logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पंजाब में सिख चेहरे की तलाश में BJP, क्या भज्जी ले पाएंगे 'पाजी' की जगह?

पंजाब में बीजेपी को लोकप्रिय सिख चेहरों की तलाश है और अब हरभजन सिंह के रूप में उसे एक नया चेहरा मिलता दिख रहा है। हरभजन हाल ही में BJP में शामिल हुए हैं।

Harbhajan Singh

हरभजन सिंह, Photo Credit: AI

शेयर करें

google_follow_us

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में सरकार चला रही है लेकिन पंजाब एक ऐसा राज्य है जहां से पार्टी के पास एक भी लोकसभा सांसद नहीं है। इस राज्य में बीजेपी को एक हिंदू पार्टी की तरह देखा जाता है और शहरी इलाकों में ही बीजेपी का प्रभाव है। 2020 तक बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती थी लेकिन उसे बहुत कम सीटें मिलती थी। अब बीजेपी राज्य में सरकार बनाने का सपना देख रही है और पार्टी को प्रभावशाली नेताओं की तलाश है। पार्टी की नजर सिख नेताओं पर है ताकि पार्टी से एक हिंदू पार्टी का टैग हटाकर पंजाब की पार्टी का टैग दिया जा सके। हाल ही में आम आदमी पार्टी से आए सांसदों में हरभजन सिंह का भी नाम शामिल है, जो एक लोकप्रिय क्रिकेटर रह चुके हैं। आने वाले दिनों में पार्टी उन्हें पंजाब में एक लोकप्रिय सिख चेहरे के तौर पर पेश कर सकती है। 

 

पंजाब में भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों में अपना प्रभाव छोड़ना चाहती है। अमित शाह ने तो अपने दम पर सरकार बनाने का दावा भी कर दिया है। ऐसे में पार्टी दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर और सामाजिक क्षेत्र के लोगों को पार्टी में जोड़ रही है। एक समय में नवजोत सिंह सिद्दू पार्टी का एक बड़ा सिख चेहरा होते थे लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर कांग्रेस की राजनीति की और अब वह सक्रिय राजनीति से बाहर हैं। हालांकि, बीजेपी उनके बदले अब तक किसी सिख नेता को खड़ा नहीं कर पाई है और कई प्रयोग भी असफल रहे हैं। ऐसे में क्या अब हरभजन सिंह, नवजोत सिंह सिद्दू की जगह ले पाएंगे?

 

यह भी पढ़ें: 7 सांसदों ने AAP छोड़ी, पंजाब के किन एक दर्जन विधायकों पर टिकी नजरें? नाम जानिए

हरभजन से बीजेपी को उम्मीद

पंजाब में बीजेपी के सिख चेहरे की तलाश हरभजन सिंह पर खत्म हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी को अच्छी बढ़त दिलाई थी और उसके पीछे मुख्य वजह उनकी लोकप्रियता और लोगों को बात समझाने की कला थी। हरभजन सिंह भी सिद्धू की तरह क्रिकेटर रहे हैं। पंजाब में वह काफी लोकप्रिय हैं और बीजेपी को उनके जैसे ही किसी लोकप्रिय चेहरे की तलाश थी।

 

हरभजन सिंह के साथ निगेटवि प्वाइंट यह है कि भले ही वह राज्यसभा सांसद बने लेकिन AAP के लिए उन्होंने सक्रिय रूप से काम नहीं किया। वह राजनीतिक बयानबाजी भी नहीं करते और सिद्धू की तुलना में बहुत कम बोलने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। राजनीतिक तौर पर वह कभी विवादों में नहीं फंसे हैं, ऐसे में वह बीजेपी के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। सिख होने के नाते और अपनी लोकप्रियता के आधार पर वह पंजाब में बीजेपी को मजबूती दे सकते हैं। 

 

