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कर्नाटक में होगा राजस्थान जैसा नाटक, क्या गहलोत की राह पकड़ेंगे CM सिद्धारमैया?

कर्नाटक में आज सीएम सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा है। ऐसी ही कोशिश कांग्रेस ने 2022 में राजस्थान में भी की थी लेकिन अशोक गहलोत ने पार्टी की कोशिशों को नाकाम कर दिया था।

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कांग्रेस नेता, Photo Credit: AI

कांग्रेस पार्टी इन दिनों एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है जो देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी के फैसले अब पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। तमिनलनाडु में पार्टी ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके को छोड़कर विजय का समर्थन कर उन्हें सीएम बनाया। केरल में विधायकों के समर्थन के बावजूद राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल की जगह जनता में लोकप्रिय वीडी सतीशन को सीएम बनाया और अब कर्नाटक के नाटक का अंत करने के लिए पार्टी ने बड़ा फैसला ले लिया है। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के घर पर आज एक बड़ी बैठक जारी है और माना जा रहा है की इस बैठक के बाद वह इस्तीफा दे सकते हैं और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार को सब्र का फल मिल सकता है। इस बीच राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत की चर्चा हो रही है। 


कांग्रेस की और से अभी तक सीएम सिद्धारमैया के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि कर्नाटक में सत्ता की चाबी डीके शिकुमार को मिलने वाली है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से इस्तीफा मांग लिया है। हालांकि, ऐसा ही कुछ कांग्रेस नेतृत्व कुछ साल पहले राजस्थान में भी करने वाला था लेकिन जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत ने पार्टी का फैसला नहीं माना और सीएम बने रहे। 

 

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अशोक गहलोत ने किया था खेल?

2028 में कांग्रेस पार्टी राजस्थान में सत्ता में आई थी लेकिन पार्टी ने सचिन पायलट की जगह अशोक गहलोत को सीएम बनाया। पूरे पांच साल सचिन पायलट कोशिश करते रहे लेकिन अशोक गहलोत ने उनकी सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया। एक बार तो सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ बागी भी हो गए लेकिन उनकी वह कोशिश भी नाकाम रही। 

 

सचिन पायलट ही नहीं बल्कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी अशोक गहलोत को दिल्ली बुलाने की कोशिश की और राजस्थान की कुर्सी छोड़ने के लिए कहा। हालांतकि, अशोक गहलोत ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ठुकरा दिया और सीएम बने रहना पसंद किया। अशोक गहलोत ने पार्टी हाई कमान की तमाम कोशिशों को नाकाम कर दिया। 

कांग्रेस अध्यक्ष पद से किया था किनारा

अशोक गहलोत को पार्टी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहती थी। अशोक गहलोत ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। बताया जा रहा है कि उस समय अशोक गहलोत किसी भी कीमत पर सीएम की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते थे क्योंकि उनके बाद पार्टी की पसंद उनके विरोधी सचिन पायलट होते। अशोक गहलोत के करीबी विधायकों ने पार्टी के पर्यवेक्षकों के लिए बहुत असहज स्थिति पैदा कर दी थी। उन्हें बिना विधायक दल की मीटिंग के ही दिल्ली लौटना पड़ा था। गांधी परिवार के वफादार अशोक गहलोत ने पार्टी हाई कमान से ही बगावत कर दी भले ही परोक्ष रूप में। 

 

जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से गहलोत की छवि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच कमज़ोर हुई है। इस घटनाक्रम के बाद अशोक गहलोत के करीबी विधायकों को पार्टी ने नोटिस भी जारी किया था। हालांकि, इसके बाद पार्टी हाई कमान ने हार मान ली थी और टकराव के बजाय अशोक गहलोत को राजस्थान का सीएम बने रहने दिया। 

 

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सिद्धारमैया करेंगे अशोक गहलोत जैसा खेल?

2022 में जो स्थिति अशोक गहलोत के सामने थी आज वही स्थिति कर्नाटक के मौजूदा सीएम सिद्धारमैया के सामने है। पार्टी चाहती है कि वह अपनी कुर्सी छोड़ें और डीके शिवकुमार को सीएम बनने दें। उनके करीबी विधायकों के अनुसार, वह इस बात के लिए पार्टी नेतृत्व को वादा दे चुके हैं कि वह इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, राजनीति संभावनाओं का खेल है। ऐसे में सिद्धारमैया के अगले कदम पर सभी की नजर होगी। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खिंचतान के कारण पार्टी सत्ता से बाहर हो गई लेकिन कर्नाटक कांग्रेस पार्टी के लिए डू और डाई मुकाबले की तरह है। कांग्रेस की कुछ ही राज्यों में सरकार है और कर्नाटक उनमें से सबसे अहम है। इसलिए पार्टी की राज्य पर नजरें हैं। 


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