उत्तर प्रदेश के फैजुल्लागंज वार्ड में 2023 में निकाय चुनाव हुआ था। उस चुनाव में बीजेपी (BJP) के प्रदीप शुक्ला जीते थे, जबकि समाजवादी पार्टी के ललित किशोर चुनाव कुछ वोटों से हार गए थे। चुनाव के बाद ललित किशोर तिवारी ने प्रदीप शुक्ला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के मुताबिक प्रदीप शुक्ला ने चुनाव के दौरान हलफनामे में खुद से जुड़ी जानकारी छिपाई थी। इन्हीं दावों के आधार पर ललित किशोर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के फैसले में ललित किशोर के दावे सही साबित हुए, जिसके बाद प्रदीप को पार्षद के पद से हटाया गया और ललित को नया पार्षद बनाया गया।
यह मामला लखनऊ हाई कोर्ट का है, जहां के जज ने इस मामले को लेकर दिसंबर 2025 में ही फैसला सुनाया था। साथ ही प्रदीप शुक्ला को पद से हटाने का आदेश दिया था। 4 फरवरी के दिन ललित किशोर को शपथ ग्रहण कराने का आदेश दिया गया, लेकिन इसके बावजूद तीन महीने तक शपथ ग्रहण नहीं कराया गया। हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद 24 मई के दिन ललित किशोर ने बतौर पार्षद शपथ ग्रहण की है।
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प्रदीप शुक्ला को पार्षद पद से क्यों हटाया?
ललित किशोर ने कोर्ट के जज को बताया था कि प्रदीप शुक्ला ने चुनाव के नामांकन पत्र में खुद से जुड़ी डिटेल नहीं बताई थी। आरोप के मुताबिक प्रदीप की दो पत्नियां हैं, जिसके बारे में उन्होंने पत्र में जिक्र नहीं किया। साथ ही करोड़ों की संपत्ति, जमीन और मकान से जुड़ी बातें भी छिपाई थीं। जब इन आरोपों की जांच-पड़ताल की गई, तो कोर्ट के सामने ललित किशोर के दावे और आरोप सही साबित हुए।
हाई कोर्ट ने ललित किशोर को निर्वाचित पार्षद बनाया क्योंकि वह 2023 के चुनाव में उपविजेता थे। फैसले के मुताबिक 4 फरवरी 2026 के दिन ललित किशोर को शपथ ग्रहण करना था, जो नहीं कराया गया। उसके बाद ललित ने फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह देख हाई कोर्ट के जज राजन राय की पीठ ने मेयर के सामने रविवार के दिन शपथ ग्रहण कराने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले से समाजवादी पार्टी में खुशी का माहौल है। ललित के शपथ लेने के बाद पार्टी के नेताओं ने 'कानून जिंदाबाद' और 'सत्यमेव जयते' के नारे लगाए।