जैसे-जैसे हुमायूं कबीर की बनेगी बाबरी मस्जिद, वैसे TMC को लगेगा झटका?
तृणमूल कांग्रेस की इमेज हमेशा से सेक्युलर दल की रही है। मस्जिद निर्माण को लेकर हुमायूं कबीर को सस्पेंड करना टीएमसी की सेक्युलर छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

हूमायूं कबीर। Photo Credit- PTI
हुमायूं कबीर नई जन्मी जनता उन्नयन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं। पिछले दो महीने से हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रासंगिक हो गए हैं। राज्य की केंद्रीय सियासत में उनका नाम लिया जाने लगा है। दरअसल, दरअसल वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बेलडांगा/रेजिनगर इलाके में अयोध्या की पुरानी बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई बाबरी मस्जिद का निर्माण करवा रहे हैं। इस दौरान कबीर ने कई ऐसे सांप्रदायिक बयान दिए, जिससे टीएमसी की फजीहत हुई और बीजेपी ने पार्टी को जमकर घेरा। यही वह वजहे हैं, जिसकी वजह से तृणमूल कांग्रेस ने हुमायूं कबीर को 4 दिसंबर 2025 को पार्टी से सस्पेंड कर दिया।
टीएमसी से सस्पेंड होने के बाद ही कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए राज्य में विधानसभा चुनवा लड़ने का ऐलान कर दिया। इसके दो दिन बाद हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को प्रतीकात्मक रूप से बाबरी मस्जिद की नींव रखी। इस दिन उन्होंने बेलडांगा में हजारों की तादात में मुस्लिम समाज के बीच बड़ी रैली की। इस रैली की चर्चा बंलाल से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक में हुई। दरअसल, विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं वैसे-वैसे कबीर बार-बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बयान दे रहे हैं। एक रैली में उन्होंने कहा, 'सीएम ममता ने मुझे हिंदुओं के खिलाफ नफरत भरे भाषण देने को कहा ताकि यूसुफ पठान जीत सकें।' वह वही हुमायूं कबीर हैं, जिन्होंने 2024 में हिंदुओं को भागीरथी नदी में फेंकने की धमकी दी थी।
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उनके इन बयानों से बीजेपी को टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में जैसे-जैसे हूमायूं कबीर के द्वारा बनवाई जा रही बाबरी मस्जिद आकार लेगी... वैसे टीएमसी को बंगाल में लगेगा झटका। आइए इसे विस्तार से समझते हैं...
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण कार्य
मुर्शिदाबाद में बन रही बाबरी मस्जिद का निर्माण कार्य अभी शुरुआती चरण में है। निर्माण स्थल पर मस्जिद के लिए नींव की खुदाई, ईंट, सिमेंट और सरिया बड़ी मात्रा में देखे जा सकते हैं। इसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि मस्जिद को बनने में दो साल का वक्त लगेगा। साथ ही इसे बनाने में लगभग 50-55 करोड़ की लागत आएगी। इसमें एक साथ 12,000 लोग नमाज पढ़ सकेंगे।

टीएमसी ने इस घटना के बाद हुमायूं कबीर की गतिविधियों का मुख्य केंद्र सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश बताया है। टीएमसी ने सीधे तौर पर उन पर बीजेपी की मदद से मस्जिद बनवाने का आरोप लगाया है। हुमायूं कबीर पर टीएमसी का यह आरोप दर्शाता है कि टीएमसी ऐसे किसी भी कदम को गंभीरता से ले रही है, जो राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला हो।
बीजेपी-टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप
हुमायूं कबीर भले ही बाबरी मस्जिद अकेले बनवा रहे हों लेकिन इन सबके बीच राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखे हो गए हैं। यह प्रोजेक्ट काफी विवादास्पद है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच में बीजेपी इसे वोट बैंक पॉलिटिक्स बता रही है और फंडिंग पर सवाल उठा रही है। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने यहां तक आरोप लगाया है कि कबीर जो मस्जिद बनवा रहे हैं, उसकी फंडिंग बांग्लादेश से हो रही है।
टीएमसी को चुनाव में कैसे होगा नुकसान?
ऐसे में इस मस्जिद के बनने और हुमायूं कबीर के बयानों से टीएमसी को चुनाव में नुकसान हो सकता है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक में फूट पड़ने का हो सकता है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में टीएमसी का सबसे मजबूत आधार मुस्लिम वोटर हैं। मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 60 फीसदी से भी अधिक है। कबीर भी यहीं से आते हैं। वह इससे पहले दावा कर चुके हैं उनके टीएमसी से निलंबन और मस्जिद निर्माण से टीएमसी का मुस्लिम वोट बैंक खत्म हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से में बाबरी मस्जिद के प्रतीकात्मक महत्व को जगाकर तृणमूल कांग्रेस से असंतोष पैदा कर सकता है, क्योंकि ममता बनर्जी ने इस कदम को सांप्रदायिक उकसावे वाला बताकर कबीर को सस्पेंड कर दिया था। इस कदम से कुछ मुस्लिम वोटर टीएमसी से हटकर जनता उन्नयन पार्टी की ओर रुख कर सकते हैं।

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हिंदू वोटरों का होगा पोलराइजेशन?
इसके अलावा हिंदू वोटरों में पोलराइजेशन हो सकता है, जिससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। बीजेपी ने मस्जिद बनाने को लेकर कहा है कि यह टीएमसी की तुष्टिकरण की राजनीति है। मुर्शिदाबाद में बन रही बाबरी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर कई बड़े बीजेपी नेता टीएमसी और ममता बनर्जी पर हमला कर चुके हैं। ऐसे में यह समझ तय कि मस्जिद भले ही हुमायूं कबीर बनवा रहे हों, लेकिन बीजेपी इसको लेकर टीएमसी को ही घेरेगी। बीजेपी से जुड़े संगठनों ने इसे हिंदू समुदाय पर चुनौती कहा है। इससे हिंदू वोटर और ज्यादा बीजेपी की ओर बोलबंद हो सकते हैं।
साथ ही तृणमूल कांग्रेस की इमेज हमेशा से सेक्युलर दल की रही है। मस्जिद निर्माण को लेकर हुमायूं कबीर को सस्पेंड करना टीएमसी की सेक्युलर छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। पिछले दिनों हुमायूं कबीर ने चुनाव को लेकर कहा, 'मेरी पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और मैं ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उम्मीदवार उतारूंगा।'
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