आम आदमी पार्टी के जो सितारे 2025 की शुरुआत कर बुलंद थे वे अब कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। पार्टी पिछले साल दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार गई थी। इसके बाद उसे दूसरा बड़ा झटका शुक्रवार (24 अप्रैल) को लगा, जब राघव चढ्ढा की अगुवाई में आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी। सातों के चले जाने से पार्टी के अब 3 सांसद ही राज्यसभा में बचे हैं। पार्टी में इतनी बड़ी मात्रा में सांसदों का टूटना किसी भी दल को तोड़ देता है।
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राघव चढ्ढा ने कहा कि वह 'आप' के दो तिहाई सांसदों को तोड़कर उनका बीजेपी में विलय करने जा रहे हैं। यह झटका पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा झटका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पार्टी से 7 सांसदों के टूटने से पंजाब में आम आदमी पार्टी के वोट बैंक पर क्या असर होगा? इस सवाल का जवाब समय की गोद में है।
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पंजाब की राजनीति को लेकर झटका
बगावत करने वाले इनमें से सभी सांसद पंजाब से आते हैं। ऐसे में पंजाब की राजनीति को लेकर इसे झटके के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, माना जा रहा है कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में यह टूट आम आदमी पार्टी को चुनाव में नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें देखने वाली बात यह है कि यह नेता किस तरह से पार्टी को झटका देंगे।
कोई फुल टाइम नेता नहीं
मगर, इसमें बारीकी से देखने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी के सातों बगावती सांसदों में से चार सांसद फुल टाइम नेता नहीं हैं। अशोक मित्तल, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता पंजाब के बड़े कारोबारी हैं। वहीं, हरभजन सिंह भारत के मशहूर क्रिकेटर रहे हैं। ऐसे में राघव चड्डा, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक ही फुल टाइम नेता हैं। इन तीनों सांसदों का भी कोई मजबूत जनाधार नहीं है।
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इनमें से चढ्ढा को छोड़कर एक भी सांसद कभी विधायकी और सांसदी का चुनाव नहीं जीता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को इनके जाने से जमीन पर कोई खास नुकसान होता हुआ दिखाई देता है। हालांकि, इससे पहले भी कई बड़े नेता आम आदमी पार्टी को छोड़कर पार्टी को झटका दे चुके हैं। मगर, इसका पार्टी को चुनावों में कोई खास असर नहीं हुआ।
पहले भी लग चुके हैं झटके
साल 2015 में सबसे पहले पार्टी के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और प्रोफेसर आनंद कुमार ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद कुमार विश्वास, आशुतोष, कपिल मिश्रा और कैलाश गहलोत पार्टी छोड़ चुके हैं। इन नेताओं के जाने के बाद भी अरविंद केजरीवाल साल 2015 और 2020 का दिल्ली विधानसभा चुनाव रिकॉर्ड सीटों से जीत चुकी है। इसके अलावा पार्टी ने 2022 में पंजाब में भी जीतकर ऐतिहासिक सरकार बनाई है।
आम आदमी पार्टी की मजबूती
आम आदमी पार्टी ने 2022 में ही गुजरात और गोवा विधानसभा चुनाव में सीटें जीतकर अपनी मजबूत उस्थिती दर्ज करवा चुकी है। दरअसल, आम आदमी पार्टी 'एक नेता' के आदेश पर चलने वाली पार्टी है, जहां अरविंद जेकरीवाल केंद्र में हैं। इसलिए पार्टी से किसी भी बड़े नेता के जाने के बाद भी मूल संरचना नहीं टूटटी है और इसका जनता के बीच भी कोई खास असर नहीं होता है। इसका साफ मतलब है कि पार्टी की दूसरे स्तर की लीडरशिप जरूर कमजोर हुई है लेकिन आम आदमी पार्टी की मजबूती बची हुई है।