तमिलनाडु में इसी साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सत्तारूढ़ डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके और बीजेपी सत्ता पाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। जहां, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को एक बार फिर से पावर में लौटने का विश्वास है तो वहीं, बीजेपी एआईएडीएमके के साथ मिलकर राज्य में परचम लहराना चाहती है। इसके अलावा कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां और अभिनेता विजय की टीवीके भी चुनावी मैदान में हैं। इन सबके बीच में बीजेपी तमिलनाडु में सुपर एक्टिव दिखाई दे रही है। भगवा पार्टी राज्य में सभी संभावनाओं को कलाश रही है। इसी सिलसिले में बीजेपी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बैनर तले छोटे-छोटे दलों को शामिल करवा रही है, जिससे एनडीए का कुनबा बड़ा हो रहा है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व बीजेपी करती है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर पर बीजेपी लगातार एनडीए के कुनबे को मजबूती देती रहती है। इसका ताजा उदाहरण नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव हैं, जहां बीजेपी ने छोटे दलों को मिलाकर चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बीजेपी यही फॉर्मूला तमिलनाडु में भी अपना रही है। यही वजह है कि बीजेपी ने तमिलनाडु एनडीए में सबसे ताजा ज्वानिंग टीटीवी दिनाकरन की पार्टी एएमएमके करवाई है। तमिलनाडु में बीजेपी के प्रभारी पीयूष गोयल ने पिछले दिनों की दिनाकरन को एनडीए में शामिल करवाया। ऐसे में तमिलनाडु में छोटे दलों को साथ लेकर बीजेपी कैसे आगे बढ़ रही है? आइए समझते हैं...
तमिलनाडु में बीजेपी कमजोर
दरअसल, तमिलनाडु में बीजेपी परंपरागत रूप से हमेशा से कमजोर रही है। राज्य में डीएमके और एआईएडीएमके जैसे द्रविड़ पार्टियों का दबदबा रहा है। लंबे समय से इन्हीं दोनों दलों की तमिलनाडु में सरकारें रही हैं। मगर, हाल के वर्षों में बीजेपी ने छोटे दलों के साथ गठबंधन करके अपनी स्थिति मजबूत की है। यह रणनीति मुख्य रूप से चुनावी गठजोड़, जाति-आधारित छोटे दलों को शामिल करना और राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व के जरिए आगे बढ़ रही है।
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छोटे दलों के साथ बढ़ा वोट शेयर
हालांकि, 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने तमिलनाडु में कई छोटे दलों के साथ गठबंधन किया। इस गठबंधन में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली लेकिन पार्टी का वोट शेयर बढ़ा। इन गठबंधनों से बीजेपी का वोट शेयर 11.38% तक पहुंचा, जो पहले की तुलना में सुधार था। छोटे दलों के साथ गठबंधन से बीजेपी की जमीनी स्तर पर पहुंच बढ़ रही है। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में पट्टाली मक्कल काची (PMK) को 10 सीटें दी। यह पार्टी वन्नियार समुदाय पर मजबूत पकड़ रखती है। इसके अलावा, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK), इंडिया जननायक काची (IJK), तमिलगा मक्कल मुनेत्र कड़गम (TMMK) जैसे छोटे दलों के साथ सीट-शेयरिंग समझौता किया।
यह छोटे दलों की जातिगत अपील का फायदा उठाकर बीजेपी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा था। छोटे दल बीजेपी को दक्षिण भारत में पैर जमाने में मदद कर रहे हैं। यही वजह है कि बीजेपी 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की तैयारी में छोटे दलों को शामिल करके एक 'मेगा गठबंधन' बनाने पर जोर दे रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु बीजेपी नेताओं को निर्देश दिया है कि छोटे दलों को शामिल करें और एआईएडीएमके के साथ मिलकर काम करें। शाह ने कहा कि एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन भारी बहुमत से जीतेगा और बीजेपी सरकार में शामिल होगी। बता दें कि राज्य में एआईएडीएमके बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका में है।
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बीजेपी के संभावित गठबंधन में कौन?
संभावित गठबंधन में एआईएडीएमके, पीएमके, टीटीवी दिनाकरन की एएमएमके, ओ पन्नीरसेल्वम गुट, विजयकांत की डीएमडीके और अन्य छोटे दल शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा जो पार्टी जिले स्तर पर भी मजबूत है बीजेपी उसे भी एनडीए में शामिल कर सकती है। ऐसे में बीजेपी छोटे दलों को साथ लेकर एक बड़ा गठबंधन बना रही है, जो उसे डीएमके के खिलाफ मजबूत स्थिति में ला सकता है। यह रणनीति दक्षिण भारत में बीजेपी की विस्तारवादी योजना का हिस्सा है।