पूर्वोत्तर के सबसे बड़े और समृद्ध राज्य असम की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है। कांग्रेस के बड़े नेता और राज्य के पूर्व प्रदेश अक्ष्यक्ष भूपेन बोरा ने अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी के खेमें में चले गए हैं। सत्ता और पद पाने की होड़ के बीच 18 फरवरी को चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों का शेड्यूल जारी किया। इसमें असम की भी तीन सीटें पर चुनाव होना है। इस बीच राजधानी गुवाहाटी की सियासी गलियारों में एक और चर्चा होने लगी है कि कांग्रेस के बड़े नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। दरअसल, देबब्रत सैकिया की नजर एक राज्यसभा सीट पर है।
इंडिया टूडे ने बीजेपी के सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि देबब्रत सैकिया कुछ समय से बीजेपी से एक राज्यसभा सीट के लिए बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस समय अटकलों का समय अहम है, क्योंकि असम में इन दिनों अटकलों की खबरें सही हो जा रही हैं।
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कांग्रेस को लग सकता है झटका?
ऐसे में अगर देबब्रत सैकिया पाला बदलकर बीजेपी में जाते हैं तो यह असम में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका देगा। इस झटके के बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस संकट में पड़ सकती है।
हिमंत बिस्वा का बयान और सैकिया
पिछले दिनों असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बयान में कहा था कि बीजेपी ने असम से तीनों राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवार लगभग फाइनल कर लिए हैं। इसी दौरान उन्होंने देबब्रत सैकिया को लेकर बयान भी दिया था। सीएम ने कहा, 'अगर आप पिछले पांच सालों में देबब्रत सैकिया के बयान देखेंगे तो आप देखेंगे कि हर बार वह कहते हैं कि उनकी मां उन्हें पाला बदलने नहीं होने दे रही हैं। वरना उन्हें बीजेपी में शामिल होने में कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन बीजेपी ने तीनों सीटों के लिए उम्मीदवार लगभग तय कर लिए हैं। ऐसी कोई वैकेंसी नहीं है। हम राज्यसभा की तीनों सीटें जीतेंगे।'
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देबब्रत सैकिया ने दिया बयान
देबब्रत सैकिया ने अपनी तरफ से इन अटलकों पर कोई सीधा जवाब नहीं गिया है और ना ही कोई खंडन किया है। हालांकि उन्होंने कहा, 'मुझे इन सब के बारे में पता नहीं है। मुझे नहीं पता। ये सब अंदाजे लगाए जा रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं में कन्फ्यूजन पैदा करने की कोशिश है। आप सोर्स बताएं मैं उसके आधार पर जवाब दूंगा।'
इस दौरान सैकिया ने भूपेन बोरा के कदम पर निराशा जताते हुए कहा, 'उन्हें जाने दो। मैं उन्हें अपना आशीर्वाद दूंगा। वह मेरे अध्यक्ष थे। हमने साथ काम किया। जब मैं 2001 में पहली बार नया विधायक बना तो उन्होंने मुझे विधानसभा में अपने विचार रखने के तरीके बताए। मैं उनके गाइडेंस का सम्मान करता हूं। साथ ही देबब्रत सैकिया ने यह भी साफ किया कि विचारधारा से अलग होने की वजह से वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे।