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'कांग्रेस हाईकमान से मिलना आसान नहीं', अब राशिद अल्वी के बयान पर हंगामा

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने पार्टी पर मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में कोई फोरम नहीं है। जहां अपनी बात रखी जा सके। उनके इसी बयान पर कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने भी प्रतिक्रिया दी है।

Congress Leader Rashid Alvi

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी। (Photo Credit: Social Media)

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पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। सिर्फ राहुल गांधी का कहना चलता है। अब कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता राशिद अल्वी ने भी पार्टी में कम्युनिकेशन गैप का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम लीडरशिप को इग्नोर किया गया तो देश में ओवैसी जैसे नेता पैदा होते जाएंगे। अल्वी का आरोप है कि कांग्रेस हाईकमान से मिलना बहुत मुश्किल है। कोई फोरम नहीं है, जहां अपनी बात रखी जा सके। हालांकि उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व की तारीफ भी की। 

 

राशिद अल्वी ने कहा, 'शकील साहब ने क्या कहा है? मैंने देखा नहीं है। इसलिए उस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है, लेकिन कांग्रेस पार्टी में एक बड़ी परेशानी यह है कि यहां पर कोई फोरम ही नहीं है, जिस पर बात की जा सके। आमतौर पर नेताओं से लोगों का मिलना मुश्किल है। बात कोई कहे तो कहां कहे। सीडब्ल्यूसी का मेंबर तो कोई आदमी हैं नहीं। कोई दूसरा फोरम है नहीं। किससे बात कही जाए। बात तो तब कही जाए, जब मुलाकात हो। ये मुश्किल है।'

 

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राहुल गांधी के नेतृत्व पर अल्वी ने कहा, 'राहुल गांधी कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा मास फॉलोइंग वाले नेता हैं। कांग्रेस पार्टी बगैर राहुल गांधी इमेजिन नहीं की जा सकती। इसमें कहीं कोई सुबाह नहीं है। राहुल गांधी मेहनत भी करतें हैं और उनकी मास फॉलोइंग भी है। निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी के अंदर कम्युनिकेशन गैप एक बड़ा मसला है। यह शिकायत बहुत लोगों की है कि कांग्रेस पार्टी की हाईकमान से मुलाकात करना आसान नहीं है।' 

 

 

 

कम्युनिकेशन गैप खत्म होना चाहिए: अल्वी

उन्होंने आगे कहा कि कम्युनिकेशन गैप जब तक खत्म नहीं होगा, तब तक जमीनी सच्चाई का पता ऊपर तक नहीं चलेगा। कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जरूरी है। इंदिरा और राजीव गांधी हर आदमी से मिलते थे। वो हर दिन एक से डेढ़ घंटा इसी काम के लिए देते थे। कम्युनिकेशन गैप निश्चित तौर पर खत्म होना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि कम्युनिकेशन गैप को कैसे खत्म किया जा सकता है? जवाब में राशिद अल्वी ने कहा, 'यह सवाल तो कांग्रेस पार्टी के हाईकमान से पूछना चाहिए कि कम्युनिकेशन गैप कैसे खत्म किया जाए।'

'मुस्लिम नेताओं ने सत्ता के लिए कांग्रेस नहीं छोड़ी'

राशिद अल्वी ने दावा किया, 'कांग्रेस पार्टी से बहुत से मुसलमान नेता छोड़ छोड़कर गए, लेकिन इस पर कोई विचार नहीं कर रहा है कि किसी नेता ने बीजेपी नहीं ज्वाइन की। वो सत्ता के लिए नहीं गए। कांग्रेस के अंदर से जो नॉन-मुस्लिम गए, वो सब सत्ता के लिए गए। सब ने बीजेपी ज्वाइन की। कल को कांग्रेस पार्टी सरकार में आएगी, वो वापस आकर कांग्रेस के अंदर शामिल हो जाएंगे।' 

पैदा होते जाएंगे औवैसी जैसे नेता

अल्वी ने कहा, 'मुसलमान लीडर सत्ता के लालच में नहीं गए। वह इसलिए गए कि कांग्रेस पार्टी में मुस्लिम लीडरशिप को इग्नोर किया गया। मुसलमान सबसे अधिक वोट कांग्रेस को देते हैं, लेकिन लीडरशिप को इसलिए इग्नोर किया जाता है, क्योंकि बीजेपी फौरन इल्जाम लगा देती है कि मुस्लिम तुष्टीकरण हो रहा है।' उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मुस्लिम लीडरशिप को नजरअंदाज किया गया तो देश में ओवैसी जैसे नेता पैदा होते चले जाएंगे। 

सिर्फ चुनाव में याद न आए मुसलमान: मुमताज पटेल

कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने भी राशिद अल्वी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, कांग्रेस ही एक धर्म निरपेक्ष पार्टी है। यह हर तबके को साथ लेकर चलती है। आजादी के वक्त से ही देशभर के लोग एक विचारधारा के साथ जुड़े। मगर मुसलमान समाज की बात करें तो वह भी इसीलिए कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, कांग्रेस पार्टी का मूल सिद्धांत उनसे मिलता है। आजकल जो प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है कि यह मुस्लिम लीग पार्टी है, यह बिल्कुल गलत है। कांग्रेस हमेशा सबको साथ लेकर चली है। कांग्रेस ने अल्पसंख्यक के रूप में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। हमने मुसलमान राष्ट्रपति देखे हैं। अगर मुस्लिम नेता कुछ बात कह रहे हैं तो इस पर जरूर सोचना चाहिए।'

 

 

 

 

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उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि अगर मुस्लिम वोटर्स को तीसरा विकल्प दिखता है तो वह आकर्षित हो जाते हैं। बिहार चुनाव में हमने देखा है, जिस तरह से एआईएमआईएम जीतकर आई है। महाराष्ट्र में भी हमने देखा है। ये क्यूं हो रहा है? इस पर हमें सोचना चाहिए। हमें कम्युनिकेशन गैप लग रहा है। सिर्फ चुनाव के वक्त हमें मुसलमान वोटर याद नहीं आने चाहिए। उनकी समस्याओं और अत्याचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी को और मजबूती से खड़ा होना चाहिए।'

 


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