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'शेर ए पंजाब' के सहारे सत्ता की सवारी करने की तैयारी में BJP, रणनीति समझिए

पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही भारतीय जनता पार्टी ने अब पंजाब में 'शेर ए पंजाब' यानी महाराजा रणजीत सिंह का राज लाने की बात कही है।

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पंजाब बीजेपी के नेता, Photo Credit: @tarunchughbjp

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भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदला और एक हिंदू की जगह जट्ट सिख चेहरे केवल सिंह ढिल्लों को मौका दिया है। केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति बीजेपी की पंजाब में विस्तार की रणनीति के तहत की गई नियुक्ति के रूप में देखी जा रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष अब खुलकर सिख हितैषी दिखाने की कोशिश कर रहे है। उनकी नियुक्ति के साथ ही बीजेपी ने 'शेर ए पंजाब' का राज लाने का एजेंडा सामने रख दिया है। 

 

महाराजा रणजीत सिंह को शेर ए पंजाब कहा जाता है। उनका नाम पंजाब के सबसे ताकतवर सिख शासकों में शामिल है। वह पंजाब के अमृतसर मं स्थित कंपनी बाग (राम बाग) में गर्मियां बिताते थे। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष अपने अमृतसर दौरे के दौरान उसी जगह पहुंचे और उन्होंने पंजाब में खालसा राज का दांव चल दिया। इससे साफ है कि पार्टी आने वाले चुनाव में इसी एजेंडे के साथ आगे बढ़ने वाली है।

 

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महाराज रणजीत सिंह के पैनोरेमा पहुंचे

गुरुवार को अमृतसर में केवल सिंह ढिल्लों ने हरमंदिर साहिब के साथ-साथ तमामज धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए और इसके बाद कंपनी बाग में बने महाराजा रणजीत सिंह पैनोरमा पहुंचे। इस दौरान राज्यसभा सांसद तरुण चुघ भी उनके साथ थे।दोनों नेताओं ने महाराजा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और महाराजा रणजीत सिंह अमर रहे के नारे लगाए। दोनों नेता 40 मिनट तक चले कार्यक्रम में महाराजा रणजीत सिंह के राज जैसा राज पंजाब में देने के दावे करते रहे। दोनों नेताओं ने कहा किपंजाब में बीजेपी की सरकार बनने पर नशा, रंगदारी, गैंगस्टरवाद को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा।

पंजाब में अहम महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के इतिहास के सबसे प्रभावशाली शासकों में माने जाते हैं। उन्हें 'शेर-ए-पंजाब' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने 19वीं सदी की शुरुआत में बिखरी हुई सिख मिसलों को एकजुट कर शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की थी। महाराजा रणजीत सिंह को पंजाब के इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में देखा जाता है जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की और विभिन्न धर्मों को साथ लेकर शासन चलाया।

 

उनका शासन केवल सैन्य शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि धर्म, सुशासन और सामाजिक समरसता के लिए भी जाना जाता है। उनके दरबार में सिखों के साथ-साथ हिंदू और मुस्लिम अधिकारी भी महत्वपूर्ण पदों पर थे। महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब को राजनीतिक स्थिरता दी, विदेशी आक्रमणों से सुरक्षित रखा और लाहौर को अपनी राजधानी बनाकर एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की। यही कारण है कि आज भी पंजाब की अस्मिता, गौरव और एकता के प्रतीक के रूप में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। महाराजा रणजीत सिंह को पंजाब के इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में देखा जाता है जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की और विभिन्न धर्मों को साथ लेकर शासन चलाया। 

 

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बीजेपी की रणनीति का हिस्सा क्यों?

महाराजा रणजीत सिंह के राज को पंजाब में आदर्श शासन के रूप में देखा जाता है। अमृसर में जिस जगह बीजेपी नेता पहुंचे वहां महाराजा रणजीत सिंह पैनोरमा संग्राहलय है। महाराजा रणजीत सिंह के जीवन और सिख साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। महाराजा रणजीत सिंह सिखों में काफी लोकप्रिय हैं। बीजेपी पंजाब में सिख वोटर्स को अपनी और करने की कोशिश कर रही है। बीजेपी के पास अब तक मजबूत सामाजिक जनाधार पंजाब में नहीं है। ऐसे में पार्टी महाराजा रणजीत सिंह के मॉडल को सामने रख रही है। इससे पार्टी एक आदर्श सरकार का मैसेज देने के साथ-साथ सिख हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है। 

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