पश्चिम बंगाल में
ममता बनर्जी
की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। विधायक और पार्टी के चीफ व्हिप मदन मित्रा ने पार्टी से इस्तीफा देकर ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट का दामन थाम लिया है। मदन मित्रा को ममता बनर्जी का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। तृणमूल कांग्रेस के गठन के वक्त भी मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का साथ दिया और दशकों से पार्टी के भरोसेमंद सिपाही थे।
एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में मदन मित्रा की पत्नी और दो बेटे को तलब किया। अगले दिन यानी बुधवार को मदन मित्रा ने ममता बनर्जी से दूरी बना ली और बागी गुट में शामिल हो गए।
मदन मित्रा ने कहा, 'मैंने अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वे छह महीने या एक साल के लिए हट जाएं। मैंने उनसे कहा था कि आइए पार्टी को मजबूत करते हैं और फिर आप वापस आकर अपनी जगह ले सकते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने (अभिषेक) कहा कि मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा।'
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'अभिषेक के बचाना जरूरी है'
मदन मित्रा ने आगे बताया, 'पार्टी डूब रही है, नाव डूब चुकी है। लोग मर रहे हैं। फिर भी पार्टी ने यह तय किया... या यूं कहें कि उन्हें यह मानने पर मजबूर किया गया कि बाकी सब मर जाएं तो ठीक है, लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है। यह बेहद दुखद है।'
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पार्टी सिर्फ अभिषेक सेवा तक सीमित: मदन मित्रा
उन्होंने आगे कहा, 'पार्टी सबकी है फिर भी ऐसा लगता है कि यह केवल अभिषेक की सेवा करने तक ही सीमित है। मैं ममता जी से गुजारिश करता हूं कि आइए इसे एक मैराथन की तरह देखें। रास्ते में हम जरूर एक-दूसरे के सामने आएंगे। देखते हैं कौन सा घोड़ा आगे निकलता है। मैंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि मैं अभी भी विधायक हूं। मैंने तृणमूल से जुड़ी हर चीज़ छोड़ दी है। इसका मतलब है कि कामकाज के लिहाज से मैं अब तृणमूल का विधायक नहीं हूं।
टीएमसी में कितनी बड़ी बगावत
- मदन मित्रा को मिलकर 59 विधायक बागी।
- 20 सांसदों ने भी छोड़ा टीएमसी का दामन।
- 3 राज्यसभा सांसद भी इस्तीफे के बाद BJP में।
टीएमसी का सियासी गणित
- टीएमसी के कुल विधायक 80, लेकिन बचे सिर्फ 21।
- लोकसभा सांसद 28, अब केवल 8 ही पार्टी के साथ।
- 10 राज्यसभा सांसद, सात ही पार्टी के साथ।