हरभजन सिंह बीजेपी के लिए भले ही एक चेहरा हो सकते हैं लेकिन उनको पार्टी में एक चेहरे के रूप में पेश करना आसान नहीं होगा। हरभजन सिंह ने अभी तक राजनीति में खुद को साबित नहीं किया है। उन्हें AAP ने राज्यसभा भेजा था लेकिन ग्राउंड पर उनकी एक राजनेता के रूप में पकड़ नहीं है। इसके अलावा वह राजनीति में सक्रिय भूमिका भी नहीं निभा रहे हैं। हरभजन सिंह आईपीएल 2026 में हिंदी कमेंट्री पैनल का हिस्सा हैं और राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं। अभी तक उन्होंने सक्रिय राजनीति करने की इच्छा जाहिर नहीं की है। भारतीय जनता पार्टी में बाहर से आए कई नेता हैं जिनसे पार्टी के टकसाली नेता परेशान हैं या नाराज हैं। अगर पार्टी हरभजन को पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में पेश करती है तो पार्टी के टकसाली नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य दलों से आए दिग्गज नेता भी असहज हो सकते हैं। 

बीजेपी पहले भी कर चुकी है कई प्रयोग

यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने पंजाब में किसी लोकप्रिय चेहरे पर दांव लगाया हो। इससे पहले भी पार्टी ने दूसरी पार्टियों से कई सिख चेहरों को पार्टी में शामिल करवाया है। सन्नी देओल को राजनीति में उतारकर बीजेपी ने पंजाब में बड़ा दांव खेला था और उन्हें लोकसभा में उनकी सीट गुरदासपुर में जीत भी मिली थी। हालांकि, सन्नी देओल बीजेपी की उम्मीदें पूरा नहीं कर पाए। लोकसभा कार्यकाल के दौरान भी वह फिल्मों में व्यस्त रहे और जनता के बीच भी उनकी सक्रियता कम रही। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है और 2024 में उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा और राजनीति से दूरी बना ली। उनको लेकर बीजेपी का प्लान असफल रहा। 

 

अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में दशकों तक प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। 2017 में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन पार्टी में गुटबाजी के चलते 2022 चुनाव से पहले उन्हें पार्टी ने सीएम के पद से हटाया और उसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई। चुनाव में हार के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए। हालांकि, बढ़ती उम्र के कारण वह भी अब राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। उनकी पत्नी खुद 2024 का लोकसभा चुनाव हार गईं। वह पार्टी के नेतृत्व से भी खुश नहीं हैं। मनप्रीत सिंह बादल पंजाब की राजनीति में एक समय बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद वह भी कुछ खास नहीं कर पाए। 2024 में गिद्दड़बाहा सीट पर हुए उपचुनाव में उन्हें बुरी तरह हार मिली। 

 

मौजूदा वक्त में सिख नेताओं में देखा जाए तो बीजेपी के पास कैप्टन अमरिंदर सिंह और रवनीत बिट्टू जैसे नेता ही हैं। कैप्टन अमरिंदर की उम्र हो चली है तो रवनीत बिट्टू ही इकलौते ऐसे पगड़ीधारी नेता बचते हैं जिन्हें पंजाब के लोग अच्छे से जानते हैं। वह बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, कई बार सांसद रहे हैं और मौजूदा समय में केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं।

 

यह भी पढ़ें: 7 सांसद टूटने से पंजाब में आम आदमी पार्टी के वोट बैंक पर क्या असर होगा?

H.S. फुलका पर लगा सकती है दांव

पंजाब में बीजेपी सीनियर वकील H.S. फुलका पर भी दांव लगा सकती है। H.S. फुलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। वह हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं। बीजेपी की सिख विरोधी छवि को सुधारने में और सिखों की पार्टी के रूप में स्थापित करने में H.S. फुलका  अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, उम्र के लिहाज से वह कमजोर उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी छोड़कर राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामलि हुए विक्रमजीत सिंह साहनी, पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों, हरजीत सिंह गरेवाल, फतहजंग सिंह बाजवा जैसे नेता पार्टी के सिख चेहरों में शामिल हैं। 


और पढ़ें