्सा नहीं हैं। अब उनके सामने चुनौती है कि इतने अलग-अलग गुटों को कैसे एक साथ साधेंगे। पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के बीच खींचतान कई महीनों से खुलकर दिख रही थी। प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और चन्नी पार्टी की प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। इस नियुक्ति को पार्टी के क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से भी देखा जा रहा है। 

अब परगट सिंह के सामने चुनौती है कि प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के बीच की अनबन खत्म कराएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2022 के विधानसभा चुनाव की तरह पार्टी बिखरी रहेगी और आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल को बड़ा मौका मिल सकता है। परगट सिंह के चुने जाने से राजा वड़िंग बहुत खुश नहीं हैं। एक बार फिर पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले कलह सामने आ गई है। 

यूपी में पद बांटकर कैसे फंस गई है कांग्रेस?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अजय राय की जगह आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। पार्टी ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया है। इन नियुक्तियों से पार्टी के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। अजय राय कांग्रेस के जुझारू नेता हैं, अपना पद गंवाने से निराश हैं। पार्टी की कलह, मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

 

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के साथ संभावित सीट बंटवारे पर भी अब पेच फंस गया है। कांग्रेस का बिना यूपी में क्या जनाधार है, वह यह लोग साल 2019 के विधानसभा चुनाव में दख चुके हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बदलाव से चुनाव से पहले उसकी स्थिति मजबूत होगी लेकिन गठबंधन धर्म ही खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।

अजय राय बिगाड़ेंगे खेल?

अजय राय ने वाराणसी में प्रधानमंत्री को चुनौती देते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। कांग्रेस के लिए सड़क पर लड़ने वाले नेता रहे हैं, उनके हटने से एक बड़ा वर्ग नाराज है। यूपी कांग्रेस के तौर पर वह सराहे जा रहे थे। अब राज्य में पार्टी के प्रभारी और अजय राय के बीच तनाव हो सकता है। 

 

यह कहा जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सहमति के बिना ऐसा फैसला नहीं हो सकता था। अब अजय राय का क्या होगा, इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। अगर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई अहम भूमिका नहीं मिलती। वह दूसरी पार्टी में चले जाते हैं तो कांग्रेस मुश्किल में पड़ सकती है। हालांकि वह खुद को राहुल गांधी का सिपाही बता रहे हैं।

सपा के साथ खेल कैसे बिगड़ेगा?

सपा के साथ रिश्तों को लेकर भी सवाल है। आराधना मिश्रा के पिता प्रमोद तिवारी के समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से अच्छे संबंध बताए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस नियुक्ति का संबंध इस रिश्ते से है, जो कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को आसान बना सकता है। पेच यहां नहीं, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद की नियुक्ति पर फंसेगा। वह अखिलेश यादव पर लगातार हमले करते रहे हैं। वह पहले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों से जुड़े रहे हैं और मुस्लिम मतदाताओं में उनकी अपील बताई जाती है।

 

समाजवादी पार्टी ने दो अलग राजनीतिक रुख वाले नेताओं को अहम पदों पर रखा है। एक के सपा नेतृत्व से रिश्ते अच्छे हैं और दूसरे का रुख सपा के खिलाफ रहा है। अब इमरान मसूद के सपा के खिलाफ बोलने से कांग्रेस फंस सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि यह कांग्रेस की दबाव की राजनीति हो। 

संगठन के स्तर पर भी पार्टी चुनौतियों से जूझ रही है। पुराने प्रदेश अध्यक्षों ने अपनी पसंद से जिला अध्यक्ष नियुक्त किए थे। नए अध्यक्ष अब अपने तरीके से संगठन खड़ा करने और चलाने पर ध्यान देते रहे हैं। अजय राय ने जो संगठन तैयार किया था, आराधना मिश्रा के साथ वह कितना जाएगा

 


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