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चौथी सीट, 4 वोट ज्यादा; जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा चुनाव कैसे जीती BJP?

जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा की 4 सीटों के लिए शुक्रवार को वोटिंग हुई। तीन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस तो एक पर बीजेपी को जीत मिली है।

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बीजेपी के सत शर्मा ने राज्यसभा की सीट जीती है। (Photo Credit: X@iamsatsharmaca)

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जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को राज्यसभा की 4 सीटों के लिए चुनाव हुए। इनमें 3 पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत हुई। चौथी सीट बीजेपी के खाते में चली गई। अनुच्छेद 370 हटने और अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा का यह पहला चुनाव था।


एक सीट के लिए बीजेपी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा को उतारा था। उन्होंने इसे जीत लिया। माना जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग का फायदा बीजेपी को मिला। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बीजेपी के पास 28 विधायक हैं लेकिन सत शर्मा को 32 वोट मिले। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके विधायकों ने क्रॉस वोटिंग नहीं की तो फिर बीजेपी को 4 वोट ज्यादा कैसे मिल गए?


वहीं, सत शर्मा ने अपनी जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि 4 विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर उनका समर्थन किया।

 

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राज्यसभा चुनाव क्यों हुए? किसे कितने वोट मिले? और बीजेपी ने कैसे बाजी मार ली? जानते हैं।

क्यों हुए थे राज्यसभा चुनाव?

जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की 4 सीटें हैं। यह चारों सीटें साढ़े 4 साल से खाली थीं। यह सीट गुलाम नबी आजाद, मीर मोहम्मद फयाज, श्मशेर सिंह और नजीर अहमद का कार्यकाल खत्म होने के बाद से खाली थीं। इन चारों का कार्यकाल फरवरी 2021 में खत्म हो गया था।


चूंकि, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं हुए थे, इसलिए राज्यसभा के चुनाव भी अटके हुए थे। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसके बाद अब राज्यसभा चुनाव कराए गए।

 

सज्जाद किचलू, शम्मी ओबेरॉय और चौधरी मोहम्मद रमजान। (Photo Credit: PTI)

4 सीटों पर चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 3 अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए थे। वह इसलिए क्योंकि यह चारों सीटें तीन अलग-अलग कैटेगरी में थीं। 


पहली सीट के लिए एक नोटिफिकेशन, दूसरी सीट के लिए दूसरा नोटिफिकेशन और बाकी बची दो सीटों के लिए तीसरा नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसका मतलब हुआ कि पहली और दूसरी सीट के लिए अलग-अलग वोटिंग हुई, जबकि तीसरी और चौथी सीट की वोटिंग एक साथ हुई थी।

 

किसको कितने वोट मिले?

पहली सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान और बीजेपी के अली मोहम्मद मीर के बीच मुकाबला था। इसके लिए 87 विधायकों ने वोट डाला। एक वोट रिजेक्ट हो गया। इसलिए जीत के लिए 44 वोटों की जरूरत थी। विधानसभा के सचिव एमके पंडिता ने बताया कि चौधरी मोहम्मद रमजान को 58 जबकि बीजेपी के अली मोहम्मद मीर को 28 वोट मिले।


दूसरी सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद किचलू और बीजेपी के राकेश कुमार के बीच सीधा मुकाबला था। इसके लिए कुल 87 विधायकों ने वोट डाला, जिसमें से दो वोट रिजेक्ट हो गए। इस तरह से जीत के लिए 43 वोटों की जरूरत थी। सज्जाद किचलू को 56 और बीजेपी के राकेश कुमार को 29 वोट मिले। 

 

 

वहीं, तीसरी और चौथी सीट के लिए एक साथ वोटिंग हुई। इन दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस से शम्मी ओबेरॉय और इमरान नबी डार, जबकि बीजेपी ने सत शर्मा को मैदान में उतारा था। कुल 87 वोट पड़े, जिसमें से 3 रिजेक्ट हो गए। इस तरह से जीत के लिए हर उम्मीदवार को कम से कम 28 वोट की जरूरत थी। सत शर्मा को 32, इमरान नबी डार को 21 और शम्मी ओबेरॉय को 31 वोट मिले। तीसरी सीट पर शम्मी ओबेरॉय और चौथी सीट पर सत शर्मा की जीत हुई।

 

चौथी सीट कैसे जीत गई बीजेपी?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 विधायक हैं। दो सीटें अभी खाली हैं। इस तरह से कुल 88 विधायक हैं। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद गनी लोन ने वोट नहीं डाला। इस तरह 87 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग की।


