logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बंगाल के हिमंता बनेंगे शुभेंदु अधिकारी? जहांगीर खान की बातों ने कर दिया इशारा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कामयाबी यह मानी जा रही है उनके मुख्यमंत्री बनते ही फलता विधानसभा का चुनाव लगभग निर्विरोध जैसा हो गया है।

himanta biswa sarma and suvendu adhikari

हिमंता बिस्वा सरमा और शुभेंदु अधिकारी, Photo Credit: Social Media

भारतीय जनता पार्टी (BJP) में दूसरे दलों से आए कई नेता मुख्यमंत्री बन चुके हैं। हाल ही में शुभेंदु अधिकारी भी इस लिस्ट में शामिल हुए और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बन गए। शुभेंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुआ करते थे और राज्य सरकार में मंत्री थे। अब फलता विधानसभा चुनाव में जो कुछ हुआ है, वह यह दिखा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी भी हिमंता बिस्वा सरमा की तरह बीजेपी के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। शुभेंदु अधिकारी से पहले हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस से बीजेपी में आए और देखते ही देखते पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी की काफी मदद की। अब वह बीजेपी के ऐसे मजबूत नेताओं में गिने जाने लगे हैं जो अपने दम पर पार्टी को जिताने की क्षमता रखते हैं।

 

हिमंता बिस्वा सरमा का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ा है। वह 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी में आ गए थे लेकिन तब उन्हें बीजेपी ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया था। 5 साल वह सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में मंत्री रहे। 2021 में जब फिर से बीजेपी जीती तो हिमंता ने अपना दावा रखा और बीजेपी ने सर्बानंद सोनोवाल की जगह हिमंता बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बना दिया। इस बार वह अपने दम पर बीजेपी को जिताने में कामयाब रहे और बिना दोबारा सोचे ही बीजेपी ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बना दिया। यह दिखाता है कि वह बीजेपी के लिए कितने अहम हो गए हैं और पार्टी नेतृत्व को उन पर कितना भरोसा है।

शुभेंदु अधिकारी ने क्या कर दिखाया?

टीएमसी से बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी दो-दो बार ममता बनर्जी जैसी कद्दावर नेता को हरा चुके हैं। 2021 से 2026 तक वह नेता प्रतिपक्ष रहे और तमाम कयासों के बावजूद वही मुख्यमंत्री भी बने। शपथ लेने के चंद दिनों में ही वह बेहद सख्ती से पार्टी के अजेंडा और मैनिफेस्टो को लागू करते दिखे हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा फलता विधानसभा सीट की हो रही है। अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में गिने जा रहे जहांगीर ने अब ना सिर्फ इस सीट से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं बल्कि वह शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते देखे जा सकते हैं। 

 

यह भी पढ़ें: मंत्रिमंडल सेट, अब UP के संगठन में महिला, दलित और OBC को संतुलित करेगी BJP

 

रोचक बात है कि शुभेंदु अधिकारी ने भी फलता में प्रचार किया था। जहांगीर खान के पीछे हटने पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनको पोलिंग एजेंट तक नहीं मिले तो पीछे हटने के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं बचा था। अब इसे शुभेंदु अधिकारी की कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है कि वह एक प्रखर विरोधी को मैनेज करने में कामयाब हो गए। फलता विधानसभा सीट पर टीएमसी लगातार चुनाव जीत रही थी और अब उसके मैदान से ही हट जाने से माना जा रहा है कि यहां बीजेपी जीत सकती है। अगर यह सीट बीजेपी के खाते में जाती है तो शुभेंदु अधिकारी का दबदबा और मजबूत हो जाएगा।

शुभेंदु के लिए क्या बोले जहांगीर खान?

हैरानी की बात यह देखी गई कि जो जहांगीर खान चंद दिनों पहले अदालत तक पहुंच गए थे, वही शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करने लगे। उम्मीदवार से पीछे हटते हुए उन्होंने कहा था, 'मैं फलता का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण रहे और इसका विकास हो। मुख्यमंत्री ने फलता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है इसलिए मैंने पुनर्मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसाल लिया है।'

 

यह भी पढ़ें: BSP के करीब सपा से दूरी, यूपी में नया दांव खेल रहे राहुल गांधी? खुल गया भेद

हिमंता जैसा कैसे बनेंगे शुभेंदु?

बीते कुछ साल में यह देखा गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस में जबरदस्त सेंध लगाई है। वह खुलेआम कहते हैं कि कांग्रेस में किसे टिकट मिलेगा यह भी वही तय करते हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई थी तब भी हिमंता ने यही कहा था। इस बार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के बड़े नेता रहे प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल हो गए और कांग्रेस को इसका नुकसान हुआ। इसके पीछे भी हिमंता का ही दिमाग बताया गया। इस तरह से उन्होंने गौरव गोगोई को अकेला कर दिया और कांग्रेस को बुरी तरह हराने में कामयाबी पाई।

 

ऐसा ही कुछ शुभेंदु अधिकारी भी करते दिख रहे हैं। वह अपनी धुर विरोधी पार्टी के एक ऐसे नेता को मैनेज करने में कामयाब हुए बताए जा रहे हैं जो खुद को 'पुष्पा' बता रहा था और ना झुकने की कसमें खा रहा था। हिमंता और शुभेंदु में एक और चीज कॉमन है कि दोनों प्रमुख विपक्षी दल और राज्य की सत्ता पर काबिज रहे दल से आए हैं। दोनों ने ही जब पार्टी बदली तो राज्य में मंत्री थे। शुभेंदु अधिकारी ने भी मंत्री पद छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की थी और हिमंता बिस्वा सरमा ने भी यही किया था। शुभेंदु पहली बार में बीजेपी को सत्ता में तो नहीं ला पाए लेकिन उसकी सीटें 3 से बढ़कर 77 तक हो गई थी।

 

यह भी पढ़ें: TMC के साथ भी होगा AAP जैसा खेल? ममता ने पद छीना, अब मिली Y कैटगरी की सुरक्षा

 

वह लगातार 5 साल सक्रिय रहे और ममता बनर्जी के धुर विरोधी बनकर उभरे। नतीजा यह हुआ कि चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी ने उनके नाम पर तुरंत फैसला कर लिया और उन्हें अपने पुराने नेताओं पर तरजीह दी। अब जिस तरह से उन्होंने अपनी शुरुआत की है, अगर ऐसा ही चला तो आने वाले समय में वह भी अजेंडा लागू करने के मामले में ही हिमंता बिस्वा सरमा की तरह ही बीजेपी के बड़े पोस्टर बॉय बनकर उभर सकते हैं। 


और पढ़ें