पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी
को नंदीग्राम उपचुनाव में शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने चुनाव से नाम वापस ले लिया है। इसके बाद ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि उनका गुट अब इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई में उन्हें कांग्रेस का साथ मिला है। उन्होंने असम में भी कांग्रेस का साथ देने का वादा किया है।
कोलकाता में एक सियासी हंगामे के बाद ममता बनर्जी के तेवर बदल गए। ममता के गुट ने रविवार को संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद गुरुवार रात डे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलीं, और शुक्रवार को पता चला कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। नामांकन की प्रक्रिया पहले ही खत्म हो चुकी है, इसलिए अब नए उम्मीदवार को मैदान में उतारने का समय नहीं बचा है।
ममता बनर्जी, पूर्व मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल:-
उन्हें नहीं पता कि मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ सकती। यह पार्टी मेरे साथ तब तक रहेगी जब तक मैं इस दुनिया से चली नहीं जाती। यह बहुत ही गंदा खेल है, लेकिन हम इसका मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। मैं चाहती हूं कि बीजेपी भारत से चली जाए। हम INDIA गठबंधन में एकजुटता चाहते हैं। नंदीग्राम में हम कांग्रेस पार्टी को अपना समर्थन देंगे। यह देश के व्यापक हित में है। रेजीनगर के बारे में मैं बाद में फैसला करूंगी। असम में हम चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
नाम वापस लेने पर ममता बनर्जी ने क्या कहा?
ममता बनर्जी ने कहा, 'हम संवैधानिक पद का अनादर नहीं करते, लेकिन हमें लगता है कि आज हमारे लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला दिन है। हमारे देश में जो हो रहा है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है। यह एक राजनीतिक पार्टी के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए की जा रही पूरी तरह से पक्षपाती बदले की कार्रवाई है।'
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कौन हैं संचिता प्रधान डे?
संचिता प्रधान डे एक शिक्षिका हैं। उनकी नौकरी कथित भर्ती घोटाले से जुड़े 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने पर चली गई थी। इस मजबूत सीट के लिए उन्हें कम जाना-पहचाना उम्मीदवार माना जा रहा था। नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम रही है।
नदींग्राम अहम क्यों है?
साल 2021 में ममता बनर्जी को इसी सीट पर अपने पूर्व करीबी सहयोगी और अब कट्टर विरोधी शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार मिली थी। इसके बाद वे भवानीपुर सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। इस बार भवानीपुर सीट पर भी उनकी हार हुई। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटें जीत लीं।
नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट खाली करनी थी, इसलिए उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ी, जिसके चलते 6 अक्टूबर को यहां उपचुनाव होना तय हुआ है।
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ममता बनर्जी ने अचानक क्यों बदले तेवर?
ममता बनर्जी को यह झटका ऐसे समय लगा है जब उन्हें एक और बड़ा धक्का लगा था। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज करने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि न तो ममता बनर्जी गुट और न ही ऋतब्रत बनर्जी गुट, दोनों में से कोई भी इस उपचुनाव में पार्टी का नाम और चिह्न इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। अब उनके पास कांग्रेस को समर्थन देने के अलावा कोई और चारा नहीं था। उन्होंने कांग्रेस को को समर्थन देकर बीजेपी के खिलाफ आवाज उठाने का विकल्प चुना।