पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं। इस बीच कई नेता नाराज भी हैं और एक दूसरे के खिलाफ ही लड़ रहे हैं। चुनाव से पहले अब कांग्रेस के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भी इस तरह का विरोध दिखाई देने लगा है। बीजेपी अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी है, लेकिन इसी कवायद के बीच पार्टी के भीतर 'टकसाली' यानी पुराने बीजेपी नेताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं के बीच खींचतान की चर्चा तेज हो गई है।
नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पूर्व कांग्रेस नेता केवल सिंह ढिल्लों की ताजपोशी के बाद से ही पार्टी में असंतोष के संकेत सामने आए और अब नई प्रदेश टीम में भी दूसरे दलों से आए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां मिलने के बाद यह बहस और तेज हो गई है। केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के समय कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी आलाकमान की आलोचना की थी। हालांकि, बाद में अमित शाह से बात करने के बाद वह शांत हो गए थे।
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कांग्रेस से आकर बने प्रदेश अध्यक्ष
28 मई 2026 को बीजेपी ने पूर्व कांग्रेस विधायक केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वह पार्टी के पहले जट्ट सिख प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पहले इस पद पर सुनील जाखड़ थे, जो खुद कांग्रेस से बीजेपी में आए थे। यानी लंबे समय से बीजेपी की कमान कांग्रेस से आए नेताओं के हाथों में ही है। केवल सिंह ढिल्लों भी जून 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे और 2022 के संगरूर लोकसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रहे थे।
केवल ढिल्लों की नियुक्ति को बीजेपी की पंजाब रणनीति में बड़ा बदलाव माना गया। पार्टी का मकसद सिख और खासकर जट्ट सिख वोटरों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना और ग्रामीण पंजाब में संगठन का विस्तार करना माना गया। लेकिन इसी फैसले के बाद पार्टी के भीतर से असहमति के सुर भी सामने आए।
जगमोहन राजू के इस्तीफे ने बढ़ाई चर्चा
केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के कुछ ही दिन बाद बीजेपी के प्रदेश महासचिव डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पूर्व आईएएस अधिकारी राजू प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदारों में भी शामिल बताए गए थे। उनके इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया। हालांकि, राजू ने अपने इस्तीफे के पीछे सार्वजनिक तौर पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया। यही वह दौर था जब पंजाब बीजेपी में पुराने नेताओं और हाल के वर्षों में दूसरे दलों से आए नेताओं के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे।
नई टीम को लेकर भी उठे सवाल
केवल सिंह ढिल्लों भले ही कांग्रेस से आए थे लेकिन उन्हें दिल्ली का आशीर्वाद मिल चुका था। इसलिए ज्यादातर नेता असंतोष के बावजूद सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन करते रहे। हालांकि, जब केवल सिंह ढिल्लों ने 2 अगस्त को राष्ट्रीय अध्यक्ष
नितिन नबीन
की मंजूरी के बाद पंजाब बीजेपी की नई प्रदेश टीम घोषित की तब स्थिति बदल गई थी। इस टीम में 12 प्रदेश उपाध्यक्ष, 5 महासचिव और 12 सचिव नियुक्त किए गए। इन 12 प्रदेश उपाध्यक्ष में से 6 ऐसे नेता हैं जो हाल के वर्षों में कांग्रेस या अन्य दलों को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं।
नई टीम की घोषणा के कुछ ही समय बाद तीन दशक से अधिक समय से भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने इस्तीफा दे दिया। ग्रेवाल ने इसे सिद्धांतों की लड़ाई बताते हुए कहा कि वैचारिक कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। होशियारपुर से बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री तीक्ष्ण सूद ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। वह होशियारपुर शहरी जिला अध्यक्ष बनाए गए सतीश बावा को 15 दिन बाद हटाकर नितिन गुप्ता नन्नू को जिम्मेदारी देने का विरोध कर रहे हैं। उनके साथ कई पदाधिकारियों ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
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आगे क्या?
भारतीय जनता पार्टी की पंजाब यूनिट अन्य राज्यों से काफी अलग है। इस राज्य में पार्टी का संगठन काफी कमजोर है और राष्ट्रीय स्वंयसेवल संघ भी पंजाब में मजबूत नहीं है। ऐसे में बीजेपी के पास मजबूत कैडर की कमी है। अकाली दल से पार्टी को कैडर मिलता था लेकिन अब वह भी अलग चुनाव लड़ रहा है। बीजेपी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है और इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब पार्टी में उठ रहे विरोध के सुरों के बाद केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय हो गया है। केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली तलब किया गया और संगठन में असंतोष को लेकर चर्चा की गई। बीजेपी के सामने अपने पुराने कैडर और दूसरे दलों से आए नेताओं को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती होगी।