केरल में अगले दो महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए सभी दल कमर कस चुके हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारुढ़ सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले LDF गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के बीच है। बीजेपी राज्य में अभी अपनी जड़ें जमाने के लिए मेहनत कर रही है। इस बीच खबर सामने आई है कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए पार्टी जमीन से लेकर संगठन और टिकट बंटवारे में बड़ी सावधानी से फैसले ले रही है।
दरअसल, कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए एक मुश्किल चयन प्रक्रिया शुरू किया है। इसमें लेफ्ट के नेतृत्व LDF के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए अलग रणनीति अपनाई गई है। केरल कांग्रेस राज्य में टिकट बंटवारे में देर नहीं करना चाहती। वह नहीं चाहती कि विधानसभाओं में कई नेता टिकट के लिए उम्मीद लगाए बैठें, जिससे असमंजस की स्थिती बने। इसलिए पार्टी पहले ही टिकट को लेकर तस्वीर साफ करना चाहती है।
तेजी से काम कर रही स्क्रीनिंग कमेटी
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष हैं। वह 18 फरवरी को ही उम्मीदवारों को चुनने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन कर चुके हैं। कांग्रेस ने पार्टी द्वारा तय की गई सख्त गाइडलाइंस को लागू करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।
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विजयन सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी
कांग्रेस मानकर चल रही है कि पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ लोगों के बीच नाराजगी है। पार्टी का मानना है कि पिछले 10 साल से केरल की सत्ता पर काबिज विजयन सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर भी है। कांग्रेस अकेले दम पर UDF गठबंधन में लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। कांग्रेस हाईकमान ने केरल के लिए जो सुझाव दिए हैं, उनमें एक सख्त नियम यह है कि किसी भी मौजूदा सांसद को विधानसभा चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी। इस नियम के हिसाब से तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर और कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल जैसे सीनियर नेता चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
कांग्रेस आलाकमान ने तय किए सख्त नियम
इसके अलावा कांग्रेस ने तय किया है कि जो नेता पिछले दो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, या जो पिछले चुनाव में 5,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हारे हैं उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा। वहीं, अगर किसी सीट पर दो मजबूत उम्मीदवार के बीच सीट को लेकर टाई होता है तो ऐसे में जिसे टिकट मिलेगा वह चुनाव लड़ेगा और दूसरा नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ नहीं जाएगा। दूसरे नेता को बाद में सरकार आने पर इनाम के तौर पर किसी सरकारी बोर्ड या कॉर्पोरेशन में शामिल किया जाएगा।
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साथ ही जिन नेताओं को टिकट मिलता है और वे चुनाव हार जाते हैं तो वे बाद में अपनी वरिष्ठता के बावजूद राज्य सरकार में जगह पाने का कोई दावा नहीं कर पाएंगे। बता दें कि सांसद शशि थरूर आने वाले चुनावों के लिए केरल के पुराने नेता रमेश चेन्निथला के साथ कैंपेन कमेटी के को-चेयरमैन हैं।
कई सांसद चुनाव लड़ने के इच्छुक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने यह नियम इसलिए बनाए हैं क्योंकि केरल कांग्रेस के कई सांसद आने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इन नेताओं को लग रहा है कि इस बार पार्टी सत्ता में आ सकती है। केरल कांग्रेस के सचिव बीएम संदीप ने कहा, 'हमने केरल के लिए एक निर्णायक और आगे की सोच वाले रोडमैप बनाया है। संगठन को मजबूत करने और उम्मीदवारों की तलाश के लिए विस्तार से बातचीत चल रही है। कांग्रेस राज्य में एकता, स्पष्टता और जीत के लिए प्रतिबद्ध है।'
टिकटों पर अंतिम फैसला हाईकमान करेगा
बीएम संदीप ने आगे कहा, 'हमने टिकट चाहने वाले नेताओं का शुरुआती रिव्यू किया है। स्क्रीनिंग कमेटी के सुझावों के आधार पर नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए फिर से मीटिंग होगी।' वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई वाली सेंट्रल इलेक्शन कमेटी संभावित उम्मीदवारों का रिव्यू करेगी, ताकि सिंगल-नाम वाली सीटों को पहले से क्लियर किया जा सके।
इन सबके बीच राज्य के वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन की अगुवाई में केरल में पुथुयुग यात्रा चल रही है। दावा है कि इस यात्रा में हजारों लोगों का समर्थन मिल रहा है। आने वाले समय में वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी और वर्तमान सांसद प्रियंका गांधी भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। बता दें कि केरल विधानसभा चुनाव पिछली बार 6 अप्रैल 2021 में हुए थे। इस हिसाब से इस बार भी चुनाव इसी के आसपास हो सकते हैं।