चौथी सीट बीजेपी के खाते में जाने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं। सज्जाद गनी लोन ने आरोप लगाया कि यह नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच 'फिक्स्ड मैच' था।


उन्होंने कहा, 'शुक्र है कि मैंने वोट नहीं डाला। सोचिए मेरी क्या हालत होती। अब साबित हो गया है कि यह एक फिक्स मैच था।' उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोट क्यों डाले? उन्हें इसकी जरूरत नहीं थी। उन्होंने तीसरे उम्मीदवार के लिए 31 वोट डाले। सिर्फ 29 वोट ही काफी होते। 28 भी। क्योंकि बीजेपी चौथी सीट के लिए लड़ रही थी। किसने क्रॉस वोटिंग की? किसके वोट रिजेक्ट हुए? किसकी मिलीभगत थी?'

 

 

हालांकि, सीएम उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि उनके विधायकों ने क्रॉस वोटिंग नहीं की। उन्होंने कहा, 'हमारे किसी भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग नहीं की। तो सवाल उठता है कि बीजेपी को 4 एक्स्ट्रा वोट कहां से मिले? वे विधायक कौन थे, जिन्होंने वोट देते समय जानबूझकर गलत प्रिफरेंस नंबर डाला और अपना वोट रिजेक्ट करवाया?'

 

उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए आगे लिखा, 'क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि हमें वोट देने का वादा करने के बाद हाथ उठाकर बीजेपी की मदद करने की बात को कबूल करें? किस दबाव या लालच में उन्होंने मदद की? देखते हैं कि बीजेपी की सीक्रेट टीम में से कोई अपनी आत्मा बेचने की बात कबूल करता है या नहीं।'

 

 

वहीं, हारे हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार इमरान नबी डार ने बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का इल्जाम लगाया है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के पास यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। उनके पास सिर्फ 28 विधायक थे। उन्हें 32 वोट कैसे मिल गए? यह साफ है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई है।'


उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने 4 वोट खरीदे होंगे। उन्होंने कहा, 'उन चार लोगों ने हमें वोट देने का वादा किया था। अगर उनमें थोड़ी भी शर्म बची है तो उन्हें आगे आकर मानना चाहिए कि उन्होंने बीजेपी को वोट दिया था।'


वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू ने कहा कि कुछ वोट रिजेक्ट हो गए और इस कारण उनकी पार्टी चौथी सीट हार गई।

 

ऐसा माना जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग नहीं होती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीसरे उम्मीदवार को 31 की बजाय 28 वोट भी मिलते तो मामला फंस सकता था और बीजेपी के लिए जीत मुश्किल हो सकती थी। सज्जाद लोन ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीसरे उम्मीदवार के लिए 31 वोट क्यों डलवाए और चौथे उम्मीदवार के लिए सिर्फ 28 वोट क्यों छोड़े? अगर क्रॉस वोटिंग न होती तो टाई हो सकता था।'

 

 

उन्होंने कहा, 'अगर गंभीरता से कोशिश की जाती तो तीसरे उम्मीदवार के लिए 30 वोट होते। यानी चौथे उम्मीदवार के लिए 29 वोट बचते, जबकि बीजेपी के पास 28 वोट होते।' उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि 'नेशनल कॉन्फ्रेंस बताए कि बीजेपी चौथी सीट कैसे जीत गई?'

 

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बीजेपी ने क्या कहा?

बीजेपी नेताओं का कहना है कि विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर उनका समर्थन किया।


बीजेपी उम्मीदवार सत शर्मा ने कहा, 'सभी ने बीजेपी का समर्थन किया। मैं इस राज्यसभा सीट के लिए मेरी उम्मीदवारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का धन्यवाद देता हूं। हमारे 28 विधायक हैं लेकिन 4 विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर हमारा समर्थन किया। क्या 4 विधायकों का अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनना गलत था?'

 

 

वहीं, बीजेपी नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि यह उमर अब्दुल्ला की विचारधारा की हार है। उन्होंने कहा, 'यह पारदर्शिता की बड़ी जीत है। उमर अब्दुल्ला ने जिस तरह से एक खास समुदाय के नाम पर धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर वोटों को एकजुट करने की कोशिश की, वह उनकी विचारधारा की बड़ी हार है।'

 

 

उन्होंने आगे कहा, 'अब्दुल्ला परिवार बहुत चाला है। उन्होंने तीन पीढ़ियों से जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुलाम बनाकर रखा है। वे कभी विकास के नाम पर वोट नहीं मांगते, बल्कि धर्म, जाति, अलगाववाद, आतंकवाद और पत्थरबाजों के नाम पर वोट मांगते हैं।'


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