भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि पार्टी एक चुनाव खत्म होने से पहले ही दूसरी की तैयारी में जुट जाती है। कल दिल्ली में हुए सियासी घटनाक्रम से कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी अब पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत कुल 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी को अलविदा कहकर बीजेपी का दामन थामने का फैसला कर लिया है। इन 7 में से 6 सासंद पंजाब से चुनकर दिल्ली आए थे। इस सियासी घटनाक्रम से पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी में आम आदमी पार्टी से आने वाले नेताओं की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के लिए कहा करते थे कि कांग्रेस के नेता टूटकर दूसरी पार्टियों में चले जाते हैं लेकिन हमारे एक भी नेता को बीजेपी तोड़ नहीं पाती। अब बीजेपी ने उनके ही 7 राज्यसभा सांसदों को तोड़ लिया है। पंजाब में बीजेपी में अब दूसरे दलों से आए नेताओं की लिस्ट और भी ज्यादा लंबी हो गई है। कांग्रेसी और अकालियों के बाद अब AAP के नेता भी इस लिस्ट में जुड़ गए हैं।
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कांग्रेस- अकाली नेता बीजेपी में
पंजाब बीजेपी के मौजूदा प्रधान सुनील जाखड़ एक समय कांग्रेस के प्रधान हुआ करते थे। इसके अलावा पंजाब के पूर्व मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दशकों तक कांग्रेस की राजनीति की और अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल, जयइंद्र कौर, प्रितपाल सिंह बलियावाल, रंजन कामरा, फतेहजंग बाजवा, केवल ढिल्लों, जगमीत सिंह, रिपजीत सिंह बराड़, अश्वनी सेखड़ी ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा। इसके अलावा अकाली दल से गोनी अजनाला, परमिंद्र बराड़, जगदीप सिंह नकई और महेंद्र कौर जोश सहित कई नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं।
AAP के नाराज नेताओं पर नजर
भारतीय जनता पार्टी की नजर अब पंजाब में आम आदमी पार्टी के नाराज नेताओं पर है। पंजाब में AAP के कई नेताओं को नाराज बताया जा रहा है। इनमें कई ऐसा नाम शामिल हैं जिन्हें कैबिनेट से हटाया गया है। इसके अलावा कई विधायक भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की इन सभी नेताओं पर नजर है।
संदीप पाठक और राघव चड्ढा ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों ने आम आदमी पार्टी के लिए रणनीति तैयार की थी। राघव चड्ढा को तो विपक्ष पंजाब का सुपर सीएम तक कहता था। ऐसे में उनके आने से बीजेपी को पंजाब में रणनीतिक बढ़त मिली है। इन दोनों नेताओं के AAP नेताओं और विधायकों के साथ अच्छे संबंध हैं। ऐसे में यह दोनों नाराज नेताओं को बीजेपी के पाले में लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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बीजेपी की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अब तक कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई है। पार्टी कई बार सत्ता में रही है लेकिन गठबंधन में जूनियर पार्टनर के तौर पर। अकाली दल पंजाब में बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका निभाता रहा है लेकिन किसान कानूनों के कारण अकाली दल ने पंजाब में बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद बीजेपी अकेले ही चुनाव लड़ रही है। हालांकि, बीजेपी चुनाव में कुछ खास असर नहीं दिखा पाई। पार्टी के पास पंजाब में एक भी सांसद नहीं है। बीजेपी 2027 चुनाव अकेले लड़ने का मन बना चुकी है। ऐसे में पार्टी दूसरी पार्टी के नेताओं के लिए दरवाजे खोल चुकी है। इससे पहले भी कई नेताओं को शामिल करवाया गया है।